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[ 11 ] इलाज

इलाज
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इलाज ; कुष्ठ रोग जानकारी और बचाव

यह एक घृणित रोग है | इस रोग में आदमी के शरीर के अंगों का गलना शुरू हो जाता है | इस रोग से प्रभावित अंगों से दुर्गंधयुक्त मवाद निकलने लगती है , धीरे-धीरे रोगी के यह अंग गल गल कर बहने लगते हैं | रोग की चरमावस्था पर धीरे-धीरे के अंग शरीर से गायब या समाप्त हो जाते हैं | जिसके कारण कोई अन्य व्यक्ति उसके पास उठता बैठता या खाता पीता नहीं है | इसके अलावा वह रोगी से किसी प्रकार का संबंध भी नहीं रखना चाहता है | दूसरे शब्दों में अगर कहा जाए तो लोग ऐसे रोगी को घृणा की दृष्टि से देखते हैं | इस रोग का रोगी स्वयं भी अपने आप से घृणा करने लगता है , कभी-कभी तो रोगी रोग से परेशान होकर आत्महत्या करने का विचार भी करने लगता है |

कुष्ठ हर चूर्ण बनाना

कुष्ट के रोगी को चाहिए कि वह अपने रोग से निजात पाने के लिए यह चूर्ण बना ले | इसके लिए रोगी को बकायन नामक वृक्ष के बीज इकट्ठा करना होता है | इन बीजों की मात्रा जब 2 किलो ग्राम के लगभग हो जाए , तब इनकी साफ-सफाई कर ले , ताकि उन पर लगी धूल मिट्टी आदि निकल जाए | अब इन बीजों की आधी मात्रा यानी 1 किलो बीज , लगभग 12 से 13 किलोग्राम पानी में भिगो दे | इन बीजों को 7 दिन तक लगातार पानी मे भिगोने के बाद उस पानी मे ही खूब मल छान कर बीजों को फेंक दे , और पानी को सुरक्षित कर ले | शेष बचे 1 किलोग्राम बीजों को कूट-पीसकर कपड़छन चूर्ण बना ले |

सेवन विधि

इस चूर्ण की 10 ग्राम मात्रा प्रातः काल नित्य क्रियाओं से निबटने के बाद बिना कुछ खाये पिए , अपने मुँह मे भर ले | इसके बाद ऊपर से बीजों का बनाया हुआ पानी 50 ग्राम की मात्रा में भी पीते हुए चूर्ण को उदरस्थ कर ले | इस चूर्ण का 20 से 22 दिन लगातार प्रयोग करने के बाद रोगी के अंगो का गलना बंद हो जाएगा , तथा रोग भी समूल नष्ट होता जायेगा | देखने में तो यह एक सरल उपाय दिखाई पड़ता है , परंतु अपने प्रभाव से यह रोग को समूल नष्ट करने की ताकत रखता है |

रोगी का भोजन

औषधि के सेवनकाल में रोगी को चाहिए कि बहुत ही सादा भोजन ही करे | भोजन में चने के बेसन से बनी रोटियां , तथा देसी गाय का घी ही प्रयोग करे | बाजारों में बिकने वाले वेजिटेबल घी का प्रयोग सर्वथा वर्जित है | रोगी को नमक का सेवन बिल्कुल ही बंद कर देना चाहिए | उसे लगभग 25 दिनों तक केवल बेसन की रोटी और घी ही खाना चाहिए |

पूरक इलाज

इस रोग का मुख्य इलाज ही रोग को समाप्त करने के लिए काफी है , पन्तु यदि साथ में यह पूरक इलाज भी कर लिया जाए तो रोग को निर्मूल करने मे औषधि आसानी से आसानी से अपना काम कर पाती है |

रोगी को चाहिए कि बाजार से लगभग 50 ग्राम मूली के बीज ले आए , और उन्हें गन्ना के शुद्ध सिरका में पीसकर उसमें थोड़ा सा संख्या मिलकर लेप तैयार कर ले | लेप बनाने का यह काम शाम को करना चाहिए | लेप बनने के 2 घंटे बाद इसमें खमीर उठ जाएगा | अब दागों को किसी कपड़े से मल कर खमीर को दागों पर लगा लिया करें | इसके तुरंत बाद ही सोने का उपक्रम करते हुए सो जाए | इसके निरंतर प्रयोग से रोगी का रोग आराम से समाप्त हो जाता है |

कुष्ठ एक प्रकार का घृणित रोग तो है ही , तथा बुरा रोग भी है , जिससे रोगी का सौंदर्य नष्ट हो जाता है | इसके दाग दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही जाते हैं | इसलिए इस रोग का इलाज अगर प्रारंभिक अवस्था मे ही उपचार कर लिया जाए तो रोग को आसानी से ठीक किया जा सकता है | अपनी चरमावस्था को पहुंचा हुआ रोग बड़ी ही मुश्किल से ठीक हो पाता है , अर्थात भयंकरता की स्थिति मे औषधियों का असर नहीं हो पाता है , या फिर बड़ी देर से होता है | इसलिए रोगी तथा उसके हितैषियों को चाहिए कि वह इस रोग की चिकित्सा , रोग का पता लगते ही तुरंत शुरू कर दे |

