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कबिरा शिक्षा जगत् मा भाँति भाँति के लोग।।भाग दो।।

         प्रिय पाठक गणों आपने " कबीरा शिक्षा जगत मां भाँति भाँति के लोग ( भाग-एक ) में पढ़ा कि श्रीमती रामदुलारी तालुकेदारिया इण्टर कालेज सेंहगौ रायबरेली की प्रधानाचार्या, प्रबंधक, लिपिकों आदि के द्वारा किस प्रकार शिक्षा सत्र 2015--16 तथा शिक्षा सत्र2014--15 मे किस प्रकार लगभग उन्यासी छात्रों को फर्जी ढ़ंग से प्रवेश दिलाया गया । बाद मे इन्हीं छात्रों को अगले वर्ष इण्टर कक्षा की परीक्षा दिला दी गई। इसके लिए फर्जी कक्षा 12ब3 बनाई गई। बाकायदा फर्जी छात्रों का उपस्थिति रजिस्टर भी बनाया गया। परन्तु सभी छात्रों से प्रथम तथा द्वितीय वर्ष की कक्षाओं मे निर्धारित विद्यालय फीस लेने के बावजूद भी इसका विद्यालय के रजिस्टर पर इन्दराज नही किया गया। यह अनुमानित फीस लगभग साढ़े चार लाख रुपये के आसपास थी जिसे उपरोक्त अधिकारियों / विद्यालय के शिक्षा माफियाओं द्वारा अपहृत / गवन कर लिया hi गया। यथोचित कार्रवाई हेतु इस सम्पूर्ण विवरण को प्रार्थना पत्र मे लिखकर अपर सचिव के क्षेत्रीय कार्यालय इलाहाबाद को दिनाँक 25 /05 2016 को भेजा गया।
अब हम आपको इसके शर्मनाक पात्रों का परिचय करवा देते हैं।
       😢शर्मनाक कथा केधृतराष्ट्र 😢
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       इस शर्मनाक कहानी के पहले पात्र हैं विद्यालय के प्रबन्धक महोदय। बड़े ही समझदार और नेकदिल इंसान हैं। किसी का भला करने के लिए यह किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। यही कारण है कि विद्यालय मे कई अध्यापनक अविधिक प्रक्रिया के अंनतर्गत नियुक्त हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक रायबरेली और उनके यहाँ नियुक्त कार्यालय के अन्य सुयोग्य अधिकारी कर्मचारी भी इनके आगे नतमस्तक हैं।
           यही नही विद्यालय के माध्यमिक स्तर पर योग्य अध्यापकों के होते हुए भी इन्होंने जूनियर स्तर की महिला शिक्षिका को अपने स्वार्थ और धनोपार्जन के लिये माध्यमिक स्तर पर प्रधानाचार्य नियुक्त कर रखा है। इसके अलावा कुछ जूनियर स्तर के अध्यापक भी  माध्यमिक स्तर पर कार्यरत हैं। ऐसे अध्यापक स्कूली बच्चों को कोचिंग पढ़ाकर अतिरिक्त कमाई करते हैं। साथ ही अपने धृतराष्ट्र एवं नायिका का वक्त बेवक्त किसी कानूनी झंझट मे फंस जाने पर जायज नाजायज तरीक़े से बचाव भी करते रहते हैं।
            धृतराष्ट्र से अगर विद्यालय मे हुई किसी अविधि कार्यवाही के विषय मे अगर कुछ जानकारी चाहे तो वह बड़े ही भोलेपन से कहते हैं कि उन्हे इस सम्बन्ध मे कुछ पता ही नही है।
        ☺ शर्मनाक कथा की नायिका ☺
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        यह नायिका बहुत ही भाग्य वाली है क्योंकि अपने जीवन के शुरूआती दिनों में यह इस विद्यालय में एक अंशकालिक शिक्षिका नियुक्त हुई । बाद मे नियमित रूप में कक्षा 6 से कक्षा आठ में  शिक्षण कार्य हेतु नियुक्ति पाकर शिक्षण कार्य करने लगी। भाग्यशाली इसलिए कि यह विद्यालय मे जूनियर की सहायक शिक्षिका है, प्रधान शिक्षिका भी नही है, परन्तु प्रबन्धक की मेहरबानी से इण्टर कक्षाओं की प्रधानाचार्य पद को सुशोभित कर रही है।चूंकि इसकी नियुक्ति ही अनियमित है इसलिए इसे अनियमित कार्य करने से भी कोई परहेज नही है। इसको सरकार द्वारा पर्याप्त वेतन भी मिलता है परंतु इसे पूरा नही पड़ता है इसीलिए इसने विद्यालय के छात्रों की विद्यालय फीस को हजम कर अपनी आय बढ़ाने की सोंचा ही नही बल्कि आय बढ़ाने हेतु उसे कार्यान्वित भी कर ड़ाला और करें भी क्यों न जब उससे छोटे अधीनस्थ अध्यापक कोचिंग से पैसा कमा रहे हैं, तो इसे अपनी आय बढ़ाने का यही आसान रास्ता नजर आया होगा।इस अवैध कमाई मे इसके सिपहसालार बने विद्यालय के लिपिक, विज्ञान के अध्यापकगण तथा कुछ अन्य।
  !😢! बीमार मानसिकता वाला जाँच अधिकारी!😢!
