Skip to main content

इलाज ; दिल की धड़कन की बीमारी का



web - gsirg.com
helpsir.blogspot.in

इलाज ; दिल की धड़कन की बीमारी का
हमारे शरीर में विभिन्न प्रकार के महत्वपूर्ण अंग हैं | इन महत्वपूर्ण अंगों में हृदय का प्रमुख स्थान है | यह शरीर के भीतर ,छाती के बाई ओर स्थित होता है | इस स्थान पर हाथ रख कर दिल की धड़कन का अनुभव किया जा सकता है | अगर हम यहां कान लगाकर सुने तो हमे दिल के धड़कन की आवाज भी साफ साफ सुनाई देगी | एक स्वस्थ व्यक्ति का हृदय नियमित रूप से 1 मिनट में लगभग 72 बार धड़कता है | यह धड़कन एक नियमित समय अंतराल पर होती रहती है | यदि इस समय अंतराल में अनियमितता मिले तब जान लेना चाहिए कि उस व्यक्ति को दिल धड़कन की बीमारी है |
रोग विचार
जब किसी कारण से दिल की धड़कन कम या ज्यादा हो जाती है , और नियमित रूप से होती रहती है | तब व्यक्ति इस रोग से पीड़ित हैं , यह जान लेना चाहिए | ऐसी अवस्था में दिल की धड़कन का नियमित रूप से बढ़ते जाना या कम होते जाना दोनों ही स्थितियां चिंता का विषय बन जाती है | कभी-कभी तात्कालिक प्रभाव से भी धड़कन बढ़ या घट जाया करती है |तथा अपनेआप ठीक भी हो जाया करती है , ऐसी स्थिति को रोग नहीं मानना चाहिए | परंतु नियमित रूप से धड़कन कम या ज्यादा होती रहे तब रोग माना जा सकता है |
धड़कन क्या है
इसको जानने के लिए हमें हृदय की बनावट जानना होगा | हमारा हृदय चार कोठियों में बंटा होता है | इसमें अशुद्ध रक्त लाने वाली और शुद्ध रक्त ले जाने वाली रक्त वाहिनियां होती है | इन चारों कोठियों में अनैच्छिक मांसपेशियां पेशियों के दरवाजे होते हैं , जो नियमित अन्तराल पर खुलते और बंद होते रहते हैं | यहां से रक्त ले जाने और रक्त आने पर एक विशेष प्रकार की आवाज होती रहती है | इसी आवाज को धड़कन कहते हैं | रक्त के संचरण की यह क्रियाएं 1 मिनट में 72 बार होती हैं | जब धड़कन की इस क्रिया 72 से कम या ज्यादा हो जाती है | उस समय दिल की आवाज आने में अंतर आ जाता है | इसी विशेष आवाज़ के अंतर हो जाने को ही दिल के धड़कने की बीमारी कहां जाता है |
हृदय रोग होने के कारण
दिल धड़कन में विकृति आने की बहुत से कारण हैं | इसमें रोगी का अनियमित आहार तथा बिहार प्रमुख है | दूषित वातावरण , विभिन्न प्रकार के रोग , दिल की धड़कन को प्रभावित करते हैं | जैसे
धड़कन कम होने के पूर्व रोगी को दस्त लगना , बवासीर या पेट के रोग होते रहते हैं | खून की कमी होना , टी ० बी ० की बीमारी या प्रमेह की शिकायत भी रोगी को दिल की धड़कन रोग होने से पूर्व हुआ करती है | इसके अलावा शरीर पर चर्बी का बढ़ जाना , धातु दुर्बलता और ब्लड प्रेशर भीदिल की धड़कन के कम होने के कारण हैं |
इसी प्रकार दिल के अधिक धड़कन के रोग के पूर्व रोगी को विभिन्न प्रकार की शारीरिक व्याधियां भी हो जाती है जैसे खांसी , हिचकी ,श्वास , दाह और चेचक आदि रोग ,रोगी को पहले से हुए होते हैं |
रोग की भयानक अवस्था
यदि किसी व्यक्ति को यह रोग काफी दिनों तक अपने गिरफ्त में लिए रहता है | यदि यह स्थिति लम्बे समय तक बनी रहे तब दिल की धड़कन की इस बीमारी को भयानक अवस्था में गिना जाता है | ऐसे में रोगी को थकावट तथा मूर्छा जैसी गंभीर अवस्थाओं से गुजरना पड़ सकता है | रोगी थोड़ा सा परिश्रम करने पर या फिर क्रोध और शोक करने पर मूर्छित अवस्था को भी पहुंच जाता है | ऐसी स्थिति में सबसे पहले रोगी की आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है | इसके बाद रोगी बेहोश हो जाता है | प्रारंभ में बेहोशी की अवस्था थोड़े समय की होती है | बाद में की अवस्था बढ़ती चली जाती है | रोगी का मन किसी काम में नहीं लगता है , इसके अलावा उसे सभी खाद्य वस्तुएं अप्रिय लगने लगती है | यदि दिल की धड़कन पुरानी हो जाए तो , रोगी मे रस , रक्त , मांस , अस्थि , मज्जा और शुक्र धातु भी क्षीण हो जाते है |
साधारण उपचार
यदि रोगी को तीव्र गति अवस्था की धड़कन है | तब रोगी को विश्राम की आवश्यकता होती है | रोगी को शारीरिक और मानसिक विश्राम देना अति आवश्यक होता है | उसको चिंता , शोक , क्रोध , ईर्ष्या और द्वेष आदि विकृतियां पैदा करने वाली मानसिक क्रियाएं बंद कर देनी चाहिए | उसके भोजन में अदरक , प्याज और लहसुन का प्रयोग अधिक करना चाहिए | खाने में जो मसाले प्रयोग किए जाते हैं उनमें सोंठ , काली मिर्च , लौंग , दालचीनी और तेजपात विशेष हितकारी होती है | फलों में पपीता , अंगूर , सेब और अंजीर का प्रयोग करें | मेवा में मुनक्का , बादाम , काजू अखरोट , पिस्ता और खजूर का भी प्रचुर मात्रा में प्रयोग करना चाहिए | इसके अलावा शीतल पदार्थों के अधिक सेवन से बचना चाहिए |
औषधीय उपचार
इसके औषधीय उपचार के लिए अर्जुन की छाल का बारीक चूर्ण बना ले | इसकी 4 ग्राम मात्रा को 20 ग्राम खांड के साथ रोगी को सेवन करवायें | इस दवा को गाय के आधा किलो उबले हुए दूध के साथ दिया जाता है | जिस समय रोगी कोई दवा दी जाए ,उस समय रोगी को खाली पेट होना चाहिए | इस प्रकार इस दवा के नित्य प्रयोग से रोग अपनी तीव्रता के अनुसार धीरे-धीरे कम होता चला जाता है ,और अंत में रोग समूल नष्ट हो जाता है | ह्रदय की धड़कन के लिए यह दवा बहुत मुफ़ीद है | इसके साथ ही ऊपर लिखे उपचार को भी जारी रखें | इससे रोग को समाप्त होने में मदद मिलेगी |
जय आयुर्वेद

