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छुट्टा सांडों के कारण किसानों धान की नर्सरी / बेंडन रखाने का सिरदर्द बढ़ा

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।
माननीय मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ "योगी"जी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार के कार्यों से जनता में एक अच्छा संदेश दिया है।इसके योगी आदित्यनाथ जी अवश्य ही बधाई के पात्र हैं।आपने गौ माता,गोवंशीय पशुओं के बध रोककर एक सराहनीय एवं साहसिक फैसला लिया ।समस्त हिन्दू समाज के लोगों ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त की।आपने सरकारी जमीनें, चरागाह ,खेल मैदान, समस्त सरकारी जमीन जो पट्टा रहित है खाली कराने का आदेश आपने दिया जनता ने सर-माथे चढ़ाया।दुर्भाग्य से यह योजना धरती पर पूर्ण रूप से अवतरित नहीं हो सकी।सरकारी जमीनें यदि खाली होती तो इन सांड़ों को रहनें खाने का इन्तजाम होता।गलती जनता की है यह सांड़,गाय मोदी,योगी जी नें तो छोड़ा नहीं।योगी नें गोकशी रोककर प्रशंसनीय कार्य किया है लेकिन हम आप के छोड़े गाय,बछड़े सारी क्रेडिट खराब कर रहे हैं।किसानों नें ही किसानों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है।लोग मोदी, योगी के सांड़ कहकर सम्बोधित कर रही है।फिलहाल ए सांड़ो ने एक परेशानी खड़ी कर दी है।किसानों की फसल चरने पर लट्ठ दण्ड से खाने की कीमत चुकानी पड़ती है।बेचारे पशुओं वह भी गोवंशीय  "गो…
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पाकिस्तान द्वारा सीमा पर सीज फायर के उलंघन

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।
पाकिस्तान द्वारा सीमा पर सीज फायर के उलंघन की घटनाओं में इतनी ज्यादा वृद्धि हुई है कि गिनना असम्भव नहीं तो मुश्किल जरूर है।रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने से सीमा पर स्थित गांवों के लोगों का जीना मुहाल हो गया है।गांववासियों को पलायन को विवश होना पड़ा है।निर्दोष नागरिकों को अकारण ही गोलियों का निशाना बनाया जा रहा है।उनकी जान-माल का भी भारी नुकसान हो रहा है।आखिर हम कब तक सब्र करते रहेंगे?ऐसा नहीं है कि हमारे सैनिक माकूल जबाब नहीं दे रहे हैं।पाकिस्तान उस कुत्ते की पूँछ की तरह है कि सौ साल नली में रखने के बाद भी निकालनेंं पर भी वह टेढ़ी ही निकलेगी।कब तक हमारे सब्र का इम्तहान लेता रहेगा?यह सत्य है कि युद्ध किसी समस्या का हल नहीं होता है।दोनों ओर भारी जान-माल का नुकसान होगा।हम उन्नति के मार्ग से विमुख हो जायेंगे।लेकिन रोज-रोज का झगड़ा भी तो ठीक नहीं होता है।शत्रु जिस भाषा को समझता है उसी भाषामें जबाब देना उचित है।शठे शाठ्यम् सम आचरेत के सिद्धांत पर ही जबाब देना उचित होगा।वह हमारे सामने टिक नहीं सकता है।वह बबूल की झाड़ी है तो हम विशाल वटवृक्ष हैं।जितनी उसकी जनसंख्या…

तेजी से घटता भूगर्भ का जलस्तर

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।
उत्तर प्रदेश में भूगर्भ जल स्तर इस वर्ष बड़ तेजी से घटा है।इस वर्ष गांव देहातों मे भी हैण्डपम्पों नें पानी देने से इन्कार कर दिया है।जिसके कारण पेयजल का गम्भीर संकट खड़ा हो गया है।जिन गांवों में तालाब, सरोवरों की संख्या अधिक है उन गांवों में भी पेयजल संंकट देखा जा सकता है।अत्यधिक जलदोहन, भीषण गर्मी तथा नहरों का लगभग तीन महीने से पानी न चलना भी प्रमुख कारण है।पेयजल की ऐसी विकराल स्थिति इससे पूर्व कभी नहीं देखी गई है।वृक्षों की तेज कटान जलवायु परिवर्तन का सबसे प्रमुख कारण है।लगभग हर गांवों में इण्डिया मार्का सरकारी हैण्डपम्पों को छोड़कर घरेलू हैण्डपम्प बन्द होकर मुंह चिढ़ा रहे हैं।अगर इसी तरह गर्मी पड़ती रही तो आगामी वर्षों में बुन्देलखण्ड की भांति पूरे उत्तर प्रदेश में पेयजल की स्थिति भय से भयावह होने के पूरे संकेत हैं। अतःसरकार से निवेदन है कि पेयजल की गम्भीर स्थिति को देखते हुए सभी नहरों में अविलम्ब पानी छोड़ने की कृपा करें ताकि भूगर्भ जल स्तर ऊपर उठ सके।लोगों के रुके हैण्डपम्प पुनःचालू हो सकें।किसानों की मेंथा की फसल और घरेलू नलों में पानी दोनों समस्याओं से…

