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Showing posts from 2018

ग्रामसभा सेहगौ के वीरों की शौर्य गाथा

जंगे आजादी का बिगुल बज चुका था।देश पर मर मिटने,कुछ कर गुजरने के लिए देश के दीवानों, मतवालों की टोलियां अंग्रेजों को मारनें,मरने की भावना उनके दिलों में हिलोरें मार रही थी।वह मचल रहे थे,बेताब थे।रायबरेली जिला की सबसे बड़ी ग्राम सभा"सेहगों"के क्रांतिकारी कहाँ चुप बैठने वाले थे।राजे,रजवाड़े, तालुकेदारों को अंग्रेजों का समर्थन संरक्षण प्राप्त था।सन् 1921ई०में राम औतार, शालिकराम नें सेहगों के तालुकेदार श्री द्वारिका प्रसाद के खिलाफ लड़ाई छेड़ दी।राम औतार की माँ जिन्हें "कलक्टराइन"कहा जाता था।दूध की सौगंध देकर राम औतार से कहा--जाओ और सिपाहियों को मार कर ही आना।राम औतार अपने साथी सालिकराम के साथ लाठी लेकर सिपाहियों से भिड़ गये।और सिपाही गोलियां चला रहे थे।प्राणों की परवाह न करते हुए दो गारदों को मार गिराया और दो को मरणासन्न कर दिया।15 दिनों तक तालुकदार का फाटक नहीं खुला।"कलक्टराइन"नें पुनःदूध की सौगंध देकर कहा अदालत में झूठ नहीं बोलना।दोनों शेरों नें हंसते-हंसते फांसी के फन्दे को चूमा और अमर शहीद बनकर शहीदों की माला में दो मनके और बढ़ा दिया। विगत15-20सालों से आपके अस…

सुरक्षित मातृत्व योजना

प्रधान मंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना केन्द्र सरकार की यह बहुत ही अच्छी लोकप्रिय और प्रसूता में जागरूकता लाने वाली योजना है।इसकी जितनी भी प्रशंसा की जाय कम है।गर्भवती महिलाओं के लिए यह किसी बरदान से कम नहीं है।इसी क्रम में 108,102 नं.की एम्बुलेंस सेवाएं भी प्रशंसा के पात्र हैं।"आशा बहुओं के योगदान और मेहनत भी सराहनीय है।इन आशा बहुओं नें सरकारीअस्पताल में प्रसव हेतु प्रेरित करने में काफी सफलता अर्जित की है।इस योजना में पोषण के लिए प्राप्त होनें वाले धन के कारण गरीबों में जागरूकता भी आई है लोगों के रुझान की टी.आर.पी.बढ़ी है।इसके लिए मैं प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली इस योजना की भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूँ।गरीब जनता की गर्भवती महिलाओं के लिए यह योजना किसी बरदान से कम नहीं है।आशा से लेकर, एम्बुलेंस सेवा,अस्पताल टीम सब पूरी यूनिट प्रशंसा की पात्र हैं।आशा बहुओं के लाख प्रयास के बाद भी अभी कुछ,जाहिल,जट्ट, जिद्ददी,गंवार लोगों में एक जिद होती है कि गर्भस्थ शिशु को आज भी  घर की डेहरी पर ही प्रसव करवाने को ही शुभ मानते हैं।अस्पताल में जच्चा-दोनों सुरक्षित और चिकित्सक की देखरेख में रहत…

कारण और जवाब (लूट सेहगौ लूट )

