Skip to main content

[ v/1 ] धर्म ; ईश्वर के गुण वाचक शब्द

code - 01

web- gsirg.com



धर्म ; ईश्वर के गुण वाचक शब्द


हम लोगों के मुंह से तीन शब्दों का उच्चारण सुनते रहते हैं | यह तीन शब्द सत्यम , शिवम और सुंदरम | यह तीनों ही शब्द ईश्वर के गुणवाचक शब्द हैं | इन्ही तीन शब्दों से ईश्वरत्व के ज्ञान का बोध होता है | परमात्मा क्या है ? अगर हम इस पर विचार करें , तो हमें ज्ञात होता है कि , वह तो उच्च आदर्शों का समुच्चय मात्र है |इसप्रकार जब किसी व्यक्ति में यह गुण परिलक्षित होते हैं तब वह ईश्वर के समतुल्य हो जाता है | इस पर आगे विचार करने पर हम पाते हैं कि , '' सत्य '' मनुष्य का पहला आदर्श है | ईश्वर की प्राप्ति के लिए लोगो को सबसे पहले इसी आदर्श पर चलना जरूरी होता है | जब वह सत्य की जगह झूठ का सहारा लेता है , तब ही झूठ की नींव पर बनी इमारत सुदृढ़ और मजबूत नहीं हो पाती है | ऐसी इमारत में ईश्वर का निवास तो हो ही नही सकता | ईश्वर की समतुल्यता प्राप्त करने के लिए , यदि पहला कदम आदर्श से हट गया तब ही वह व्यक्ति भगवत्ता की ओर तथा चरमोत्कर्ष की ओर न जाकर विनाश के मार्ग पर निकल जाता है |


'' सत्य '' से दिव्यता की उपलब्धि


संसार के प्रत्येक प्राणी का उद्देश्य अपने जीवन में दिव्यता की उपलब्धि प्राप्त करना होता है | दिव्यता का पहला लक्षण ही सत्य है | यह सत्य ही परमात्मा का एक अंश है | इसको झूठ के आघातों प्रतिघातों से निर्बल नहीं होना चाहिए | क्योंकि ऐसा हो जाने पर उसके उद्देश्य की पूर्ति होना असंभव है | उसे यह बात सदैव अपनी मन में स्थापित किए रहना होगा कि , जहां पर भी सत्य का अंश होगा , या फिर जिसमें भी होगा , वहां पर ही परमात्मा की झांकी होगी | सभी जानते है कि ईश्वर तो निराकार है | इसलिए उसके दर्शन , उसमें समाविष्ट गुणों को देख कर किया जा सकता है | जहां पर जितने भी अंशों में यह गुण विद्यमान होंगे , वहां उतने ही अंशों में ईश्वरत्व विद्यमान होगा , अर्थात ईश्वर का वास होगा |


शिव से कल्याणकारी भावना की प्राप्ति


परमपिता परमात्मा का दूसरा गुण शिव है | शिव का अर्थ है कल्याण | ईश्वर हमेशा अपने सानिध्य प्राप्त करने वाले या फिर सानिध्य मे रहने वालों के कल्याण की विषय मे सोचता है | यही कारण है कि उसे कल्याणकारी कहा गया है | वह अपने भक्तों और साधकों के दुर्गुणों का पान कर , सदैव उसका कल्याण करता रहता है | यह कल्याणकारी भावना जब तक मनुष्य के अंदर नहीं समाहित हो जाती तब , तक वह सदा ही दूसरों के अहित और अनिष्ट के कार्य करता ही रहेगा | मानव का इस कल्याणकारी भावना से हट जाने पर वह , शिव न होकर , मात्र शव हो जाएगा | शव अर्थात मृत | दूसरे शब्दों में वह मृत्यु तुल्य हो जाता है | इसलिए ईश्वर का सानिध्य पाने हेतु उसे कल्याणकारी कार्य करने ही चाहिए , क्योंकि मनुष्य मे संजीवनी के संचार का काम , यह कल्याणकारी भावना ही करती है , तथा इसी के आधार पर ही वह समाज को जीवंत और जागृत बना सकता है | ऐसी स्थिति में उसके अंदर ऋषि और मुनियों का भाव झलकेगा , अर्थात दृष्टिगोचर होगा |