जय आयुर्वेद


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इलाज 


अब सन्तानहीनता एक कोरी कल्पना      
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क्या आप संतानहीन हैं ,और सन्तान पाना चाहते हैं
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         तो ऐसे अवश्य पढ़ें 

दोस्तों इस संसार में आया हुआ हर एक प्राणी अपनी संतान की इच्छा करता है | लेकिन ईश्वर की विडंबना देखिए कि वह किसी किसी को इतनी संताने दे देता है कि वह व्यक्ति ईश्वर से कामना करने लगता है कि ,उसे अब संतान की जरूरत नहीं है | लेकिन इस दुनिया में कुछ ऐसे अभागे लोग भी हैं जिनको संतान ही नहीं होती है ऐसे लोग संतान पाने के लिए , मंदिर ,मस्जिद और गुरुद्वारा आदि मे जाकर अपनी संतानोतपत्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं , तथा साधु-संन्यासियों और पीर फकीरों के चक्कर तक लगाने लगाते हैं , ताकि उन्हें किसी प्रकार से संतान की प्राप्ति हो सके | क्या उनके इन प्रयासों से उन्हें इसमें सफलता मिल पाती हैं, शायद नहीं |

जब उनके इस अथक और अनवरत किये प्रयासों में उन्हें सफलता नही मिल पाती है | ऐसे मे जब लोग बहुत दिनों तक माता पिता नहीं बन पाते हैं

तब उन संतानहीन लोगों की सोच कुछ इस प्रकार की बन जाती है
वह सोचते हैं कि
[ १ ] शायद संतान का सुख उनके भाग में नहीं लिखा है बहुत से लोगों को ईश्वर नहीं संता ने प्रदान की हैं परंतु शायद हमें सारी उम्र ऐसे ही गुजारना पड़ेगा |
[ 2 ] हमारे द्वारा इसके कई प्रकार के प्रयास तो किए लेकिन सफलता नहीं मिल पाई इसमें मेरा क्या दोष है |
[ 3 ] शायद मुझे इस संसार में ईश्वर ने दूसरों के संतानहीनता के चुभते हुएव्यंग्य बाणों को सुनने के लिए इस संसार में भेजा है |
[ 4 ] मेरे पास सब कुछ तो है क्यों ना मैं कोई बच्चा गोद ले लूं , ताकि मुझे माता-पिता ना बनने की कमी न महसूस हो |
[ 5 ] हो सकता है यह मेरे भाग्य में भी लिखा हो या मेरे पूर्व जन्मों का अभिशाप है जो मुझे इस जन्म में भुगतना पड़ रहा है |
[ 6 ] क्यों न हम भी दूसरों की तरह सरोगेसी से माता -पिता बनने की कोशिश करें , जिससे
हमें भी झूठा ही सही पर , माता -पिता होने का गौरव तो मिल सकेगा |
[ 7 ] ईश्वर हमारे ही प्रति इतना हृदयहीन क्यों है जिसने मुझे निःसन्तान बना रखा है |
निराशा दूर भगाएं , पुनः प्रयास करें
अब
माता - पिता बनना असम्भव
नही

आज के इस वैज्ञानिक युग में संतानहीनों को अब परेशान होने की कोई विशेष आवश्यकता नहीं है | उन्हें चाहिए कि वह एक बार फिर से पुनःप्रयास करें | हो सकता है कि उनके जीवन में संतान सुख लिखा ही हो | इसके लिए आपको कुछ प्रयास करने पड़ सकते हैं | जहां आप कई बार प्रयास करने के बाद भी असफल हो चुके हैं , वहां एक और प्रयास करने में कोई बुराई नहीं है |
🔺🔺 ध्यान दें - सबसे पहले आप दोनों ही लोग किसी सेक्स-स्पेशलिस्ट के पास जाएं , तथा चिकित्सक के परामर्श के अनुसार दोनों ही लोग अपना पूरा चेकअप कराएं | पूरे चेकअप के बाद आप दोनों के संतानहीन होने का कारण भी मिल सकता है | कभी कभी जीवनसंगिनी के लिए गर्भाशय का पूर्ण विकास नहीं हो पाता है , ऐसी स्थिति में वह अपने जीवन भर माँ नहीं बन पाती है | परंतु यदि आप दोनों कोई कमी नहीं है , या कोई छोटी मोटी कमी है भी , तो उसे दूर करने का प्रयास करें | हम यहां कुछ उपाय बता रहे हैं | हो सकता है इनसे आपका भला हो सके | एक बात तो आप ही स्पष्ट रुप से जान लीजिए कि अगर महिला बहन का गर्भाशय पूर्ण विकसित नहीं हुआ है | यह शारीरिक संरचना संबंधी दोष है , जिसका निराकरण नहीं किया जा सकता है | इसलिए उन महिला बहन को अपने जीवन में मां बनने की आस छोड़ देनी चाहिए |