हमारा अनुरोध है कि आप इसे पढ़ने के बाद शेयर कर दिया करें ताकि और लोग भी इसे पढ़ सकें|

Comments

Popular posts from this blog

कबिरा शिक्षा जगत् मा भाँति भाँति के लोग।।भाग दो।।

प्रिय पाठक गणों आपने " कबीरा शिक्षा जगत मां भाँति भाँति के लोग ( भाग-एक ) में पढ़ा कि श्रीमती रामदुलारी तालुकेदारिया इण्टर कालेज सेंहगौ रायबरेली की प्रधानाचार्या, प्रबंधक, लिपिकों आदि के द्वारा किस प्रकार शिक्षा सत्र 2015--16 तथा शिक्षा सत्र2014--15 मे किस प्रकार लगभग उन्यासी छात्रों को फर्जी ढ़ंग से प्रवेश दिलाया गया । बाद मे इन्हीं छात्रों को अगले वर्ष इण्टर कक्षा की परीक्षा दिला दी गई। इसके लिए फर्जी कक्षा 12ब3 बनाई गई। बाकायदा फर्जी छात्रों का उपस्थिति रजिस्टर भी बनाया गया। परन्तु सभी छात्रों से प्रथम तथा द्वितीय वर्ष की कक्षाओं मे निर्धारित विद्यालय फीस लेने के बावजूद भी इसका विद्यालय के रजिस्टर पर इन्दराज नही किया गया। यह अनुमानित फीस लगभग साढ़े चार लाख रुपये के आसपास थी जिसे उपरोक्त अधिकारियों / विद्यालय के शिक्षा माफियाओं द्वारा अपहृत / गवन कर लिया hi गया। यथोचित कार्रवाई हेतु इस सम्पूर्ण विवरण को प्रार्थना पत्र मे लिखकर अपर सचिव के क्षेत्रीय कार्यालय इलाहाबाद को दिनाँक 25 /05 2016 को भेजा गया।
अब हम आपको इसके शर्मनाक पात्रों का परिचय करवा देते हैं।
       😢शर्मनाक…

[ q/9 ] Tratamentul; O alternativă unică la sterilizare

web - gsirg.com

 Tratamentul; O alternativă unică la sterilizare

 Fiecare creatură din lume care a venit în această lume, el a câștigat definitiv copilarie, adolescenta, maturitate si batranete | Dintre acestea, dacă părăsim copilăria, atunci în fiecare etapă a vieții, fiecare creatură suferă de dorința sexuală. Cu excepția unui om determinat generație apel la alte creaturi, dar omul este o ființă care, în 12 luni ale anului, 365 de zile, 24 de ore, poate cicălitoare sex în orice moment | Cea mai dificilă sarcină a ființelor umane în această lume este să câștige "Cupid". Fiecare bărbat și femeie din această lume este absorbit de toți muncitorii și începe să facă nenorociri teribile în această lume. Se estimează că doar 70% din criminalitatea mondială este legată de acest lucru.


 Libido o tulburare puternică


  Cauza nașterii diferitelor tipuri de infracțiuni este dorința. Femeile și bărbații care suferă de această dorință sexuală nu ezită să facă diferite tipuri de crime în ac…