Skip to main content

[ n/1 ] धर्म ; परब्रह्म ही है सृष्टि के वास्तविक नियंता

web - gsirg.com

धर्म ; परब्रह्म ही है सृष्टि के वास्तविक नियंता

लोगों के अंतर्मन में अनेक जिज्ञासाएं भरी होती है | व्यक्ति के जन्म लेने के बाद ही उसके मन में अनेकों प्रकार के विचार तथा प्रश्न उमड़ने , घुमड़ने लगते हैं | युवा अवस्था आने तक , कुछ प्रश्न तो अपने आप गायब हो जाते हैं , तथा कुछ नई जिज्ञासाओं का जन्म अपने आप होने लगता है | कुछ ऐसी ही जिज्ञासाएं और प्रश्न- नूतन अनुसंधानों तथा नई उपलब्धियों का आधार बन जाते हैं , जैसे प्राणी के जीवन में एक विचार अवश्य पैदा होता है , कि इस संसार का निर्माण कैसे हुआ है , इसकी उत्पत्ति कैसे हुई है तथा इसका अंत कहां है | उपरोक्त जिज्ञासाएं वैज्ञानिकों और दार्शनिकों को समान रूप से उद्वेलित करती रहती हैं |


ब्रह्मांड की उत्पत्ति

यदि विज्ञान की माना जाए तो , अनेकों सिद्धांतों की यात्रा तय करने के बाद जो परिणाम प्राप्त होता है | उसके अनुसार ब्रह्मांड की उत्पत्ति , एक अत्यधिक छोटे अणु से हुई मानी जाती है , जिसकी तुलना हम आज के सबसे छोटे ज्ञात कण प्रोटान से करें , जो स्वयं एक बहुत छोटा कण है , इतना छोटा कि स्याही के एक बिंदु में लगभग 5 खरब प्रोटान समा जाते हैं | इस प्रोटान के भी एक खराबवे हिस्से में जितना भी एक दृश्यमान ब्रह्मांड है , उसे समा दें तो , यह स्थिति सिंगुलैरिटी की बन जाती है | वैज्ञानिकों का मानना है कि , ब्रह्मांड की उत्पत्ति एक ऐसे ही छोटे से अणु से हुई मानी जा सकती है | शायद इसी में ब्रह्मांड समाया हुआ था |

ब्रम्हांड का निर्माण

हम समय को अनेक प्रकार मे एक प्रकार का आयाम [ डायमेंशन ] मान सकते हैं | अगर इस पर पुनः विचार किया जाए तो , ब्रह्मांड का निर्माण होने से पूर्व क्या था , यह कभी नहीं जाना जा सकता | इसी प्रकार इसका अंत कब होगा , यह भी नहीं जाना जा सकता है | इसीलिए ब्रह्मांड को अनंत और अनादि कहा गया है | हमारे ऋषि मुनि और उपनिषदकारों द्वारा प्राप्त यह जानकारी '' यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे '' भी , इसी ओर इशारा करती है | यही सिंगुलरिटी का सिद्धांत भी है | इस सिद्धांत तक पहुंचने के लिए वैज्ञानिकों को वर्षों तक शोध करना पड़ा है | उनके अनुसार इस ब्रम्हाण्ड की उत्पत्ति शून्य से हुई है है | उनका मानना है कि ब्रह्मांड बनने से पूर्व यहां पर कुछ नहीं था , परंतु जैसे ही सृष्टि निर्माण के प्रथम सेकंड के भी अत्यल्प भाग में गुरुत्वाकर्षण तथा अन्य बलों ने जन्म ले लिया | इन्हीं बलों से भौतिक शास्त्र के अनेक सिद्धांत निकल कर आते हैं | वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि जैसे ही ब्रह्मांड बनने का एक मिनट पूर्ण हुआ , उसका विस्तार खरबों मील तक पहुंच चुका था | कुछ दिनों पूर्व हुई गुरुत्वाकर्षण तरंगों की खोजो ने इस सत्यता को प्रगाढ़ता के साथ सिद्ध किया है | जिके कारण को वर्तमान की वैज्ञानिक गणनाएं मान भी चुकी हैं | इनके अनुसार ब्रह्मांड के फैलने की गति 4.3 खराब मील प्रति सेकंड बताई गयी है |

