Skip to main content

इलाज ; '' निम्न रक्तचाप '' कारण और निवारण

code - 01

web - gsirg.com



इलाज ; '' निम्न रक्तचाप '' कारण और निवारण


चिकित्सा विशेषज्ञों ने सामान्य व्यक्ति का रक्तचाप 120 /80 माना है | जनसाधारण की भाषा में इसे इस प्रकार समझा जा सकता है कि , किसी भी व्यक्ति का अधिकतम रक्तचाप 120 से अधिक नहीं होना चाहिए | इसी प्रकार निम्न रक्तचाप भी 80 के नीचे नहीं होना चाहिए। परंतु जब ऊपरी और निचले रक्तचाप का मान 90 /60 से कम हो जाता है , तब व्यक्ति को निम्न रक्तचाप की शिकायत होती है | इसे इस प्रकार भी समझा जा सकता है कि। ऊपरी स्तर पर 90 से 120 , तथा निचले स्तर पर 7 0 से 80 होना सामान्य रक्तचाप का स्तर होता है | अगर रक्तचाप का मान इससे ऊपर है तो वहां उच्च रक्तचाप तथा हाइपरटेंशन का स्तर माना जाता है |

सावधानी और समझदारी


रक्तचाप के विषय में अब तक हुए परीक्षणों और अनुसंधानों से यह बात सामने आई है कि , कभी कभार तो रक्तचाप का कम हो जाना आम बात है | परंतु यदि लंबे समय तक ब्लड प्रेशर कम रहे , अथवा बार-बार कम होता रहे , तब यह किसी बड़ी परेशानी का प्रतीक होती है , इसीलिए प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह समय समय पर अपने BP की जांच कराता रहे | जांच और परीक्षणों में यदि BP की शिकायत मिले , तो तुरंत वक्त से पहले संभलना ही समझदारी होता है अर्थात अविलम्ब ही चिकित्सा करवाने का प्रयास प्रारम्भ कर देना चाहिए |

रक्तचाप कम होने के कारण


प्रायः ऐसा देखने में आता है कि , लोग सामान्य शारीरिक परिवर्तन के कारणों को नजरअंदाज कर देते हैं , बाद में कभी कभी यह सामान्य कारण ही एक बड़ी समस्या बन जाते हैं , जैसे कि हृदय रोगियों मै निम्न रक्तचाप के लक्षण मिलना आम बात है , परंतु सामान्य अवस्था में जब लोगों द्वारा इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है , तब तो बाद मे यह एक विकट समस्या बन जाता है | इसके अतिरिक्त हार्मोन का असंतुलन तथा शरीर में कुछ तत्वों जैसे - कैल्शियम , सोडियम , पोटेशियम आदि की कमी हो जाना आदि ऐसे कारण हैं | जब ऐसे कारक उपस्थित हो जाते हैं , तब निम्न रक्तचाप की स्थिति बनती है | शरीर की मुद्रा , तनाव का स्तर , अनियमित रूप से एलोपैथिक दवाओं का खानपान , अनियमित भोजन और नींद की कमी आदि , कुछ ऐसे कारण हैं , जिनसे शरीर में पानी की कमी हो जाती है | इसके उपरांत निम्न रक्तचाप की स्थिति भी बन जाती है |

विशेष कारण


शरीर में पोषक तत्वों जैसे - विटामिन बी 1 , बी 2 और आयरन आदि की लंबे समय तक कमी होने पर रोगी मे निम्न रक्तचाप के लक्षण प्रकट होने लगते हैं | गंभीर चोटों के लग जाने से , ज्यादा खून बहने पर अथवा अंदरूनी रक्तश्राव होने पर भी BP अचानक तेजी से कम होने लगता है | मानव शरीर के लिए सोडियम एक जरूरी इलेक्ट्रोलाइट है , जो शरीर की कोशिकाओं के आसपास पानी का लेवल बनाए रखती है | यदि शरीर मे सोडियम की कमी हो जाय तब भी ब्लड प्रेशर की शिकायत हो सकती है | अतः शरीर में पानी की कमी हो जाने पर खाने में नमक की मात्रा बढ़ा देना चाहिए |

साधारण इलाज


निम्न रक्तचाप की शिकायत होने पर आदमी को थोड़ा सा नमक और शक्कर मिलाकर खूब पानी पीना चाहिए | रोगी को चाहिए कि दिन में दो बार चुकंदर के जूस का भी सेवन करें | तुलसी के अर्क का सेवन भी रक्तचाप को ठीक करने में मददगार होता है | नींबू पानी और टमाटर का रस तथा काली मिर्च और नमक का पानी लेते रहने से भी निम्न रक्तचाप की शिकायत ठीक हो जाती है |

इलाज से पूर्व की सावधानियां


आयुर्वेदिक इलाज करने से पूर्व रोगी को अपनी जीवनशैली में बदलाव अवश्य करना चाहिए , जैसे भोजन में तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए | सुबह उठने पर अगर आपको लगे कि निम्न रक्तचाप है तो बिस्तर पर से खड़े होने से पूर्व अपने पैर और एड़ियों को जमीन पर पंप की तरह चलाएं , तथा भारी वजन न उठाएं , थोड़े थोड़े अंतराल पर कुछ खाते रहे , अधिक शारीरिक श्रम न करें | अगर हो सके तो तैराकी और हल्के व्यायाम भी करें |

