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" कबीरा शिक्षा जगत मां भाँति भाँति के लोग ( भाग-तीन )

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बिना पढ़े ही मनमानी कक्षाएं उत्तीर्ण करने का आसान उपाय

क्या आपका बच्चा पढ़ने में कमजोर है ?

उसका पढ़ने में मन नहीं लगता है ?

किंतु आप चाहते हैं कि आपका बच्चा अच्छे विषयों में अच्छे नंबरों से पास

हो ?

तो इसे जरूर पढ़ें

विद्यालय परिचय

हम आपको रायबरेली जिले में स्थित एक इंटर कॉलेज के विषय में बता रहे हैं | इस इंटर कॉलेज का नाम है , श्रीमती रामदुलारी तालुकेदारिया इंटर कॉलेज सेहगो - रायबरेली | अगर आप यहां अपने बच्चे का एडमिशन करवा देंगे तो आपका बच्चा इंटरमीडिएट से लेकर कक्षा नौ तक बिना स्कूल गए , बिना कुछ पढ़े लिखे उत्तीर्ण हो सकता है |

पहली शर्त

आपको केवल उनकी एक शर्त माननी होगी | उनकी केवल एक शर्त है कि , आप विद्यालय के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को मनमाने और मुंहमांगे पैसे दे दें |

विद्यालय की कार्यप्रणाली

आपके ऐसा करने पर स्कूल , आपके बच्चे का नाम एक फर्जी रजिस्टर पर लिख लेगा , वे उस बच्चे की केवल बोर्ड परीक्षा की परीक्षा फीस और रजिस्ट्रेशन शुल्क ही इलाहाबाद बोर्ड में जमा करेंगे शेष रकम जो विद्यालय के हित में विद्यालय के खाते में जमा होना चाहिए , उसको विद्यालय के कुछ अधिकारी विद्यालय के खाते में जमा न करके , गबन कर लेंगे |

दूसरी शर्त

आपको यह बात किसी को भी अपना उद्देश्य पूर्ण होने से पहले नहीं बताना है | आपकी सांत्वना के लिए हम आपको उसकी एक बानगी दे रहे हैं , जिसे पूरी तरह से पढ़ कर तथा जानकर और समझ कर आप अपना उचित कदम उठाए |
,
 आपके समझने के लिए

इस विद्यालय ने सन 2014 - 15 मे  कक्षा 11 मे विज्ञानं वर्ग के लगभग 50 छात्र / छात्राओं [अब 69 ] से उनसे अवैध वसूली करके फर्जी व कूटरचित दस्तावेज तैयार किया , तथा लगभग एक लाख पचास हजार रुपए [ 1,50,000 ] , जो कि संस्था के हित मे उसके खाते में जमा होना चाहिए था , किंतु कोई पैसा जमा नहीं किया  | इन छात्र-छात्राओं का केवल  निर्धारित रजिस्ट्रेशन शुल्क ही इलाहाबाद बोर्ड में जमा किया गया | इन छात्रों से विद्यालय की शिक्षण शुल्क आदि के रूप में लिए गए सभी शुल्कों को  ,  विद्यालय के कुछ लोगों ने आपस मे बाँटकर , गबन कर लिया |
          इसी प्रकार अगले सत्र सन 2015 - 16 में भी इन्ही छात्रों का फर्जी व कूटरचित रजिस्टर तैयार करके व फर्जी रसीद छपवाकर छात्र छात्राओं से लगभग [  1,50,000 ] एक लाख पचास हजार रूपये जो कि , विद्यालय के शिक्षण शुल्क आदि के रूप में संस्था के हित मे उसके खाते में जमा होना चाहिए था ,किंतु जमा नहीं किया | इस वर्ष भी इन छात्र-छात्राओं का केवल निर्धारित बोर्ड परीक्षा शुल्क ही इलाहाबाद बोर्ड मे जमा किया गया | और शेष धनराशि को इस वर्ष भी विद्यालय के कुछ लोगों ने आपस मे बाँटकर ने पुनः आपस मे बाँटकर गबन कर लिया | उपरोक्त विवरण पढ़ने के बाद अगर आपको अभी भी कुछ शंका हो तो हम आपको यह भी बता रहे हैं कि यह सभी छात्र बिना विद्यालय मे एक दिन भी उपस्थित नहीं हुए | इन दोनों ही वर्षों मे यह सभी छात्र अच्छे अंको से उत्तीर्ण हो चुके हैं |