कथन हमारा / प्रयास आपका / सफलता अवश्य मिलेगी
उपचार का प्रथम चरण - [ शरीर का शुद्धिकरण ]

हम आपको जो बताने जा रहे हैं , उसको ध्यान से पढ़कर मन में बिठाले , और यह जान लें कि जननेन्द्रियों से संबन्धित कोई भी इलाज करने से पूर्व , अमाशय का शुद्ध व साफ होना बहुत ही आवश्यक है | रोगी को कब्ज बिलकुल होना ही नहीं चाहिए | अगर यह परेशानियां शरीर में हैं तो सबसे पहले इन्हे ही दूर करने का इंतजाम करें |


उपचार का दूसरा चरण = [ जननेंद्रियों का शुद्धिकरण ]

इसके अलावा यदि महिला को प्रदर या मासिक धर्म की कोई गड़बड़ी है | तो रोगी को चाहिए कि किसी चिकित्सक से सम्पर्क कर इस परेशानी को भी दूर कर ले | अगर आप हमारी इन लेखों को पढ़ते रहे तुम्हारे विषय में आगे भी आपको बताते रहेंगे |

\\\उपचार का तीसरा चरण - [ गर्भाशय का शुद्धिकरण ]

इसके लिए आप किसी दुकानदार से थोड़ी सी फिटकरी ले आए | अब इस फिटकरी को दर-दरा कूट लें | तत्पश्चात चूल्हे पर तवा गर्म करके इस फिटकरी का फूला बना ले | ततपश्चात इस फूला को महीन महीन पीस करके किसी शीशी में सुरक्षित रख लें | अब कोई सूती , सफेद ,और झीना कपड़ा ले | इस कपड़े की कई पोटलिया बना ले | इन पोटलियों में 3 ग्राम फिटकरी का फूला भर दे | अब पोटली का मुंह सुई धागे से सिलकर इसप्रकार बन्द करें कि धागे का छोर लंबा ही रहे | महिला मासिकधर्म की समाप्ति से 3 दिन बाद एक पोटली को अपने प्राइवेट पार्ट के भीतर रखकर , कुछ देर जमीन पर उकडूं बैठी रहे | औषधि के प्रभाव से गर्भाशय की गंदगी बाहर निकलेगी | इस तरह से 1 सप्ताह तक रोज शाम को सुविधानुसार पोटलियाँ प्राइवेट पार्ट पर रखती रहे| इससे गर्भाशय का शुद्धिकरण हो जाएगा |

उपचार का अंतिम चरण


गांव और देहातों में एक वृक्ष होता है जिसे हम बबूल या कीकर कहते हैं | किसी-किसी कीकर के पेड़ मैं चार-पांच गज की दूरी पर एक फ़ोड़ा सा निकल आता है | जिसे जिसे कीकरबंदा कहते हैं , का पता कर घर ले आएं | इसका पता लगाना थोड़ा कठिन जरूर है , लेकिन मिल जाता है | इसको छाया में सुखाकर खूब महीन महीन पीस डालें | अगला मासिक धर्म आने के 3 दिन बाद इस चूर्ण की 3 ग्राम मात्रा , अपने प्राइवेट पार्ट मे रख लिया करे,| ऐसा 3 दिन तक लगातार करती रहे | ऐसा ही आने वाली प्रत्येक माहवारी के 3 दिनों तक 3 खुराकें रखती रहें | प्रभु की कृपा से वह स्त्री अवश्य गर्भ धारण करती है | यह साधु संतों का बताया हुआ अनुपम नुस्खा है जो , कभी बेकार नहीं जाता है | इसको अपनाएं और संतान सुख से वंचित न रहे | जय आयुर्वेद 

इसे आप अपने मित्रों और परिजनों के साथ अवश्य शेयर अवश्य करें , शायद आपका एक प्रयास उनकी पूरी जिंदगी खुशियों से भर सके ||  धन्यवाद || अ 

हमारे आगे आने वाले लेख इन्हे आप अवश्य पढ़ें और लाभ उठाएं
[ 1 ] पुरुषों की गुप्त रोग की समस्याएं व निराकरण |
[ 2 ] वन्ध्या स्त्रियां भी प्रभु की कृपा बन सकती है माँ |
[ 3 ] मासिक धर्म और प्रदर की परेशानियां सरल उपाय | अ
[ 4 ] गर्भ धारण की समस्याओं का आसान निराकरण |
[ 5 ] अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के प्राकृतिक उपाय |
[ ६ ] चाँद जैसा गोरा चिट्टा बेटा कैसे पाएं | |
[ 7 ]आपकी अपनी सन्तान बेटा ही होगा | ऐसा सम्भव है |



इति श्री

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