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          श्री बृजेश कुमार-प्रधानाचार्य, राजकीय इण्टर कालेज हलोर, थाना- महराजगंज, जिला- रायबरेली इस कथा के अगले पात्र हैं।महत्वपूर्ण पद का यह अधिकारी झूँठ, लोलुप, षड़्यन्त्रक,मिथ्या तथ्य बनाना, दुष्प्रेरक स्याह को सफेद करनेऔर तथ्यों को तोड़ने मरोड़ने मे यह महाशय पारंगत है। जाँ च की दशा दिशा यह अपने ढंग से निर्मित करते हैं।जाँच सही है या गलत इससे इनका कोई सरोकार नही होता क्योंकि जिला विद्यालय निरीक्षक का इन्हें संरक्षण मिला हुआ है। यह इन्हीं के परामर्श से उल्टी सीधी जाँच रिपोर्ट बनाते हैं।इन्हें अपनी स्थिति, पद की मर्यादा ही नही मालूम। यह तो केवल अधिकारी या जिसके विरुद्ध जाँच हो उसके मनमाफिक रिपोर्ट बनाते हैं। यह ऐसा क्यों करते हैं यह तो यही जाने या फिर ऊपरवाला।
   💐महत्त्वपूर्ण पदों के गैरजिम्मेदार अधिकारी ।💐
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        इस पटकथा के कुछ ऐसे महत्वपूर्ण पदों पर जमें या विराजमान अधिकारी भी हैं जो निकृष्ट कोटि का कार्य कर अपने को बहुत बड़ा योग्यताधारी होने का ढ़ोग कर विभाग को गुमराह करने का काम बड़ी ही अकुशलता से करते हैं। इन्हीं के कारण कभी कभी विभाग कोबहुत क्षति उठाना पड़ता है।मेरे पाठकगण मेरा संकेत समझ गये होंगे और वह अधिकारीगण भी समझ गये होंगें जिनके सम्बन्ध मे मुझे लिखना पड़ा है।
       🎂।।   पटकथा का शेषांश  ।।🎂
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काफी समय बीत जाने पर जब शिकायतकर्ता को कोई विभागीय कार्यवाही होती नजर नही आई तब दिनाँक 04/07/2016 को जन सूचना अधिकार के माध्यम से जानकारी माँगी गयी कि जाँच कार्यवाही किस स्तर पर है, तब दिनाँक 30 /07/ 16 को अपर सचिव महोदय ने जिला विद्यालय निरीक्षक रायबरेली को जाँच का आदेश दिया साथ ही निर्देशित किया कि शिकायतकर्ता को भी सूचित किया जाय।तब जाकर निरीक्षक महोदय ने प्रधानाचार्य राजकीय इण्टर कालेज हलोर रायबरेली को जाँच अधिकारी बनाया।श्री बृजेश कुमार  ( जाँच अधिकारी ) ने उपयुक्त समय पर जाँच करना उचित नही समझा। पुनः निरीक्षक महोदय के अनुस्मारक दिये जाने पर जाँच हेतु शिकायतकर्ता को सूचना देकर दि0  21 /09 /16 को विद्यालय आये और जो भी जाँच की उसका शिकायत्कर्ता ने वीड़ियो बना लिया। जाँच मे शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत सही साबित कर दिया। अब विद्यालय की प्रधानाचार्या तथा इसके सहायक लोगों ने षडयंत्र कर जाँच आख्या को दूषित कर दिया। विद्यालय की प्रधानाचार्य ने अपनी जाँच आख्या मे लिखा कि शिकायत्कर्ता ने जनसूचना मे जाँच कराई है ।इस कारण से  तथा विद्यालय के अनुदान न मिलने तथा विद्यालय के प्राइवेट होने के कारण कोई सूचना नही दी जा सकती है, जबकि न तो जन सूचना मे शिकायत ही की गई और न ही जन सूचना मे जाँच ही कराई गयी थी।अब जाँच अधिकारी ने सारे प्रकरण से अवगत होते हुए भी विद्यालय की आख्या को सही मानकर प्रधानाचार्य आदि का बचाव करते हुए उनके पक्ष मे ही रिपोर्ट तैयार कर निरीक्षक को अपनी झूठी रिपोर्ट बनाकर दे दी।
