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धर्म ; हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी का अतीत आज के परिवेश मे

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|धर्म ; हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी का अतीत आज के परिवेश मे

प्रत्येक देश की भाषा उस देश की अस्मिता का आधार होती है | हमारे पास अपने भावों को व्यक्त करने का सर्वश्रेष्ठ माध्यम भाषा होती है , जिसके द्वारा ही हम अपने विचारों को दूसरों को सम्प्रेषित करते हैं , और दूसरों के विचारों को आत्मसात करते हैं | विचारों का प्रकटीकरण भाषा के माध्यम से ही संभव है | यही कारण है कि विश्व के सभी देशों कि एक अपनी एक निश्चित भाषा होती है | प्रत्येक देश की अपनी भाषा उसकी अपनी अस्मिता बनाए रखने के लिए निरंतर संघर्ष करती रहती है | संघर्ष की यह छटपटाहट विश्व की अनेक छोटे-छोटे देशों में देखी जा सकती है |

ऐसा कहा जाता है कि , विश्व के लगभग समस्त देश अपने अतीत में अंग्रेजों के गुलाम रहे हैं | एक समय यह भी था जब अंग्रेजों के राज्य में सूर्य अस्त नहीं होता था | प्रत्येक देश ने विभिन्न प्रकार के प्रयासों और संघर्षों के बाद अपने देश को आजाद कराया | हर देश के स्वतंत्रता संग्राम और स्वाधीनता आंदोलन का आधार वहां की भाषा ही रही है | हर देश के वीर , बलिदानी विचारको और प्रेरकों ने अपनी भाषा में ही अपने देश के लोगों को स्वतंत्रता के लिए आंदोलित और उत्तेजित किया है | उनके सशक्त प्रयासों के बाद ही उस देश को औपनिवेशिकता से मुक्ति मिल पाई है | भाषा की शक्तिशाली मानसिकता से ही उन देशो ने आजादी प्राप्त कर पाई है |

प्रत्येक देश का यह दुर्भाग्यवस भाषा की वर्तमान स्थिति इतनी संवेदनशील है कि भाषा के प्रश्न को गैर राजनीतिक ढंग से सोचना भी संभव प्रतीत नहीं होता है | हमारे देश की राष्ट्रभाषा हिंदी विश्व की महानतम भाषाओं में है , लेकिन विश्व पटल पर इसे इतना महत्व नहीं मिल पाया है , जो उसे मिलना चाहिए था | हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी एक विशाल समाज की भाषा है | अगर हमें बहुसंख्यक नागरिकों के संपर्क में रहना है तो अनिवार्य रूप से हिंदी को महत्व दिया जाना चाहिए | आज विश्व के अनेक विकसित और विकासशील देश हिंदी की महत्ता को समझने लगे हैं | यही कारण है कि एक स्विस बहुराष्ट्रीय कंपनी अपने देश में हिंदी को प्रोत्साहित और प्रचारित करने के लिए , हिंदी सिखाने का बहुमूल्य प्रयास कर रही है | इसके अलावा TV पर विदेशी चैनल भी हिंदी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं | इसका प्रमुख कारण है उन्हे अपने उत्पादों के तकनीकी महत्व, जरूरी सूचनाएं, तथा अपने उत्पादों के विज्ञापन हिंदी भाषा वाले देशों के बीच में करना होता है | उपरोक्त विवरण से ही हिंदी भाषा की महत्ता को आसानी से समझा जा सकता है | यह एक सर्वविदित तथ्य है कि , भविष्य के प्रति कालखंड में भाषा ही सत्ता ही मुखापेक्षी रही है | वैसे तो हमारे देश की प्राचीन भाषा संस्कृत है | हमारे देश मे प्राचीन समय का प्रत्येक कार्य संस्कृत भाषा में हुआ करता था | उसके बाद के प्रत्येक कालखंड में जब जब हम गुलाम रहे , हमारी भाषा के साथ अन्याय होता रहा है |पहले हमारा देश मुस्लिमों का गुलाम रहा था , जिसके कारण यहां पर फारसी भाषा को लोगों ने अपनाया , जिसका प्रभाव आज भी हमारे यहाँ दृष्टि गोचर हो रहा है | इसी तरह जब हम मुस्लिमों के बाद अंग्रेजों के गुलाम हुए , उस समय अंग्रेजों के चतुर चालाक कूटनीतिज्ञों ने बड़ी ही चतुराई के साथ एक प्रकार का षडयंत्र किया , उन लोगों के षडयंत्र का ही नतीजा था | कि हमारे देश के कुछ सभ्य और सम्मानित नागरिकों ने भी अंग्रेजी को प्रतिष्ठित विकसित और पल्लवित होने का अवसर प्रदान किया | अंग्रेजी शासकों में लार्ड मैकाले एक विकृत मानसिकता वाला एक ऐसा अंग्रेजी शासक था जिसने हिंदी भाषा को अपूरणीय क्षति पहुंचाई | तत्कालीन हमारे देश की गुलाम मानसिकता के लोग , अंग्रेजों के इस कुत्सित षड्यंत्र को समझ नहीं पाए , जिसका परिणाम आज हमारे सामने है |

दुनिया के बहुत सारे लोग अंग्रेजी भाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर की भाषा प्रचारित करते हैं | परन्तु यह सही नही है | यह जरूर है कि विश्व भर में इस अंग्रेजी से देशाटन , व्यापार शिक्षा संचार आदि के क्षेत्र में इसका लाभ मिलता है , परंतु अंग्रेजी भाषा , हमारी हिंदी भाषा से अधिक संपन्न नहीं है | आज भी साम्राज्यवादी देश अपने उपनिवेशों में अपनी भाषा और संस्कृति को थोपने का प्रयास करते रहते हैं , क्योंकि उनका सोंचना होता है अथवा उन्हें यह आभास होता रहता है कि , सैन्य बल से अधिक प्रभावी भाषा बंल होता है | यदि किसी देश की भाषा और संस्कृति की मानसिक दास्तां सदियों तक चलानी है तो उस देश की भाषा और संस्कृति को नष्ट करके ही वे अपनी भाषा और संस्कृति को वहां पर थोपना ही आवश्यक होगा |

हमारे देश की राष्ट्रभाषा हिंदी है , और हमारी सभी देशवासियों का इसके प्रति लगाव होना ही चाहिए तथा इसे भावनात्मक रूप से अपने दिल में बसाना भी चाहिए , क्योंकि आगे आने वाले समय में हो सकता है कि किसी कारण से इसमें व्यतिक्रम आ जाए , परंतु यह व्यतिक्रम चाहे जिन कारणों से हो , स्थाई रूप से नहीं हो सकेगा | बीते हुए समय में जिस तरह से हमारे देश के क्रांतिकारियों ने हमारी अपनी भाषा की अस्मिता को बचाने सहेजने , और सुधारने करने का काम किया है वह प्रशंशा करने योग्य हैं | हमें दूसरों के षड्यंत्र को समझना होगा , और लोगों को समझाकर उन्हे हिंदी भाषा की ओर प्रेरित करना होगा | इससे हमारी हिंदी भाषा की खोई हुई प्रतिष्ठा वापस मिल सकेगी और इसका महत्व भी बढ़ जाएगा , तथा निरंतर बढ़ता ही रहेगा | अगर आप मेरी बात को समझ पाए हो तो अभी से यह संकल्प करें कि , हमें अभी से हिंदी भाषा को बचाने उसको समृद्ध करने और प्रचारित करने के लिए कटिबद्ध होना है |

समाप्त⇃λ🚩🚩

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