'' क्यों '' का जवाब
आप ने लूट लो लूट योजना के अंतर्गत लोगों से वादा किया कि तुम उनका ₹1000 का कैशबैक मार्च-अप्रैल मई और जून के महीने में वापस करोगे |
बाद में यह पोस्ट डाली गई थी कि ''मैं इस समय 60 लाख sehgo hart + .......+......+....;; आदि आदि '' चीजों में उलझा हुआ हूं | इसलिए लोग मुझे जुलाई तक का समय दें |
आप चाहे जिन कामों में व्यस्त रहें , आपको कोई भी दिक्कत हो , कैशबैक चाहने वालों को इससे कोई मतलब नहीं होगा | उन्हें तो केवल सही समय पर अपना कैशबैक चाहिये | ऐसी आम सोंच होती है | मैंने सोंचा कि इससे आपकी योजना को नुकसान हो सकता है | इसीलिए मैंने लिखा था '' असफलता की ओर पहला कदम ''मैंने सोंचा था कि तुम मेरी बात को समझोगे | परं शुरू हो गई तुम्हारी ललतरानी और हवाहवाई डींगे मारने वाली पोस्टें | Facebook पर आप की पोस्ट आई '' असफलता की ओर तो मैंने बहुत पहले कदम उठाया था | काश कि लोग मुझे समझ नहीं पाए |
'' मेरी नेक सलाह पर ऐसी पोस्ट '' मुझे अत्यंत निराशा हुई और मैं पूरी रात सोचता रहा कि किसी ने सच ही कहा है कि '' …

जवाब

वेबसाइट आप की है भले ही मैंने सब कुछ सिखाया है मैने खुद ही उस पेड़ को सींचा है जिसमे काटे है ,खैर गलती इंसान से ही होती है , अगली बार ऐसे लोगो से बच कर रहूंगा इससे ये सबसे बड़ी सीख मिली है , खैर आप वेबसाइट पर कुछ भी लिख सकते है सबसे बड़ाई की उम्मीद भी नही की जा सकती है और हर कोई सपोर्ट करे ये भी संभव नही ! अब आते है लूट सहगो लूट ऑफर के तथ्योँ पर तो मैने कैश बैक करने का कोई टाइम कभी नही दिया आप हमारी नियम व शर्तों को पुनः पढ़ सकते है ।कैश बैक कंपनी अपने आधार पर करेगी । अब रही बात मेरे और सिर के बीच की खिचड़ी की तो बड़ी रण नीतियां कुछ खास लोगो के साथ ही बनती है ,और वैसे भी भूपेंद्र सर,सुमेर सर ने इस कंपनी में अपना रुपया,टाइम और भरोषा लगाया है तो जाहिर सी बात है खिचड़ी तो पगेगी ही ।और आप भी समझते है कि मार्ट 1-2 लाख में नही बनेगा तो जाहिर ही बात है कि कोई मेरा भी सुबह चिंतक होगा जो यह रुपया इन्वेस्ट कर रहा होगा ।हा मए हवाइयां छोड़ता हु पर क्यों ??क्योकि मए उन्हें सच कर दिखाने की छमता रखता हूं , फ़िल्म मेकिंग ,यूट्यूब , कैश बैक , जीएसएस , सहगो मार्ट कभी हवाई ही थे पर अब नही और उसी प्रकार दुनिया क…

सर्वोच्च न्यायालय

भारतीय संविधान में सुप्रीम कोर्ट को सर्वोच्च माना गया है।सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को मानने के लिए केन्द्र सरकार विवश है।सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन को हर हाल में केन्द्र को लागू करना ही होता है।उसी संविधान नें दो तिहाई बहुमत से केन्द्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को पलटने का अधिकार भी दे रखा है।फिर काहे की सुप्रीम कोर्ट सर्वोच्च?विद्वान न्यायाधीशों नें SC/ ST act में बिना जांच गिरफ्तारी पर रोंक लगा दी थी।जो एक उचित फैसला ही था।आखिर विद्वान न्यायाधीशों नें गुण-दोष के आधार पर ही तो अपना निर्णय दिया होगा।फिर कल संसद सदस्यों नें इस फैसले को पलट कर किस विद्वता का परिचय दिया है।केवल वोट बैंक के लिए संसद के विशेषाधिकार का प्रयोग कहां तक उचित है?अब उससे भी कड़े कानून बनाकर नौंवीं सूची में भी डालने की तैयारी चल रही है।जिसका मतलब होता है कि कोई भी सरकार इस कानून को बदल नहीं सकती है।आरक्षण केवल दस साल तक का मिला था।अब 70साल बाद भी वहीं व्यवस्था कायम है।इसके जरिए केवल ब्लैक मेलिंग को ही बढ़वा मिलेगा।जब देश में समान नागरिक संहिता कायम है तो जाति,धर्म के नाम पर अलग-अलग कानून क्यों हैं?इसी तरह…