सुंदरम से प्रकृति प्रेम की प्राप्ति


सुंदरम शब्द सौंदर्य और प्रकृति का पर्याय है | प्रकृति के अंगों को हम वन , उपवन , बर्फ से ढकी पर्वत श्रंखलाओं , फसलों से लहलहाते खेत , विभिन्न प्रकार के पेड़ , रंग बिरंगे फूलों और रंग बिरंगी तितलियों आदि मै प्रकृति का सौंदर्य महसूस कर सकते हैं | उपरोक्त सभी वस्तुएं प्रकृति का अंग है , तथा परमात्मा के अंदर समाविष्ट सुषमा को प्रदर्शित करने वाले परमपिता परमेश्वर ने ऐसा इसलिए होता है , क्योंकि ईश्वर प्रकृति के कण-कण में समाया हुआ है |उस अलौकिक रचनाकार परमपिता ने अपनी सभी रचनाओं को इस प्रकार इतना सुंदर बनाया है कि , उसकी तुलना उसके उदात्त अंतकरण से की जा सकती है | यह तो सर्वविदित तथ्य है कि जिसकी जैसी पृकृति होती है उसका ही वैसा स्वभाव भी बन जाता है | तदनुसार उसके कृतित्व भी उसकी प्रकृति के अनुरूप होते हैं | यदि किसी की प्रकृति दूषित और अस्त व्यस्त है तो , उसकी रचनाएं भी कुरूप और बदरंग ही होंगी | इसके विपरीत यदि मानव का अंतकरण मनोरम और शुद्ध है तो , उसकी कृतियां भी सुंदर और सुरूप होगी | ऐसी कृतियों को सारा संसार प्रशंसा की दृष्टि से देखता |


परमपिता की विशेषता

हम सबका रचनाकार परमपिता परमेश्वर अनेकों प्रकार की विशेषताओं वाला है | वह बहुत ही सुंदर और सरस है , इसीलिए उसे '' रसो वै सः '' कहा गया है | वह सरसता , सदासयता , सुंदरता और समरसता से परिपूर्ण और सरसता सदा सुंदरता को धारण किये होती है , और सुन्दरता सरसता को | दोनों ही शब्द ईश्वर के परिप्रेक्ष में एक दूसरे के पर्यायवाचीहोते है | दोनों के बीच चोली और दामन का संबंध है , इसीलिए सत्यम शिवम सुंदरम को ईश्वर की गुनावलियाँ कहा गया है | इन्हीं रूपों को हम प्रकारांतर से सर्वत्र देखते हैं , तथा उसकी पूजा , उपासना और अर्चना आदि करते हैं | सभी लोग यह मान कर चलते हैं कि दुनिया में व्यक्ति और समाज में जहां कहीं भी ये उपस्थित है , वह सब उसी परमपिता परमेश्वर की ही अभिव्यक्तियां है |

इति श्री


web - gsirg.com

Comments

Popular posts from this blog

पुराने बीजो का संरक्षण

नये खाद्यान्न बीजों या शंकर बीजों के आगमन के साथ खाद्यान्नों का उत्पादन अवश्य बढ़ा है।जिसके लिए हमारे कृषि वैज्ञानिक अवश्य ही बधाई के हकदार हैं।आज हम सवा अरब से अधिक लोगों को भरपेट भोजन देनें के अलावा निर्यात भी कर रहे हैं।जिस कारण हमें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिक अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष प्राप्त हो रहा है।लेकिन भारतीय किसानों द्वारा अन्धाधुंध यूरिया और अन्य उर्वरकों तथा कीटनाशकों के प्रयोग के कारण कुछ देशों का बासमती चावल के आर्डर वापस लेना पड़ा है।जिसके कारण हमें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी उठानी पड़ी है।जो अवश्य ही चिन्ता का विषय है।कृषि वैज्ञानिकों द्वारा मृदा जांच द्वारा किसानों को प्रशिक्षित कर आवश्यक रसायनों के प्रयोगों के लिए किसानों को प्रशिक्षित किए जानें की आवश्यकता है।     हमारे पुराने जमाने के किसानों द्वारा पुराने बीजों एवं गोबर की खाद तथा खली से उत्पादित खाद्यान्नों एवं सब्जियों में जो गजब का स्वाद एवं सुगंध मिलती थी वह अब नये बीजों एवं उर्वरकों एवं कीटनाशकों से उत्पादित खाद्यान्नों एवं सब्जियों में नहीं पाई जाती है।वह स्वाद,सोंधापन, सुगंध अब धीरे-धीरे गायब होती …