अतिमानवीय चेतना की उपस्थिति

वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्तमान में जितना भी गुरुत्वाकर्षण बल विद्यमान है , यदि उसमें एक अंश मात्र भी बल कम हो जाए तो , मानव जीवन के लिए जिन स्थिर तत्वों की जरूरत होती है , वह कभी भी अस्तित्व में नहीं आ पाते | इसके विपरीत यदि यह मान उतना ही अधिक होता तो ब्रह्मांड एक जरूरत से ज्यादा विस्तृत हुए तंबू की तरह टूट कर सिकुड़ गया होता | परंतु इसका एकदम सही व सम्यक तत्व के साथ होना किसी अज्ञात , अति मानवीय चेतना की उपस्थिति की ओर इशारा करता है | जिसे हम परबृम्ह नाम से जान रहे हैं |

असीमित और अनंत है हमारा ब्रह्मांड

हमारे सामने वर्तमान ब्रह्मांड का जो स्वरूप उपस्थित है , वह अनंत है , और गणितीय दृष्टि से इसका कोई अंत नहीं है | इसका कारण है कि यह स्वयं ही निर्मित हुआ है , और स्वयं ही स्थित भी है | इस ब्रह्मांड को प्रसिद्ध भौतिक शास्त्र सर आइंस्टीन ने एक फैलते हुए बुलबुले के रूप में परिभाषित किया है , तथा इसके विस्तार को अनंत माना है | यही कारण है कि अगर हम एक स्थान से चलना शुरू करें तक खरबों वर्षों की यात्रा के बाद हम पुनः उसी स्थान पर पहुंच जाते हैं | इस से ज्ञात होता है कि हमारा ब्रह्मांड अनंत है | वैज्ञानिकों ने इसकी चौड़ाई को लगभग 93 खरब प्रकाशवर्ष माना है | हमारे उपनिषद कारों ने तो इस तथ्य को बहुत पहले ही जान लिया था , उन्होंने बहुत पहले ही असीमित ब्रह्मांड को अनंत और परब्रह्म के नाम से जाना था |

\\\\ बड़े ही आश्चर्य की बात है कि आज के वैज्ञानिक भी उन्हीं तथ्यों की पुष्टि करते हैं | जिनको हमारे देश के आत्मवेत्ताओं ने बहुत पहले ही जान लिया था , तथा अपने ज्ञान से संपूर्ण विश्व को , इस तथ्य से परिचित भी करा दिया था | अब तो व्यर्थ की बातें पर परस्पर विरोध पैदा करने के बजाए इन पर प्राच्य अनुसंधानों का सहारा लेकर, वर्तमान चिंतकों को मानवता की राह दिखाने का उपाय सोचना चाहिए | हमारे पूर्व के ज्ञानी , विज्ञानी , मुनियों और आत्मवेत्ताओं के जान को ही वैज्ञानिक आज अपने वैज्ञानिक अनुसंधानों के आधार पर सिद्ध कर रहे हैं | इसतरह से तो वह लोग एक प्रकार से व्यर्थ का कार्य कर रहे हैं | जब दोनों ही धाराएं ब्रह्मांड के अस्तित्व की परिकल्पना को समान मान ही रहे हैं , तब दोनों को ही चाहिए कि वे साथ-साथ समरसता से चलने का समन्वय बनाएं , तब ही वैज्ञानिक अध्यात्मवाद की अभिकल्पना सच्चे अर्थों में साकार हो सकेगी , जैसा कि हमारा अध्यात्म मानता भी बहुत प्राचीन पूर्व यह सिद्ध ही कर चुका है कि , समस्त ब्रह्मांड का निर्माण करने वाला परब्रह्म ही है | तब तो वैज्ञानिक अपनी खोजों के आधार पर इसे ही खोजेंगे | अंत मे वह भी इस तथ्य को मान लेंगे कि परबृम्ह ही हैं \ सृष्टि के वास्तविक नियंता |