आयुर्वेदिक इलाज


प्रातः काल बिस्तर से उठने के बाद अपनी नित्यक्रिया करें , फिर टहलने निकल जाए | घर वापस लौट कर , पहले से बनाकर रखी गई आयुर्वेदिक औषधि सर्पगंधा के महीन , कपड़छन चूर्ण की 2 ग्राम मात्रा ताजे पानी के साथ सेवन करें | इसके अलावा रात्रि को जब शयन करने जाएं , तब भी इस औषधि की 2 ग्राम की मात्रा ताजे पानी के साथ सेवन करना शुरू कर दें | इसे कुछ दिनों तक प्रयोग करें , उसके बाद अपना चिकित्सीय परीक्षण अवश्य करा लें | लगभग 15 दिनों के सेवन के उपरांत , आपको निम्न रक्तचाप की परेशानी से पूर्ण लाभ मिल चुका होगा | रक्तचाप के विषय में यह एक बात गांठ बांध कर याद कर ले कि , प्रतिदिन प्रातः काल लगभग 6 या 8 किलोमीटर पैदल चलने वाले को रक्तचाप की शिकायत हो ही नहीं सकती है | इसलिए रक्तचाप के रोगी को चाहिए कि वह '' रोगी होने पर '' तथा '' निरोगी होने पर '' भी इस नियम का पालन अवश्य करे , और अपने आप को रक्तचाप की परेशानी से सदा सदा के लिए दूर रखें |

जय आयुर्वेद


web - gsirg.com

Comments

Popular posts from this blog

[ q/9 ] Tratamentul; O alternativă unică la sterilizare

web - gsirg.com

 Tratamentul; O alternativă unică la sterilizare

 Fiecare creatură din lume care a venit în această lume, el a câștigat definitiv copilarie, adolescenta, maturitate si batranete | Dintre acestea, dacă părăsim copilăria, atunci în fiecare etapă a vieții, fiecare creatură suferă de dorința sexuală. Cu excepția unui om determinat generație apel la alte creaturi, dar omul este o ființă care, în 12 luni ale anului, 365 de zile, 24 de ore, poate cicălitoare sex în orice moment | Cea mai dificilă sarcină a ființelor umane în această lume este să câștige "Cupid". Fiecare bărbat și femeie din această lume este absorbit de toți muncitorii și începe să facă nenorociri teribile în această lume. Se estimează că doar 70% din criminalitatea mondială este legată de acest lucru.


 Libido o tulburare puternică


  Cauza nașterii diferitelor tipuri de infracțiuni este dorința. Femeile și bărbații care suferă de această dorință sexuală nu ezită să facă diferite tipuri de crime în ac…

कबिरा शिक्षा जगत् मा भाँति भाँति के लोग।।भाग दो।।

प्रिय पाठक गणों आपने " कबीरा शिक्षा जगत मां भाँति भाँति के लोग ( भाग-एक ) में पढ़ा कि श्रीमती रामदुलारी तालुकेदारिया इण्टर कालेज सेंहगौ रायबरेली की प्रधानाचार्या, प्रबंधक, लिपिकों आदि के द्वारा किस प्रकार शिक्षा सत्र 2015--16 तथा शिक्षा सत्र2014--15 मे किस प्रकार लगभग उन्यासी छात्रों को फर्जी ढ़ंग से प्रवेश दिलाया गया । बाद मे इन्हीं छात्रों को अगले वर्ष इण्टर कक्षा की परीक्षा दिला दी गई। इसके लिए फर्जी कक्षा 12ब3 बनाई गई। बाकायदा फर्जी छात्रों का उपस्थिति रजिस्टर भी बनाया गया। परन्तु सभी छात्रों से प्रथम तथा द्वितीय वर्ष की कक्षाओं मे निर्धारित विद्यालय फीस लेने के बावजूद भी इसका विद्यालय के रजिस्टर पर इन्दराज नही किया गया। यह अनुमानित फीस लगभग साढ़े चार लाख रुपये के आसपास थी जिसे उपरोक्त अधिकारियों / विद्यालय के शिक्षा माफियाओं द्वारा अपहृत / गवन कर लिया hi गया। यथोचित कार्रवाई हेतु इस सम्पूर्ण विवरण को प्रार्थना पत्र मे लिखकर अपर सचिव के क्षेत्रीय कार्यालय इलाहाबाद को दिनाँक 25 /05 2016 को भेजा गया।
अब हम आपको इसके शर्मनाक पात्रों का परिचय करवा देते हैं।
       😢शर्मनाक…

पुराने बीजो का संरक्षण

नये खाद्यान्न बीजों या शंकर बीजों के आगमन के साथ खाद्यान्नों का उत्पादन अवश्य बढ़ा है।जिसके लिए हमारे कृषि वैज्ञानिक अवश्य ही बधाई के हकदार हैं।आज हम सवा अरब से अधिक लोगों को भरपेट भोजन देनें के अलावा निर्यात भी कर रहे हैं।जिस कारण हमें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिक अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष प्राप्त हो रहा है।लेकिन भारतीय किसानों द्वारा अन्धाधुंध यूरिया और अन्य उर्वरकों तथा कीटनाशकों के प्रयोग के कारण कुछ देशों का बासमती चावल के आर्डर वापस लेना पड़ा है।जिसके कारण हमें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी उठानी पड़ी है।जो अवश्य ही चिन्ता का विषय है।कृषि वैज्ञानिकों द्वारा मृदा जांच द्वारा किसानों को प्रशिक्षित कर आवश्यक रसायनों के प्रयोगों के लिए किसानों को प्रशिक्षित किए जानें की आवश्यकता है।     हमारे पुराने जमाने के किसानों द्वारा पुराने बीजों एवं गोबर की खाद तथा खली से उत्पादित खाद्यान्नों एवं सब्जियों में जो गजब का स्वाद एवं सुगंध मिलती थी वह अब नये बीजों एवं उर्वरकों एवं कीटनाशकों से उत्पादित खाद्यान्नों एवं सब्जियों में नहीं पाई जाती है।वह स्वाद,सोंधापन, सुगंध अब धीरे-धीरे गायब होती …