           निरीक्षक कार्यालय ने भी उसी झूँठी रिपोर्ट पर अपनी आख्या सचिव क्षेत्रीय कार्यालय भेजने के बजाय सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद को भेज दी। अर्थात् विद्यालय की झूँठ तथ्यों पर जाँच अधिकारी ने गलत रिपोर्ट बनाई और निरीक्षक ने जिसको भेजना था के बजाय दूसरे अधिकारी के पास भेजी। निरीक्षक कार्यालय ने एक काम और किया उसकी प्रति शिकायत करनेवाले को भेजा ही नही।
           शिकायतकर्ता को जब जाँच की प्रति नही मिली तब उसने दिनाँक 25 /11 /16 को निरीक्षक कार्यालय से इसकी माँग की ,तो निरीक्षण कार्यालय से इस प्रार्थना को शिकायत मानकर जांच प्रति उपलब्ध कराई गयी। जाँच प्रति उपलब्ध होने पर शिकायत्कर्ता को सारे तथ्यों की जानकारी हुई।
जाँच मे की गई अनियमितताओं के बिन्दु --अब आप
******************************** उन बिन्दुओं को भी जान लीजिये ताकि हर बात ठीक से समझ जाँय।
    1--जाँच अधिकारी आदेश मिलने के बाद भी जाँच मे नही आये।  जानबूझकर लापरवाही की गई।
    2-- जाँच अधिकारी को जब निरीक्षक ने रिमाइंडर भेजा तो उसे आना ही पड़ा।
   3-- जाँच अधिकारी को जाँच के समय शिकायतकर्ता ने सारे प्रमाण दिये और सिद्ध कर दिया कि विद्यालय ने फर्जी लड़को को परीक्षा दिलाई और उनके दो वर्षों के विद्यालय की फीस का गवन/ अपहरण किया।
     4--विद्यालय की प्रधानाचार्या के कपोल कल्पित जन सूचना के आधार पर दी गयी झूँठी जाँच आख्या को सच माना गया।
   5--जाँच अधिकारी ने सच जानते हुए भी झूँठी जाँच आख्या बनाई।और अधिकारियों को प्रेषित किया।
     6--निरीक्षक कार्यालय ने झूँठी जाँच आख्या को ही सचिव क्षेत्रीय कार्यालय भेजने के स्थान पर सचिव मा0 शि0 परिषद को भेजा ताकि मामला सुलझने के बजाय उलझ जाय।
    7-- मामले को उलझाया जा रहा है, यह बात शिकायतकर्ता जान न पाये इसलिए उसे स्पष्ट आदेश के बाद भी जाँच प्रति उपलब्ध नही कराई गई।
     8--शिकायतकर्ता के दिनाँक 25/11/16 के प्रार्थना पत्र को शिकायती पत्र माना गया। और इसे आधार मानकर अपनी कमी को छिपाने के उद्देश्य से प्रार्थी को जाँच आख्या भेज दी गई।
       अन्त मे देखना महत्वपूर्ण यह होगा कि अपर सचिव कार्यालय कौनसी अग्रिम कार्यवाही करता है।
        प्रणाम , नमस्कार।
         

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