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Showing posts from April, 2018

1 गौरेया संरक्षण

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गौरेया संरक्षण
गौरेया एक घरेलू पक्षी है।आंगन में चीं-चीं की आवाज से घर को भर देने वाली पक्षी गौरेया इन दिनों इक्का-दुक्का ही दिखाई देती है।यह लगभग लुप्तप्राय होती जा रही है।अब लगभग हर गांव में पक्के मकान बनते जा रहे हैं।इसलिए इस पक्षी को अपनें घोषले बनाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।इस घरेलू चिड़िया के घोषले धन्नी वाले मकानों में बहुतायत से देखे जाते थे।जैसे-2धन्नी वाले मकानों की संख्या घटती गयी,यह चिडिय़ा भी घटती चली गयी।
सरकार ने इसके संवर्धन, संरक्षण की दिशा में काफी प्रयास किए हैं।इनके काठ के बने घोषले भी वितरित किए गए परन्तु इस चिड़िया को नये घर रास नहीं आ रहे हैं।इसके लिए सरकार अवश्य ही बधाई की पात्र है।यह अपने बनाए घरों में ही ज्यादा सुरक्षित महसूस करती है।मानव निर्मित भवन इसे कम रास आ रहे हैं। सरकार से निवेदन है कि मानव फ्रेण्डली चिड़िया का उचित संरक्षण, संवर्धन करने की कृपा करें ताकि इसे लुप्त होने से बचाया जा सके।
धन्यवाद
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1 इलाज ; मोटापा

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इलाज ; मोटापा
इस दुनिया में हर एक प्राणी सुगठित , सुंदर और सुडोल तथा मनमोहक शरीर वाला होना चाहता है | इसके लिए वह तरह तरह के व्यायाम करता है | सुडौल शरीर पाने के लिए वह हर व्यक्ति जो मोटापे से परेशान है , प्राणायाम और योग का भी सहारा लेता है | लेकिन उसका वातावरणीय प्रदूषण , अनियमित आहार-विहार उसके शरीर को कहीं ना कहीं से थोड़ा या बहुत बेडौल कुरूप या भद्दा बना ही देते हैं | आदमियों के शरीर में होने वाली इन कमियों मैं एक मोटापा भी है | जिसके कारण व्यक्ति का शरीर बेबी डॉल जैसा दिखाई पड़ने लगता है | बहुत से यत्न और प्रयत्न करने के बाद भी उसे इसमें सफलता नहीं मिल पाती है | वस्तुतः शरीर का मोटा होना उस व्यक्ति के लिए लगभग अभिशाप सा होता है |

वसा की आवश्यकता
हमारे शरीर के अंगों और प्रत्यंगों को ढकने का कार्य बसा या चर्बी का होता है | जिसकी एक मोटी परत त्वचा के नीचे विद्यमान रहती है | इस चर्बी का काम शरीर को उष्णता प्रदान करना है | इसके अलावा यह शरीर में चिकनाई भी बनाए रखती है | इस प्रकार से यह शरीर रक्षण का काम भी करती है | और आवश्यकता पड़ने पर शरीर…

1 वाहन चलाते समय फोन का प्रयोग खतरनाक

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वाहन चलाते समय फोन का प्रयोग खतरनाक 
मोबाइल फोन कुछ मामलों में लाभदायक तो कुछ मामलों में भारी नुकसान देह साबित हुआ है।चालकों द्वारा ड्राइविंग के दौरान इसका उपयोग बहुत ही नुकसान देह है।कुशीनगर वैन हादसा इसका जीता-जागता उदाहरण है।यदि चालक लीड कानों में न लगाए होता तो बच्चों के चिल्लाने का असर जरूर होता।चालक की जरा सी लापरवाही के कारण कई घरों का चिराग गुल हो गया है।
अतःसमस्त चालकों से अनुरोध है कि ड्राइविंग के दौरान नशा और मोबाइल फोन का कतई इस्तेमाल न करें,आपके वाहन पर कई लोग सवार हैं।कई परिवारों के चिराग आपके वाहन पर सवार होते हैं।