गोवंशीय पशु

उ०प्र० के मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ"योगीजी"ने गोहत्या बन्द कराने के उद्देश्य से गोवंशीय पशुओं का बध रोक कर निश्चय ही सराहनीय, प्रशंसनीय फैसला लिया है।गोवंशीय पशुओं के बध पर निश्चय ही पूर्ण विराम लग चुका है।लेकिन हम आपनें अपने पालतू पशुओं को अवारा छोंड़कर एक बहुत बड़ी समस्या खड़ी कर दी है।किसानों के लिए वास्तव में इन आवारा सांड़ो,गायों नें खासी मुसीबत में डाल दिया है।यह किसानों की फसल चर कर बर्बाद कर रहे हैं।एक तरफ मोदीजी कहते हैं किसानों की आय दोगुनी करनी है।दूसरी तरफ यह सांड़ फसल चर कर आधी कर रहे हैं।लोग इन्हें मोदी,योगी के सांड़ की संज्ञा से अलंकृत कर रहे हैं।यातायात व्यवस्था भी इन सांड़ों की वजह से चरमरा कर रह गयी है।रोज मार्ग दुर्घटना में गोवंशीय पशु मर ,कट रहे हैं और लोगों को चोटिल कर रहे हैं।मेरी प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली की निजी राय है कि उरुग्वे देश  की तरह पालतू पशुओं को माइक्रो चिप लगवाने का प्रबंध करनें की कृपा करें।जिससे हम आप अपने पालतू पशुओं को आवारा छोंड़ें तो पता लग सके कि पालतू पशु किसका है।और दंडित किया जा सके।फालतू पशुओं को सरकारी सम्पत्ति घोषित कर …

देशभक्ति की भावना

वैसे तो हर भारतवासी में देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी है।लाखों क्रान्तिकारियों नें अपने प्राणों की आहुति देकर आजादी हासिल की है।हर भारतवासियों में देशप्रेम होना ही चाहिए।और है भी।15 अगस्त आने वाला है।देश पर प्राण न्यौछावर करने वाले हर जाने-अनजाने बलिदानियों को शत-शत नमन।आजादी यूँ ही नहीं मिल जाया करती है।इसके लिए देश पर मर मिटने की जरूरत होती है।हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमने वाले लाखों लोगों नें अपने प्राणों की बाजी लगा दी थी तब कहीं आजादी नसीब हुई थी।आजकल प्यार, मोहब्बत, गुण्डागर्दी की फिल्में तो ज्यादा बन रही हैं लेकिन देशभक्ति की फिल्मों,साहित्य का अकाल सा पड़ गया है।देशभक्ति के ऊपर जितनी भी फिल्में आज तक बनी हैं सुपर-डुपर हिट हुई हैं।फिर भी निर्माता निर्देशक पता नहीं क्यों ऐसी पटकथाएं नहीं लिख रहें हैं न ही ऐसी फिल्मों का निर्माण ही कर रहे हैं।देश के सच्चे सपूत जैसी किताबें भी पाठ्यक्रम से हटा दी गई हैं।जबकि ऐसी किताबों से छात्र-छात्राओं में देशभक्ति की भावना का जबरदस्त विकास होता है।लोगों में देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरे जानें की जरूरत है।क्रांतिकारियों, देश पर मर मिटन…