इति श्री

web - gsirg.com

Comments

Popular posts from this blog

पुराने बीजो का संरक्षण

नये खाद्यान्न बीजों या शंकर बीजों के आगमन के साथ खाद्यान्नों का उत्पादन अवश्य बढ़ा है।जिसके लिए हमारे कृषि वैज्ञानिक अवश्य ही बधाई के हकदार हैं।आज हम सवा अरब से अधिक लोगों को भरपेट भोजन देनें के अलावा निर्यात भी कर रहे हैं।जिस कारण हमें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिक अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष प्राप्त हो रहा है।लेकिन भारतीय किसानों द्वारा अन्धाधुंध यूरिया और अन्य उर्वरकों तथा कीटनाशकों के प्रयोग के कारण कुछ देशों का बासमती चावल के आर्डर वापस लेना पड़ा है।जिसके कारण हमें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी उठानी पड़ी है।जो अवश्य ही चिन्ता का विषय है।कृषि वैज्ञानिकों द्वारा मृदा जांच द्वारा किसानों को प्रशिक्षित कर आवश्यक रसायनों के प्रयोगों के लिए किसानों को प्रशिक्षित किए जानें की आवश्यकता है।     हमारे पुराने जमाने के किसानों द्वारा पुराने बीजों एवं गोबर की खाद तथा खली से उत्पादित खाद्यान्नों एवं सब्जियों में जो गजब का स्वाद एवं सुगंध मिलती थी वह अब नये बीजों एवं उर्वरकों एवं कीटनाशकों से उत्पादित खाद्यान्नों एवं सब्जियों में नहीं पाई जाती है।वह स्वाद,सोंधापन, सुगंध अब धीरे-धीरे गायब होती …

कबिरा शिक्षा जगत् मा भाँति भाँति के लोग।।भाग दो।।

प्रिय पाठक गणों आपने " कबीरा शिक्षा जगत मां भाँति भाँति के लोग ( भाग-एक ) में पढ़ा कि श्रीमती रामदुलारी तालुकेदारिया इण्टर कालेज सेंहगौ रायबरेली की प्रधानाचार्या, प्रबंधक, लिपिकों आदि के द्वारा किस प्रकार शिक्षा सत्र 2015--16 तथा शिक्षा सत्र2014--15 मे किस प्रकार लगभग उन्यासी छात्रों को फर्जी ढ़ंग से प्रवेश दिलाया गया । बाद मे इन्हीं छात्रों को अगले वर्ष इण्टर कक्षा की परीक्षा दिला दी गई। इसके लिए फर्जी कक्षा 12ब3 बनाई गई। बाकायदा फर्जी छात्रों का उपस्थिति रजिस्टर भी बनाया गया। परन्तु सभी छात्रों से प्रथम तथा द्वितीय वर्ष की कक्षाओं मे निर्धारित विद्यालय फीस लेने के बावजूद भी इसका विद्यालय के रजिस्टर पर इन्दराज नही किया गया। यह अनुमानित फीस लगभग साढ़े चार लाख रुपये के आसपास थी जिसे उपरोक्त अधिकारियों / विद्यालय के शिक्षा माफियाओं द्वारा अपहृत / गवन कर लिया hi गया। यथोचित कार्रवाई हेतु इस सम्पूर्ण विवरण को प्रार्थना पत्र मे लिखकर अपर सचिव के क्षेत्रीय कार्यालय इलाहाबाद को दिनाँक 25 /05 2016 को भेजा गया।
अब हम आपको इसके शर्मनाक पात्रों का परिचय करवा देते हैं।
       😢शर्मनाक…

भारतीय क्रिकेटर : भारत मे शेर विदेशों मे ढेर

बी.सी.सी.आई.दुनिया का सबसे धनी क्रिकेट संघ है।भारत में क्रिकेट इस कदर लोकप्रिय है कि इतनी लोकप्रियता राष्ट्रीय खेल हाकी को भी नहीं हासिल है।निःसंदेह कागजों पर टीम इंडिया काफी मजबूत मानी जाती है।नं.एक टेस्ट क्रिकेट में है।वनडे का विश्व कप खिताब दो बार तथा 20-20का भी विश्व कप खिताब एक बार जीत चुकी है।आज भी विराट कोहली विश्व के नं.एक बल्लेबाज हैं।लेकिन भारतीय प्राय दीप के बाहर विदेशी क्रिकेट "नेशन्स" में अर्थात विदेशी सरजमीं पर क्रिकेट श्रंखलाएं जीतनें का रिकॉर्ड कभी अच्छा नहीं रह है।विराट कोहली की कप्तानी में लोगों को इस बार सिरीज़ जीतने का ज्यादा भरोसा था।मौजूदा भारत V/S इंग्लैंड क्रिकेट श्रंखला 2018 में कोहली के प्रदर्शन को छोंड़ दिया जाय तो किसी बल्लेबाज का प्रदर्शन अच्छा नहीं कहा जा सकता।हाँ गेंदबाजों का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है।केवल हम 20-20श्रंखला ही जीतनें में कामयाब रहे । बाकी इंग्लैंड नें जबरदस्त वापसी करते हुए बुरी तरीके से वनडे और टेस्ट श्रंखलाओं में मात दी है।बी.सी.सी.आई खिलाडियों के चयन में हुई चूक पर मंथन परअवश्य करेगी।टीम प्रबंधन पर प्रश्नचिन्ह ज्यादा लगे हैं करु…