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1पॉलीथीन पर प्रतिबन्ध जरूरी

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पॉलीथीन पर प्रतिबन्ध जरूरी                                विगत 10--12सालों में पालीथीन का उपयोग अंधाधुंध बढ़ा है।गरम चाय,सब्जी की पैकिंग पालीथीन में करवानें में लोग गर्व महसूस करते हैं।जबकि गरम खाद्य पदार्थों की पालीथीन में पैकिंग स्वास्थ्य के लिहाज से काफी नुकसान दायक है।पालीथीन चाहे जितने दिन जमीन में दफन रहे यह सड़ना नहीं जानती है।लोग बचा खाना और कूड़ा करकट पालीथीन में भरकर फेंक देते हैं,जिसे ना समझ जानवर पालीथीन समेत खा जाते हैं।यह पालीथीन जानवरों की आँतों में फंस जाती है।आपरेशन के अभाव में जानवर तड़प-2कर जान दे देता है।यह युग ही शायद पालीथीन और प्लास्टिक का है।दवा,सिरिंज आदि की पैकिंग प्लास्टिक की ही होती है।जोकि स्वास्थ्य के लिहाज से कतई मुफीद नहीं है।जलानें पर पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाती है। जन,जानवर,मृदा स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पालीथीन पर पूर्णतया प्रतिबंधित किए जाने की आवश्यकता है।
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" कबीरा शिक्षा जगत मां भाँति भाँति के लोग ( भाग-तीन )

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बिना पढ़े ही मनमानी कक्षाएं उत्तीर्ण करने का आसान उपाय
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किंतु आप चाहते हैं कि आपका बच्चा अच्छे विषयों में अच्छे नंबरों से पास

हो ?

तो इसे जरूर पढ़ें
विद्यालय परिचय

हम आपको रायबरेली जिले में स्थित एक इंटर कॉलेज के विषय में बता रहे हैं | इस इंटर कॉलेज का नाम है , श्रीमती रामदुलारी तालुकेदारिया इंटर कॉलेज सेहगो - रायबरेली | अगर आप यहां अपने बच्चे का एडमिशन करवा देंगे तो आपका बच्चा इंटरमीडिएट से लेकर कक्षा नौ तक बिना स्कूल गए , बिना कुछ पढ़े लिखे उत्तीर्ण हो सकता है |
पहली शर्त
आपको केवल उनकी एक शर्त माननी होगी | उनकी केवल एक शर्त है कि , आप विद्यालय के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को मनमाने और मुंहमांगे पैसे दे दें |
विद्यालय की कार्यप्रणाली
आपके ऐसा करने पर स्कूल , आपके बच्चे का नाम एक फर्जी रजिस्टर पर लिख लेगा , वे उस बच्चे की केवल बोर्ड परीक्षा की परीक्षा फीस और रजिस्ट्रेशन शुल्क ही इलाहाबाद बोर्ड में जमा करेंगे शेष…

इलाज ; दिल की धड़कन की बीमारी का

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इलाज ; दिल की धड़कन की बीमारी का हमारे शरीर में विभिन्न प्रकार के महत्वपूर्ण अंग हैं | इन महत्वपूर्ण अंगों में हृदय का प्रमुख स्थान है | यह शरीर के भीतर ,छाती के बाई ओर स्थित होता है | इस स्थान पर हाथ रख कर दिल की धड़कन का अनुभव किया जा सकता है | अगर हम यहां कान लगाकर सुने तो हमे दिल के धड़कन की आवाज भी साफ साफ सुनाई देगी | एक स्वस्थ व्यक्ति का हृदय नियमित रूप से 1 मिनट में लगभग 72 बार धड़कता है | यह धड़कन एक नियमित समय अंतराल पर होती रहती है | यदि इस समय अंतराल में अनियमितता मिले तब जान लेना चाहिए कि उस व्यक्ति को दिल धड़कन की बीमारी है |
रोग विचार जब किसी कारण से दिल की धड़कन कम या ज्यादा हो जाती है , और नियमित रूप से होती रहती है | तब व्यक्ति इस रोग से पीड़ित हैं , यह जान लेना चाहिए | ऐसी अवस्था में दिल की धड़कन का नियमित रूप से बढ़ते जाना या कम होते जाना दोनों ही स्थितियां चिंता का विषय बन जाती है | कभी-कभी तात्कालिक प्रभाव से भी धड़कन बढ़ या घट जाया करती है |तथा अपन…

इलाज ; कुष्ठ रोग जानकारी और बचाव

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इलाज ; कुष्ठ रोग जानकारी और बचाव

यह एक घृणित रोग है | इस रोग में आदमी के शरीर के अंगों का गलना शुरू हो जाता है | इस रोग से प्रभावित अंगों से दुर्गंधयुक्त मवाद निकलने लगती है , धीरे-धीरे रोगी के यह अंग गल गल कर बहने लगते हैं | रोग की चरमावस्था पर धीरे-धीरे के अंग शरीर से गायब या समाप्त हो जाते हैं | जिसके कारण कोई अन्य व्यक्ति उसके पास उठता बैठता या खाता पीता नहीं है | इसके अलावा वह रोगी से किसी प्रकार का संबंध भी नहीं रखना चाहता है | दूसरे शब्दों में अगर कहा जाए तो लोग ऐसे रोगी को घृणा की दृष्टि से देखते हैं | इस रोग का रोगी स्वयं भी अपने आप से घृणा करने लगता है , कभी-कभी तो रोगी रोग से परेशान होकर आत्महत्या करने का विचार भी करने लगता है |

