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[ 13 ] मनोरंजन ; सजा

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सजा

एक प्रतीकात्मक क्षेपक जो आपकी सोंच बदल देगा

⧭किसी स्थान पर एक बहुत ही प्रसिद्ध महात्मा रहा करते थे |उनकी ख्याति उस क्षेत्र के आसपास फैली हुई थी |ज्ञानी , धार्मिक और विद्वान होने के कारण , उस क्षेत्र के कई जिज्ञासु पुरुष , उनके शिष्य बन गए | उनके शिष्यों में एक शिष्य ने , अपने गुरु के आशीर्वाद से , जब सभी प्रकार की शिक्षाएं प्राप्त कर ली , तो गुरु की आज्ञा प्राप्त कर , वह जन कल्याण के लिए बाहर भ्रमण की सोचने लगे | गुरुजी ने उनके मन में छिपी परोपकार की भावना को जानकर , उन्हें अपने आश्रम से सहर्ष , आशीर्वाद देते हुए खुशी खुशी अन्यत्र भ्रमण करने की इजाजत दे दी | गुरु की आज्ञा पाकर महात्मा जी देशाटन को निकल पड़े | एक जगह पर मनोरम स्थान देखकर , उन्होंने एक कुटिया बना ली | महात्मा जी ज्ञानी पुरुष तो थे ही इसलिए उनकी भी प्रशंसा चारों को फैल गई |

⧭महात्मा जी की कुटिया के पास के एक गांव में एक वृद्ध महिला रहती थी | एक समय उसका बेटा बहुत बीमार पड़ गया | उस बुढ़िया ने अपने बेटे की हर संभव चिकित्सा की , परंतु उसे कोई लाभ नहीं मिला | तब गांव वालों ने उस महिला को सलाह दी , कि पास के गाँव की कुटिया में रहने वाले महात्मा जी बहुत ही पहुंचे हुए महान पुरुष है | अगर वह उनके पास जाए तो हो सकता है कि , उसके बच्चे की जान बच जाए |

⧭बेचारी बेबस और लाचार महिला महात्मा जी के पास जाकर , अपने बेटे के कल्याण के लिए उनसे कामना करने लगी | महिला के बार बार विनती करने पर , महात्मा जी को दया आ गई | उन्होंने अपना अधोवस्त्र ढीला किया और वहां से एक '' बाल '' उखाड़ कर उस महिला को देते हुए कहा , कि इसका ताबीज बनाकर , वह बच्चे के गले में बांध दें तो , बच्चा ठीक हो जाएगा | साथ ही महिला को शपथ भी दिलवा दी कि , वह यह बात किसी से न बताएं | महात्मा जी ने उस महिला से यह भी कहा , कि जब भी किसी को कोई रोग हो जाए तो वह भी इस ताबीज़ के बांधने से ठीक हो जाएगा , परन्तु वह यह बात किसी और को नही बतायेग़ी |

⧭महिला खुशी-खुशी उस '' बाल'' को महात्मा जी का प्रसाद मानकर , घर ले आई | अब महिला ने उस '' बाल '' को ताबीज में डालकर बच्चे को बांध दिया | असाध्य बीमारी से पीड़ित उस महिला का बच्चा ,एक ही दिन में ठीक हो गया |

⧭उस महिला के बच्चे के असाध्य रोग को चमत्कारिक ढंग से ठीक हो जाने पर , गांव के लोगों ने उस महिला से बच्चे के ठीक होने का उपाय जानने का प्रयास करने लगे | काफी समय तक महिला ने किसी को कुछ नहीं बताया | परंतु लोगों के बार-बार प्रार्थना और याचना करने पर उसे दया आ गई , और उसने गांव वालों को सारा भेद बता दिया | अब तो गांव के लोगों मे यह बात जंगल की आग की तरह फैल गई | धीरे-धीरे गांव के कुछ लोगों ने आपस मे सलाहकार महात्मा जी के अधोवस्त्र के नीचे का '' चमत्कारिक बाल'' पाने की तरकीबें सोचने लगे |

⧭दूसरे दिन गांव के कई लोग महात्माजी की कुटिया पर पहुंचे , और उनसे नीचे का '' बाल'' पाने की प्रार्थना करने लगे | महात्मा जी के नानुकर करने पर कुछ लोगों ने महात्मा जी को पकड़ लिया , और उनके एक-एक कर सभी '' बाल '' उखाड़ ले गए | उन बालों को उन्होंने गांव वालों को भी बांट दिया , ताकि यदि किसी पर कोई परेशानी आए तो , वह उसे दूर कर सके | अब तो महात्मा जी बहुत परेशान हो गए तथा अपना सिर पीटने लगे , लेकिन उनकी परेशानियों का अंत यहीं पर नहीं हुआ |

