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कुण्ठित प्रतिभा / प्रतिभा पलायन

भारत भूमि हमेशा से ही प्रतिभा सम्पन्न  लोगों की भूमि रही है।यहां प्रतिभाएं गली,कूचों,मुहल्लों में थोक के भाव भरी पड़ी हैं।जरूरत उन्हें तराश कर कोहिनूर हीरा बनाने की है।यह जरूरी नहीं है कि केवल शहरों में ही प्रतिभा सम्पन्न बच्चे मिलेंगे।गांव देहातों में भी शहरों की भांति विलक्षण प्रतिभा धनी बच्चे पाए जाते हैं।जरूरत एक पारखी नजर की है जो प्रतिभा ढ़ूंढ़ सके।   हमारे देश में जब से भृष्टाचार नें जन्म लिया है , तब से प्रतिभाएं कुण्ठित ज्यादा हो रही हैं।लगभग हर बार प्रतियोगी परीक्षाओं के समय पर्चा आउट होना एक आम बात होती जा रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं में सादी कापी जमा करना भी एक ट्रेण्ड बनता जा रहा है।सादी कापी वह अभ्यर्थी ही  जमा करता है जिसकी सेटिंग- गेटिंग पहले से ही हो जाती है। ऐसे प्रकरणों में 5-6 लाख रुपयों में में पहले से ही सौदा पक्का हो जाया करता है। सौदे के आधे पैसे एडवांस जमा हो जाया करते हैं, बाकी पोस्टिंग लेटर मिलनें के बाद। जहां ऐसी सेटिंग-गेटिंग पहले ही हो जाती हो वहां प्रतिभा आखिर क्या मायने रखती है।रिजल्ट घोषित होनें पर हम पाते हैं उत्तीर्ण अभ्यर्थियों में रिश्वत देनें वाले ह…
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[ M १४ ] हृदय रोग और पागलपन : कारण और उपचार [ भाग दो ]

web - gsirg.com [ M ]हृदय रोग और पागलपन : कारण और उपचार [ भाग दो  ]
इलाज का तीसरा चरण
पीपल के पेड़ से तो आप परिचित ही होंगे , क्योंकि यह पेंड़ लगभग हर जगह आसानी से उपलब्ध हो जाता है | इस पेड़ के पर्याप्त मात्रा में पत्ते लाकर , शाम को पानी में भिगो दें | सुबह होने पर '' भपके '' के जरिए इन पत्तों का अर्कनिकाल लीजिए | इस अर्कको सुरक्षित बोतलों में भरकर रख लीजिए | इसकी भी लगभग 50 ग्राम मात्रा नाश्ते के 1 घंटे बाद सेवन किया करें इस औषधि सेवन के 50 मिनट पश्चात तक कुछ न खाएं | यहअर्क दिन मेंतीन बार लिया करें | अर्क सेवन के 50 मिनट पहले तथा एक घंटा बाद कुछ भी न खाएंऔर न ही पिए |
सावधानी
रोगीको चाहिए कि वह अपने पास एलोपैथिक औषधि '' सोर्बिट्रेट 5 mg '' कि गोलियाँअपने पास अवश्य रखें | कभी-कभी ऐसा होता है कि चिकित्सीय परीक्षण में भी रोग की सही तीव्रता का पता नहीं लग पाता है | इसलिए हो सकता कि आपको अचानक हृदय रोग की पीड़ा होने लगे | ऐसे मे यह गोलियां आपके उपचार मे काम आएंगी | ह्रदय रोग का आभास होने पर इसकी एक गोली जीभ के नीचे रख लेने से , हृदय रोग की पीड़ा से आप का बचाव…