कुष्ठ हर चूर्ण बनाना

कुष्ट के रोगी को चाहिए कि वह अपने रोग से निजात पाने के लिए यह चूर्ण बना ले | इसके लिए रोगी को बकायन नामक वृक्ष के बीज इकट्ठा करना होता है | इन बीजों की मात्रा जब 2 किलो ग्राम के लगभग हो जाए , तब इनकी साफ-सफाई कर ले , ताकि उन पर लगी धूल मिट्टी आदि निकल जाए | अब इन बीजों की आधी मात्रा यानी 1 किलो बीज…

झोलाछाप डाक्टरों की व्यथा कथा / नेताओं की यौनलिप्सा मे संलिप्तता

झोलाछाप डाक्टरों की व्यथा कथा 
भारतीय समाज में यह जीव हमारे शहर,कस्बे, गांव देहात हर जगह पाया जाता हैं।एन-केन प्रकारेण यह जीव सरकार के स्वास्थ्य विभाग की प्रत्यक्ष सहायता करता हैं।सरकार इस बात को भी नहीं मान सकती क्योंकि सरकार की दृष्टि में यह जीव अस्तित्व में है ही नहीं।क्योंकि इनके पास बिचारों के भारतीय चिकित्सा परिषद द्वारा जारी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट नहीं होता।इसीलिए यह जीव कितना भी योग्य क्यों ना हो विधि मान्य चिकित्सक नहीं है।वैसे जन-जन तक स्वास्थ्य सेंवाएं पहुंचाने के कारण असली स्वास्थ्य रक्षक का श्रेय इसी जीव को जाता है।24घंटे चिकित्सा सेवाएं यहीं जीव देता है।लोगों को सस्ती स्वास्थ्य सेवा देना इनका धर्म और कर्म दोनो है।एक तरफ सरकार सस्ती चिकित्सा सेवा देनें के लिए प्रतिबद्ध है इसी क्रम में प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र की प्रशंसनीय योजना है।इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी अवश्य बधाई के पात्र हैं।असली मायनों में असली चिकित्सक की सेवाओं को मानवता की सेवा की शपथग्रहण को यहीं जीव साकार करता है।डिग्री वाले डाक्टरों का इलाज आम जनता के लिए मुश्किल काम भी है।उनका बजट आउट हो जाता …

धर्म ; हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी का अतीत आज के परिवेश मे

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|धर्म ; हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी का अतीत आज के परिवेश मे
प्रत्येक देश की भाषा उस देश की अस्मिता का आधार होती है | हमारे पास अपने भावों को व्यक्त करने का सर्वश्रेष्ठ माध्यम भाषा होती है , जिसके द्वारा ही हम अपने विचारों को दूसरों को सम्प्रेषित करते हैं , और दूसरों के विचारों को आत्मसात करते हैं | विचारों का प्रकटीकरण भाषा के माध्यम से ही संभव है | यही कारण है कि विश्व के सभी देशों कि एक अपनी एक निश्चित भाषा होती है | प्रत्येक देश की अपनी भाषा उसकी अपनी अस्मिता बनाए रखने के लिए निरंतर संघर्ष करती रहती है | संघर्ष की यह छटपटाहट विश्व की अनेक छोटे-छोटे देशों में देखी जा सकती है |

ऐसा कहा जाता है कि , विश्व के लगभग समस्त देश अपने अतीत में अंग्रेजों के गुलाम रहे हैं | एक समय यह भी था जब अंग्रेजों के राज्य में सूर्य अस्त नहीं होता था | प्रत्येक देश ने विभिन्न प्रकार के प्रयासों और संघर्षों के बाद अपने देश को आजाद कराया | हर देश के स्वतंत्रता संग्राम और स्वाधीनता आंदोलन का आधार वहां की भाषा ही रही है | हर देश के वीर , बलिदानी विचारको और प्रेरकों ने अपनी भाषा में ही अप…

11 इलाज ; दमा और एलर्जी का समसामयिक कारण

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 इलाज ; दमा और एलर्जी का समसामयिक कारण