⧭बाबा के बाल उखाड़ने की बात , जब दूसरे गांव के लोगों को पता चली , तब एक दिन वह लोग भी अपने साथ नाई को लेकर महात्माजी की कुटिया में गए , और बाबा के शरीर के '' सारे बाल '' नाई से बनवा कर अपने पास ले गए | उन्होंने सोचा कि अगर महात्मा जी के अन्दरूनी एक बाल में इतनी अद्भुत और चमत्कारिक शक्ति है तो , शरीर के कई बार मिलकर उतनी शक्ति जरूर प्राप्त कर लेंगे | अब महात्मा जी के सारे शरीर का मुंडन हो चुका था | महात्माजी बहुत परेशान हो गए , और उसी रात अपनी कुटिया छोड़कर , अपने गुरु जी के पास पहुंच गए |

⧭अपने एक शिष्य की यह दशा देखकर गुरु जी को बहुत ही दुख हुआ | महात्मा जी ने गुरु जी से कहा कि , गुरु जी मै तो आसपास के गांव के सभी लोगों का कल्याण कर रहा था | फिर मेरी यह दुर्दशा क्यों हो गई ? आप तो ज्ञानी हैं , आप मुझे इसका कारण बताएं |

⧭ इस पर गुरूजी ने महात्मा जी को बताया कि हे ! मेरे प्रिय शिष्य , यह संसार ऐसा ही है , यहां पर यदि आप किसी का भला करना चाहेंगे , और करेंगे भी | तब भी यह संसार इतना एहसानफरामोश , इतना स्वार्थी है कि , वक्त आने पर वह आपके अहसानों को भूलकर , अपने छोटे से लाभ के लिए, आपका अहित करने से नहीं चूकेगा |

⧭इस सबके बावजूद कुछ इसमें गलती तुम्हारी भी है | तुम्हें चाहिए था कि किसी का हित शरीर के किसी अंशदान के बजाय ,किसी अन्य प्रकार जैसे थोड़ी सी भस्म , या मिट्टी अथवा कुछ और देकर भी कर सकते थे | इस शरीर के अंशदान की भी एक सीमा है | इसके बाद क्या बचता है , अर्थात कुछ भी नहीं | इसलिए तुम्हें अपनी गलती या फिर अपनी भूल की सजा मिली है |

⧭अच्छा तो यही है कि अब तुम अपना पिछला सब कुछ भूल कर , पुनः अपने परोपकार कर्म मे लिप्त हो जाओ | ईश्वर तुम्हारा कल्याण करेगा |

⧭आपकी समझ मे कुछ आया ? अगर नही समझ आया तो , नासमझ न बनें , कुछ समझने की कोशिश कीजिये , कुछ तो ग्रहण कीजिये |

धन्यवाद

इति श्री

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सीख

बहुत ही शैतान लड़का था वह | दिनभर आवारा लड़कों के साथ इधर-उधर घूमना , बेकार की गप्पे लड़ाना तथा दूसरों को परेशान करना उसका शगल बन चुका था | उससे सारा ही मोहल्ला , यहां तक कि उसके मां-बाप भी लड़के की शैतानियों को लेकर बहुत परेशान रहा करते थे | लड़के के मां बाप उसे समझा-बुझाकर तथा थक-हारकर उससे आजिज आ चुके थे , परंतु उसकी शैतानियां थी , कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी

एक दिन की बात है , लड़के के मां बाप किसी वैवाहिक समारोह में जाने के लिए तैयार हो रहे थे | उसी समय कहीं से शैतानी करके , अस्त-व्यस्त अवस्था में उनका लड़का , घर में नमूदार हुआ | अपने माता पिता को वैवाहिक समारोह में जाने की तैयारी करते देख , वह भी उनके साथ जाने की जिद करने लगा , लेकिन मां-बाप ने उसे अपने साथ ले जाने से साफ मना कर दिया |

अब लड़का समझ गया था कि उसकी शैतानियों के कारण ही उसके मां-बाप उसे अपने साथ ले जाने को तैयार नहीं हैं |फिर भी वह लड़का अपने प्रयास में लगा रहा , और जाने की लगातार जिद करता रहा | तब उसके मां-बाप ने सोचा कि , हमारे जाने के बाद यह लड़का पता नहीं कौन सी शैतानियां करने लगे ,तथा यह सोच कर कि वह अपने लड़के को शैतानियों के कारण , अपने पड़ोसियों के यहां भी तो नहीं डाल सकते | कोई भी पड़ोसी बड़ी मुश्किल से ही उसको अपने पास रोकने के लिए तैयार होता था | अतः लड़के की मिन्नतें और जिद के आगे झुकते हुए , उन्होंने उसके सामने एक प्रस्ताव रखा कि , वह विवाह समारोह में तो जाएगा परंतु किसी से कुछ बोलेगा नहीं | लड़का इस पर तैयार हो गया |