[ M 14 ] हृदय रोग और पागलपन कारण और उपचार [ भाग एक ]

web - gsirg.com [ M ]हृदय रोग और पागलपन : कारण और उपचार [ भाग एक ] मानव शरीर के समस्त महत्वपूर्ण अंगों में हृदय सर्वश्रेष्ठ अंग है | इसको सब अंगोंका राजा कहा जा सकता है | आदमी के शरीर का यह अंग जितना ही महत्वपूर्ण और उपयोगी है , उतना ही जटिल इसकी बीमारियां भी हैं | इसकी बीमारियों को ठीक करने के लिएचिकित्सक लोग प्रायः मूल्यवान औषधियों का ही प्रयोग करते हैं , जैसे मोती , स्वर्ण भस्म , जवाहर मोहरा आदि | क्योंकि हमारा देशएक कृषि प्रधान देश है , इसलिए यहां कीअधिसंख्य जनता के पास इतना अधिक पैसा नहीं होता हैकि , वह महंगा इलाज करा सके | परंतु हमारे देश पर प्रकृति माता इतनी दयालु है , कि उन्होंने गरीबों के लिए ऐसी ऐसी विभिन्न वनस्पतियां पैदा कर दी हैं , जिनसे वे लोग आसानी से कठिन रोगों से मुक्ति पा जाते हैं |
हृदय रोग का कारण
लोगों में हृदय रोग होने का प्रमुख कारण खानपान में गड़बड़ी , अनुचित आहार विहार और प्रदूषित वातावरण जिम्मेदार हैं | इसके लिए कुछ हद तक इस रोग के रोगी इस रोग के होने के लिए स्वयं जिम्मेदार हैं | उनके कुछ ऐसे क्रियाकलाप भी होते हैं जो उन्हें हृदय रोगी तथा पागलपन जैसे रोगों को अपन…

[ lL14 ] धनतेरस

Gsirg.com  [ L 14 ] धनतेरस क्या आप जानते हैं कि क्यों मनाई जाती है ? अगर नहीं तो आइए जानते हैं हमारे धार्मिकग्रंथों में एक कथा आती है किएक समय भगवान विष्णु मृत्युलोक में विचरण करने के लिए आ रहे थे , कि उनकी धर्मपत्नी , लक्ष्मी जी ने भी साथ चलने का आग्रह किया. विष्णु जी ने उनके समक्ष एक शर्त रख दी और बोले- 'यदि मैं जो बात कहूं, वैसे ही मानो, तो चलो.' लक्ष्मी जी ने स्वीकार किया और भगवान विष्णु, लक्ष्मी जी के साथ भूमण्डल पर विचरण हेतु आ गये | कुछ देर बाद एक स्थान पर आकर भगवान विष्णु लक्ष्मी से बोले- 'जब तक मैं न आऊं, तुम यहां पर ठहरो | मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं, तुम उधर न आनाऔर देखना भी नही | विष्णुजी के जाने पर लक्ष्मी जी को कौतुक उत्पन्न हुआ कि आखिर दक्षिण दिशा मे ऐसा क्या है जो मुझे श्रीविष्णु द्वारा मनाकर किया गया है , और भगवान स्वयं दक्षिण में क्यों गए | कोई कोई रहस्य जरूर है | वह इसी पर विचार करने लगी | जैसे जैसे उनका विचार का समय बढ़ता गया .उनकी उत्सुकता भी बढती गयी |अंत मे लक्ष्मी जी से रहा न गया | जैसे ही भगवान ने राह पकड़ी, वैसे ही मां लक्ष्मी भी पीछे-पीछे चल पड़ी …

[ k14 ] हृदय रोग सरल तथा चमत्कारिक औषधि [ भाग दो ]

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[ k ] हृदय रोग  सरल तथा चमत्कारिक औषधि [ भाग दो  ]

इलाज का दूसरा चरण
यदि आपके आसपास कहीं बाजार लगता हो तो वहां से पर्याप्त मात्रा में लौकी खरीद कर ले आयें | इसके साथ ही बाजार से एक '' जूसर '' भी ले आए | बाजारोंमे सीजन पर पर्याप्त मात्रा मेंलौकी उपलब्ध होती है | अगर लौकी का सीजन न हो तोबाजार से लौकीके बीज लाकर , उन्हेंगमलों में लगा दें | जिससे आपको कभी भी लौकीकी कमी न हो | अब प्रतिदिन प्रातः काल नाश्ते से 50 मिनट पहले , लौकी के ताजे रस की 50 मिलीलीटर मात्रा लेकर , प्रतिदिन लौकी का जूस पीना शुरू कर दे | [ अगर आप चिकित्सा कर सकते हो तो , लौकी के रस की जगह गाय का मूत्र भी इतनी ही मात्रा में पी सकते हैं ] हो सकता है कि आप ऐसा न कर पाएं तो न करें , लेकिन लौकी का रस जरूर पिएं | ऐसा हम इसलिए बता रहें हैं , क्योंकि गाय का मूत्र लौकी के रस की तुलना मे 5 गुना जल्दी लाभ करता है , तथा बिना किसी झंझट के आसानी से उपलब्ध भी हो जाता है | इसलिए आप अपनी मर्जी से औषधि का चयन करें | उपरोक्त कोई भी इलाज आप कर सकते हैं | आप इतना विश्वास जरूर करें कि इस इलाज के बाद आप हृदय रोग या…