मेरे सुविज्ञ पाठकगणों कुछ ऐसी बीमारियाँ  होती है , जो विशेष समय पर ही होती हैं , इन्हे हम बोलचाल की भाषा मे '' समसामयिक बीमारियां  '' कहते हैं जैसे सर्दी जुकाम | ें यह बीमारियों का एक निश्चित समय पर तथा निश्चित वातावरण मे अनायास ही व्यक्ति को अपनी गिरफ्त मे लेकर अपना भयावह स्वरुप  दिखाने लग जाती है | जैसा कि आप सभी जानते हैं कि यह गर्मी के दिन है | इस समय सभी किसान भाई अपनी गेहूँ कि फसल तैयार करके अपना गेहूँ घर लाने मे लगे हुए हैं | किसान इस फसल को घर लाने से पहले उसकी कटाई व मड़ाई करते है | मड़ाई के बाद ही किसान को गेहूँ के साथ जानवरों को खिलाने के लिए '' भूसा '' भी मिल जाता है |     

यह समय रवी की फसल गेहूँ की कटाई, मड़ाई का हैं | सभी किसान का यह काम जोरों पर है।मड़ाई के कारण चारों ओर '' भूसे '' के छोटे छोटे कण वायुमंडल में प्रचुरता से विद्यमान रहते हैं। इसीतरह धनिया और तिलहन आदि फसलो  के छोटे छोटे कण भी वातावरण मे बहुतायत से फैले हुए होते हैं | वायुमंडल के ऐसे प्रदूषित वातावरण …

11 इलाज ; दमा और एलर्जी का समसामयिक कारण

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 इलाज ; दमा और एलर्जी का समसामयिक कारण

मेरे सुविज्ञ पाठकगणों कुछ ऐसी बीमारियाँ  होती है , जो विशेष समय पर ही होती हैं , इन्हे हम बोलचाल की भाषा मे '' समसामयिक बीमारियां  '' कहते हैं जैसे सर्दी जुकाम | ें यह बीमारियों का एक निश्चित समय पर तथा निश्चित वातावरण मे अनायास ही व्यक्ति को अपनी गिरफ्त मे लेकर अपना भयावह स्वरुप  दिखाने लग जाती है | जैसा कि आप सभी जानते हैं कि यह गर्मी के दिन है | इस समय सभी किसान भाई अपनी गेहूँ कि फसल तैयार करके अपना गेहूँ घर लाने मे लगे हुए हैं | किसान इस फसल को घर लाने से पहले उसकी कटाई व मड़ाई करते है | मड़ाई के बाद ही किसान को गेहूँ के साथ जानवरों को खिलाने के लिए '' भूसा '' भी मिल जाता है |     

यह समय रवी की फसल गेहूँ की कटाई, मड़ाई का हैं | सभी किसान का यह काम जोरों पर है।मड़ाई के कारण चारों ओर '' भूसे '' के छोटे छोटे कण वायुमंडल में प्रचुरता से विद्यमान रहते हैं। इसीतरह धनिया और तिलहन आदि फसलो  के छोटे छोटे कण भी वातावरण मे बहुतायत से फैले हुए होते हैं | वायुमंडल के ऐसे प्रदूषित वातावरण …

धर्म ; मंत्रों में है अद्भुत शक्तियां

धर्म ; मंत्रों में है अद्भुत शक्तियां
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10 - 04 - 2018
------------------------------------------------------------------------ हमारे प्राचीन ऋषि मुनि अनेक मंत्रों की जानकार थे , वह मंत्रों की सहायता से आश्चर्यजनक परोपकारी और जनहित के कार्य किया करते थे | आज इसी संबंध में हम कुछ जानकारी प्राप्त करेंगे | मंत्रों की शक्ति भौतिक शक्तियों से बढ़कर सूक्ष्म और सामर्थ्यवान होती है | यही कारण रहा है कि प्राचीन काल के ऋषियों मनीषियों और योगियों आदि ने मंत्रों की शक्तियों से पृथ्वी लोक , देवलोक और ब्रह्मांड की अनंत शक्तियों पर विजय पाई थी |
मंत्रों का व्यापक प्रभाव और सामर्थ्य
मंत्रों में अनेकों प्रभावी तथा सामर्थ्यवान शक्तियां निहित है | यही कारण है कि , प्राचीन काल के ऋषि मुनि मंत्रों के उपयोग से ही अपनी इच्छा के अनुसार किसी पदार्थ का स्थानांतरण कर सकते थे | मंत्रों की शक्ति आज भी विद्यमान है | अगर आज भी कोई व्यक्ति मंत्रों की स्थिति को अपने अंदर समाहित कर लेता है , तब उसको अनेक सामर्थ्यवान शक्तियां मिल जाती हैं …