मां बाप आखिर , मां बाप होते ही हैं | वह लड़के को साथ लेकर विवाह समारोह में शामिल होने चले गए | उस विवाह समारोह में सब कुछ व्यवस्थित ढंग से चल रहा था कि , लड़के को शैतानी सूझी | यहां यह कहावत बिल्कुल सटीक सिद्ध होती है कि , सांप चाहे अपनी केंचुली कितनी ही बार बदल ले , परन्तु सांप सांप ही रहता है | यही लड़के ने भी किया |

उस विवाह समारोह मे शामिल, एक शांत , संभ्रांत रिश्तेदार को , जो पूरी तन्मयता से घर के कामों मे हाथ बंटा रहे थे , की ओर देखकर उस लड़के ने दाएं हाथ की मुट्ठी बांधी तथा दूसरे हाथ से पहले वाले हाथ की कुहनी पकड़कर हिलाते हुए , उन सज्जन की ओर कुछ इशारा किया | बच्चे के संकेत को उन्होंने समझा , कि नहीं समझा , यह तो पता नहीं , परंतु उन्होंने इंकार की मुद्रा मे इधर-उधर हिला दिया |

अब बच्चे ने फिर से दाएं हाथ की तर्जनी और मध्यमा के सिरों को जोड़कर , आंख जैसी आकृति बनाई , और उन सज्जन की ओर इशारा किया | शायद उन सज्जन को फिर से कुछ समझ में नहीं आया | उन्होंने पहले की तरह ही फिर से इनकार में सर हिला दिया | अब तो बच्चे की जिज्ञासा और बढ़ गई |

उसने बाएं हाथ की तर्जनी और अंगूठे से गोल गोल आकृति बनाई और दूसरे हाथ की तर्जनी को बार-बार उस गोले में प्रविष्ट कराते हुए , फिर से उन सज्जन की ओर इशारा किया | अब तो उस लड़के द्वारा की जा रही बार-बार की उद्दंडता से उन सज्जन का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया | उन्होंने आव देखा न ताव , तुरंत ही लड़के के पास जाकर उसे पीटना शुरू कर दिया | इससे पूरे समारोह में अफरा तफरी मच गई |

कई समझदार लोगों ने बीच बचाव करके , उन सज्जन को शांत कराया | बहुत पूछने पर उन सज्जन ने बताया कि यह लड़का बार-बार मुझसे भद्दे भद्दे इशारे कर रहा था | जब उन लोगों ने जब लड़के से पूछा कि वह ऐसा क्यों कर रहा था ? तब उस लड़के ने बताया कि मेरे माता पिताजी ने यहां आने से पहले मुझ से वचन ले लिया था , कि मैं किसी से कुछ नहीं बोलूंगा |


बोलने की मनाही होने के कारण मैंने इन सज्जन से पहले तो इशारे में पूछा कि , क्या वह लड़की के पक्ष से इस समारोह मे शामिल है ? तो इन्होंने मुझसे फिर से नहीं का संकेत किया | तब मैंने फिर से उनसे जानना चाहा कि ,क्या वह लड़के के पक्ष से इस समारोह में शामिल है ?इस पर भी उन्होंने '' न '' का ही संकेत दिया | तब मेरी जिज्ञासा और बढ़ गई और मैंने इन सज्जन से जानना चाहा कि , अगर वह लड़के के पक्ष से समारोह में शामिल नहीं हैं , और लड़की के पक्ष से भी समारोह में शामिल नहीं हैं , तब वह बार-बार घर के अंदर और बाहर क्यों आ जा रहे हैं ? इस पर इन्होंने मुझे मारना शुरू कर दिया , जबकि मेरी कोई गलती नहीं है | अब लोगों की समझ में आया कि , इस गलतफहमी का कारण बच्चे को बोलने से मना करना है |


कुछ समझदार लोगों ने बच्चे को भी समझाया कि , तुम्हारी शैतानियों को केवल तुम्हारे घरवाले ही नजरअंदाज कर सकते हैं , परंतु बाहर के लोग इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे | इसलिए तुम जब जब भी किसी के साथ ऐसा व्यवहार करोगे , तब तब तुम्हें ऐसी स्थिति से गुजरना ही पड़ेगा |


पता नहीं इस सीख का उस बच्चे पर क्या प्रभाव पड़ा कि उसने शैतानी करना बिलकुल ही छोड़ दिया | अब वह एक नेक बच्चा बन चुका था | उस बच्चे के इस बदले व्यवहार से उसके घर और मोहल्ले वाले सभी उससे खुश थे | दोस्तों कभी-कभी सजा मिलने से भी बच्चे सुधर जाते हैं |

धन्यवाद

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