भारत के दो पड़ोसी देश प्रबल शत्रु

भारत के दो पड़ोसी देश प्रबल शत्रु हैं।आजादी के बाद से ही दुश्मन नं.1चीन भारत से शत्रुता निभाता चलाआ रहा है।येन-केन-प्रकारेण भारत भूमि हड़पने का कुत्सित प्रयास करता चला आ रहा है।हर वक्त भारत को नीचा दिखाने का सपना देखता रहता है।भारत की हानि से उसको परम संतोष की प्राप्ति होती है।भारत से लगातार ईर्ष्या का व्यवहार ही करता रहता है।भारतीय बाजार से उसे अधिक लाभ होने के कारण व्यापारिक सम्बंध बनाना चीन की मजबूरी है।चीन एक स्वार्थी देश है।वह अपने लाभ के लिए किसी भी हद तक गिर सकता है।दूसरों की जमीन हड़पना ही उसकी नीति रही है।चारों ओर राज्य विस्तार करना ही उसकी मुख्य नीति रही है।
दुश्मन नं.2पाकिस्तान अपने उदय या जन्म के समय से ही भारत का परम्परागत दुश्मन रहा है।यह भी भारत के विनाश के सपने देखते रहा है।जुल्फिकार अली भुट्टो नें कहा भी था कि "घास की रोटी खायेंगे, मगर परमाणु बम बनाकर भारत का सर्वनाश जरूर करेंगें।"यह देश भी अपनी कुत्सित चालों से भारत को नुकसान पहुंचाने की चेष्टा करता ही रहता है।न शान्ति से बैठता है न ही हमें शान्ति से बैठने देता है।हजारों सैनिकों की बलि लेकर भी इन दोनों दुश्मन …

बाल विवाह

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।
भारत देश में बाल विवाह कानूनन अपराध है।अब इस प्रथा पर काफी हद तक रोक लग भी चुकी है।लोग जैसे -जैसे शिक्षित होते जा रहे हैं।वैसे-वैसे कुप्रथाओं पर अपने आप रोक सी लगती जा रही है।छुआछूत लगभग समाप्त सी हो गयी है।बाल विवाह पर भी काफी हद तक रोक लग चुकी है।अभी भी अशिक्षित, मलिन बस्तियों, आदावासियों में एक धारणा है कि 11वर्ष में कन्या के पैर पूजना ज्यादा शुभ होता है ।अतः इन लोगों में बाल विवाह के मामले यदा-कदा देखने को मिल ही जाते हैं।सरकार नें विवाह के रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था शुरु की है जो बहुत ही अच्छी योजना है।इससे बाल विवाह के बचे -खुचे मामले भी स्वतःही समाप्त हो जायेंगे। प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

विकास में सड़कों की भूमिका

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।
किसीभी देश के विकास में सड़कों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।हमारे देश में भी सड़कों का जाल बढ़ता जा रहा है।जो अच्छी बात है।जैसे-जैसे उन्नत सड़कों का जाल बढ़ता जा रहा है।वैसे-वैसे हमारा देश भारत नित नये उन्नति के सोपानों पर चढ़ता हुआ नये कीर्तिमान स्थापित करता जा रहा है।सड़कें और उन्नत सड़कें ही देश को उन्नति के मार्ग पर अग्रसर करती हैं।एक्सप्रेस वे जहां समय बचाते हैं वहां दूसरी तरफ देश की उन्नति की कहानी भी कहते हैं। जब सड़कों, राजमार्गों की स्थिति ज्यादा सुद्रढ़ होती है तो दुर्घटनाओं में भी खासी वृद्धि होती है।दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार को हर जिला अस्पताल में ट्रामा सेण्टरों के निर्माण पर भी ध्यान देना चाहिए।ताकि सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर को कम किया जा सके। अतः सरकार से निवेदन है कि प्रत्येक जिला अस्पताल में ट्रामा सेन्टरों के निर्माण पर ध्यान देने की कृपा करें।ट्रामा सेन्टरों के निर्माण के द्वारा सड़क दुर्घटनाओं, हर तरह की बीमारियों से होने वाली मौतों में कमी लाई जा सकती है। प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

विश्व पर्यावरण दिवस

5जून2018को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया।इस बार के विश्व पर्यावरण दिवस का विषय था-प्लास्टिक प्रदूषण का रोकथाम।वास्तव में प्लास्टिक न तो मिट्टी में सड़ती है,न गलती है,न कभी नष्ट होती है।एक प्रकार से यह अमर तत्व है।जलानें पर भी वायुमंडल को दूषित ही करती है।अपील भी जारी की गयी कि जूट और कपड़े के झोले का इस्तेमाल करें।परन्तु परिणाम वहीं ढ़ाक के तीन पात।
पर्यावरण की रक्षा के लिए नहरों और रेलवे ट्रैक के किनारे-किनारे केवल 100%कार्बन डाइऑक्साइड को सोंख कर 24घन्टे आक्सीजन देनें वाला पीपल के वृक्षों को लगाने की सरकार को राजाज्ञा जारी करने की जरुरत है।सरकारी जमीनों पर भी केवल पीपल के ही वृक्षों का वृक्षारोपण करने की जरूरत है।यह वृक्ष छाया और आक्सीजन दोनों प्रचुर मात्रा में देता है। जल स्तर को घटाने के लिए एक सबसे बड़ा कारक यूकेलिप्टस ही है।इस वृक्ष पर रोक लगाए जाने की जरूरत है।सबसे ज्यादा जल यहीं वृक्ष अवसोषित करता है।जलदोहन के बाद भूगर्भ जल स्तर गिरानें के लिए यहीं वृक्ष जिम्मेदार है। अतः सरकार से निवेदन है कि सरकारी जमीनों,नहर की दोनों ओर की पटरियों, रेलवे ट्रैक के किनारे दोनों ओर केवल पीपल के प…