कबिरा शिक्षा जगत् मा भाँति भाँति के लोग।।भाग दो।।

प्रिय पाठक गणों आपने " कबीरा शिक्षा जगत मां भाँति भाँति के लोग ( भाग-एक ) में पढ़ा कि श्रीमती रामदुलारी तालुकेदारिया इण्टर कालेज सेंहगौ रायबरेली की प्रधानाचार्या, प्रबंधक, लिपिकों आदि के द्वारा किस प्रकार शिक्षा सत्र 2015--16 तथा शिक्षा सत्र2014--15 मे किस प्रकार लगभग उन्यासी छात्रों को फर्जी ढ़ंग से प्रवेश दिलाया गया । बाद मे इन्हीं छात्रों को अगले वर्ष इण्टर कक्षा की परीक्षा दिला दी गई। इसके लिए फर्जी कक्षा 12ब3 बनाई गई। बाकायदा फर्जी छात्रों का उपस्थिति रजिस्टर भी बनाया गया। परन्तु सभी छात्रों से प्रथम तथा द्वितीय वर्ष की कक्षाओं मे निर्धारित विद्यालय फीस लेने के बावजूद भी इसका विद्यालय के रजिस्टर पर इन्दराज नही किया गया। यह अनुमानित फीस लगभग साढ़े चार लाख रुपये के आसपास थी जिसे उपरोक्त अधिकारियों / विद्यालय के शिक्षा माफियाओं द्वारा अपहृत / गवन कर लिया hi गया। यथोचित कार्रवाई हेतु इस सम्पूर्ण विवरण को प्रार्थना पत्र मे लिखकर अपर सचिव के क्षेत्रीय कार्यालय इलाहाबाद को दिनाँक 25 /05 2016 को भेजा गया।
अब हम आपको इसके शर्मनाक पात्रों का परिचय करवा देते हैं।
       😢शर्मनाक…

भारतीय क्रिकेटर : भारत मे शेर विदेशों मे ढेर

बी.सी.सी.आई.दुनिया का सबसे धनी क्रिकेट संघ है।भारत में क्रिकेट इस कदर लोकप्रिय है कि इतनी लोकप्रियता राष्ट्रीय खेल हाकी को भी नहीं हासिल है।निःसंदेह कागजों पर टीम इंडिया काफी मजबूत मानी जाती है।नं.एक टेस्ट क्रिकेट में है।वनडे का विश्व कप खिताब दो बार तथा 20-20का भी विश्व कप खिताब एक बार जीत चुकी है।आज भी विराट कोहली विश्व के नं.एक बल्लेबाज हैं।लेकिन भारतीय प्राय दीप के बाहर विदेशी क्रिकेट "नेशन्स" में अर्थात विदेशी सरजमीं पर क्रिकेट श्रंखलाएं जीतनें का रिकॉर्ड कभी अच्छा नहीं रह है।विराट कोहली की कप्तानी में लोगों को इस बार सिरीज़ जीतने का ज्यादा भरोसा था।मौजूदा भारत V/S इंग्लैंड क्रिकेट श्रंखला 2018 में कोहली के प्रदर्शन को छोंड़ दिया जाय तो किसी बल्लेबाज का प्रदर्शन अच्छा नहीं कहा जा सकता।हाँ गेंदबाजों का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है।केवल हम 20-20श्रंखला ही जीतनें में कामयाब रहे । बाकी इंग्लैंड नें जबरदस्त वापसी करते हुए बुरी तरीके से वनडे और टेस्ट श्रंखलाओं में मात दी है।बी.सी.सी.आई खिलाडियों के चयन में हुई चूक पर मंथन परअवश्य करेगी।टीम प्रबंधन पर प्रश्नचिन्ह ज्यादा लगे हैं करु…