डाक विभाग से आम आदमी परेशान

Gsirg.com डाक विभाग से आम आदमी परेशान डाक विभाग एक जिम्मेदार, भरोसेमंद, ईमानदार विभाग माना जाता है।अंग्रेजी सरकार से अब तक इस विभाग में एक पैसे की भी गड़बड़ी ढूंढने में भले ही सरकार के लाखों रुपए बरबाद हो जाएं लेकिन उस गड़बड़ी को करने वाले कर्मचारी की नौकरी खतरे में पड़ जाती है।अनियमितता चाहे एक रुपए की हो चाहे एक लाख की गबन ही कहा जाएगा।   यहाँ बात अनियमिता की नहीं लिपिकीय त्रुटि की है। सेहगों रायबरेली उ०प्र० के उप डाकघर में K.V.P. के परिपक्वता के समय किसान मेच्योरिटी धनराशि लेनें उप डाकघर सेहगों जाता है तो उपडाकपाल द्वारा यह कहा जाता है कि रायबरेली में फीड ही नहीं है भुगतान नहीं किया जा सकता।आखिर यह डाक विभाग की लिपिकीय त्रुटि नहीं तो और क्या है ?क्या किसान की जिम्मेदारी डाक विभाग के अभिलेखों को फीड कराने की है? किसान को बेवजह परेशान किया जाता है। या तो अभिलेखों को फीड करवाते समय का उपडाकपाल कम्प्यूटर ज्ञान का अल्प प्रशिक्षित था या फिर वर्तमान उपडाकपाल अल्प प्रशिक्षित कम्प्यूटर ज्ञानी है।हर दशा में दोष डाक विभाग का ही है।किसान को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।लेकिन भुगतान में भुगतना क…

[ g14 ] आर्थराइटिस का इलाज

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  [ g ] आर्थराइटिस का इलाज  आर्थराइटिस एकवायु विकार है जिसकी उतपत्ति तब होती है जब शरीर की गंदगी जब जोड़ो मेजमा होतीजाती है | वात रोग अचानक ही नहीं होता है , अपितु इसके पूर्व अनेक तीव्ररोगों की एक अटूट श्रंखला होती है | रोग होने से पूर्व।पीड़ित व्यक्ति को ज्वर जरूर रहता है | इसके अलावा पीड़ित द्वारा भोजन में अम्ल कारक पदार्थों का अधिकता से प्रयोगभी इस रोग के उत्पन्न होने का प्रमुख कारण होता है | अर्थराइटिस की समस्या से पीड़ित व्यक्तियों के लिए , जाड़े का मौसम अधिक कष्टदाई होता है , इसका कारण है कि यह वही दिन है जब घुटनों और अन्य जोड़ों के दर्द के मामले अधिकता से सामने आते हैं |
रोग होने के फौरी कारण
सर्दियों के दिनों में अचानक घुटनों के दर्द , जोड़ों के दर्द बढजाने केकई कारण हैं | इन दिनों में जब मौसम का तापमान घटता है तब सामान्य दिनों की तुलना मे शरीर के जोड़ अधिक कठोर हो जाते हैं | इस कठोरता के कारण ही घुटनों में तेज दर्द होता है | जैसे-जैसे वातावरण के तापमान मे व्यापक परिवर्तन होता है , वैसे वैसे सूजन भी बढ़ती जाती है , जिसके कारण आसपास की नसों में घर्षण भी बढ़ता जाता है | यह…