बलात्कार की बढ़ती घटनाएं।

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।हम भारतीयों में भूलने की बहुत बुरी बीमारी है।बड़ी से बड़ी घटनाओं को भी हम कुछ दिन बाद भूल ही जाते हैं।हमारा जोश दूध के उबाल की तरह बहुत जल्दी आ भी जाता है और साबुन के झाग की तरह बहुत जल्दी बैठ भी जाता है।निर्भया बलात्कार के समय सारे देश में एक उबाल सा आ गया था।हर कोई आक्रोशित सा नजर आ रहा था।अभी कुछ साल ही बीते हैं और हम उस कांड को लगभग भूल से गये हैं।उस घटना के बाद सरकार भी चेती थी।कड़े से कड़े कानून बनाए गये परन्तू बलात्कार की घटनाओं में मामूली सी भी कमी नहीं आई है।आपरेशन शोहदा, एन्टी रोमियो दल बने कुछ दिन शोहदे भयभीत भी हुए।लेकिन फिर सब ठांय-ठांय फिस्स हो गया।हम फिर पुराने रास्ते पर चल निकले।बिहार के मुजफ्फरपुर और यू.पी.के देवरिया में बालिका संरक्षण गृह से नाबालिग लड़कियों को वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेलने के समाचार भी मिले हैं।डी.एम.को इधर से उधर और कुछ अधिकारियों के निलम्बन की कार्यवाही भी की गयी।कुछ दिन बाद इन घटनाओं को भी हम भूल जायेंगे।पुराने जमाने में समाज ज्यादा टाइट था।हुक्का-पानी बन्द अर्थात सामाजिक बहिष्कार के डर से इक्का-दुक्का ही इस तरह की घटन…

जिलाधिकारी ने वेश बदलकर किया निरीक्षण

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।आज दि०6-8-2018 के समाचार पत्रों में गोण्डा के डी.एम.श्री कैप्टन प्रभांशु श्रीवास्तव जी द्वारा सी.एच.सी.काजीदेवर का भेष बदलकर निरीक्षण किया गया।नर्स नें डी.एम.साहब को टरकाया सम्बंधित खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई।इससे आम जनता को होनेवाली परेशानियों का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।इसी तरह यदि सभी महकमों के अधिकारी गण यदि ए.सी.रूम और सरकार द्वारा प्रदत्त सभी सुख सुविधाओं को त्याग कर अपने-अपने विभागों के मातहत कार्यालयों का भेष बदल कर निरीक्षण करना शुरू कर दें तो कर्मचारियों में भय व्याप्त हो जायेगा और आम जनता का काम बिना कोई सुविधा शुल्क दिए आसानी से होने लगेगा और भृष्टाचार पर प्रभावी नियन्त्रण पाया जा सकता है।और कानून का सुशासन लागू हो जाएगा।पुराने जमाने में राजा-महाराजा और उनके गुप्तचर भी इसी तरह भेष बदल कर जनता का दुःख-दर्द जाना करते थे।और कर्मचारियों, अधिकारियों में भय व्याप्त रहता था।जरूरत केवल भेष बदल कर आला अधिकारियों के इसी तरह निरीक्षण करने की है।अगर सभी आला अधिकारियों द्वारा इसी तरह रेगुलर निरीक्षण किया जाने लगे तो रामराज्य की परिकल्पना को साका…

भृष्टाचार

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।भृष्टाचार हर भारतीयों के हांड़-मांस,रोम-रोम में रच-बस सा गया है।ईमानदार वहीं है जिसे बेईमानी का मौका नहीं मिला है।ऐसा भी नहीं है कि सौ प्रतिशत अधिकारी-कर्मचारी बेईमान ही हैं।अभी भी ईमानदारी के उदाहरण देखने को मिल ही जाते हैं।लेकिन सिस्टम में बेईमानों की संख्या अधिक होनें के कारण ईमानदार अधिकारियों, कर्मचारियों को अधिक परेशानी, कष्टों का सामना करना पड़ता है।या तो सारे बेईमान एक होकर ईमानदारों को हटा देते हैं या फिर मंजूनाथ की तरह उनकी हत्या करवा दी जाती है।ईमानदारों को उनकी ईमानदारी की कीमत या तो सस्पेंड होकर या जान देकर चुकानी पड़ती है।उन्हें सारे बेईमान एक होकर किसी न किसी तरह कुचक्र या झूठा षड्यंत्र रचकर फंसा देते हैं।"रिश्वत पकड़ी जाय छूट जाय रिश्वत देकर।"जनता भी कम दोषी नहीं है।जब तक किसी काम को करवाने के लिए किसी को रिश्वत नहीं देते हैं,काम होने की गारंटी ही नहीं मानते हैं।कभी बूढ़े बुजुर्ग अपने गांव के सरकारी कर्मचारियों को शिक्षा दिया करते थे कि बेटा किसी से घूस मत लेना।ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभाने की शिक्षा दिया करते थे।आज अपने गांव के सरक…