शिकायत कैसे निस्तारित होती है

अब इसके आगे भी जान लीजिए कि जब विद्यालय के एक अध्यापक ( मैं स्वयं ) ने इसकी शिकायत अपर सचिव , माध्यमिक शिक्षा परिषद, क्षेत्रीय कार्यालय - इलाहाबाद को इसकी शिकायत की तब तत्कालीन आवश्यकता को देखते हुए , उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया , परंतु जब शिकायतकर्ता ने जन सूचना अधिकार के अंतर्गत उनसे इस संबंध में जांच कराए जाने की जानकारी चाही तब उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक - रायबरेली को जांच / परीक्षण कराने का आदेश दिया | साथ ही उन्हें निर्देशित भी किया गया की जांच परीक्षण की रिपोर्ट शिकायतकर्ता को भी प्राप्त कराई जाए | किंतु जिला विद्यालय निरीक्षक रायबरेली ने भी जांच में टालमटोल कर काफी समय लगाया | शिकायतकर्ता कई बार जिला विद्यालय निरीक्षक रायबरेली के कार्यालय में जांच की रिपोर्ट लेने गया तो उसे बहाने बनाकर टालमटोल किया जाता रहा | डीआईओएस रायबरेली की हीलाहवाली की कारण सही स्थिति की जानकारी के लिए शिकायतकर्ता ने जन सूचना अधिकार के माध्यम से जिला विद्यालय निरीक्षक रायबरेली से जानकारी मांगी कि शिकायतकर्ता जांच की प्रति लेने कब तक आए | तब जिला विद्यालय निरीक्षक रायबरेली ने जांच कराने पर ध्यान दिया , किन्तु स्वयं कोई जांच नहीं की , बल्कि फर्जी जांच अधिकारी नियुक्त कर जांच की खानापूर्ति कर ली गई | फिर भी शिकायतकर्ता को जांच की प्रति लंबे समय तक उपलब्ध नहीं कराई गई | काफी समय बाद शिकायतकर्ता को जांच की रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई | तब उसे पता चला जांच रिपोर्ट तो फर्जी है , जिसे अपर सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद क्षेत्रीय कार्यालय इलाहाबाद ने भी स्वीकार कर यह मान लिया है कि शिकायतकर्ता की शिकायत में कोई दम नहीं है | इसलिए आप भी बिना किसी झिझक के उपरोक्त इंटर कॉलेज या ऐसे किसी अन्य विद्यालय में अपने बच्चे का सुविधापूर्वक एडमिशन करवा कर , उसे उत्तीर्ण करवा सकते हैं | अगर हमारी इस लेख को शिक्षा माफिया लोग जान लें तो उन्हें भी अपना काम करने में आसानी होगी |
इसलिए आप बिल्कुल निश्चिंत रहें , आपको कोई परेशानी नहीं होगी |


विभिन्न स्तरों की परेशानियों से छुटकारा


मान लीजिए अगर कोई शिकायतकर्ता शिकायत भी करता है तो शिक्षा विभाग ही उस शिकायतकर्ता की दिक्कतें इतनी ज्यादा बढ़ा देगा , इतनी रुकावटें डाल देगा कि वह परेशान होकर के अपनी शिकायत को उसी जगह पर बंद कर देगा | अब हम आपको विभिन्न स्तरों पर होने वाली उन मुसीबतों को बतला रहे हैं , जिन्हें शिक्षा विभाग के अधिकारी खुद ही टालते रहेंगे | वे खुद ही आप को बचाते रहेंगे |इसतरह आपको किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा

माध्यमिक शिक्षा परिषद का सचिव स्तर


माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश इलाहाबाद ने शिकायतों परेशानियों और दिक्कतों से निपटारा करने की कठिनता से बचने के लिए अपने कार्यालय को चार जोनों में विभक्त कर रखा है , ताकि शिक्षा का स्तर गुणवत्तापूर्ण हो सके | किसी भी विद्यालय की ऐसी शिकायत मिलने पर इस कार्यालय को चाहिए कि वह ऐसी समस्याओं का त्वरित निस्तारण करें , लेकिन ऐसी शिकायतों के निस्तारण के लिए यह कार्यालय जांच या परीक्षण कराने के हक में नहीं रहता है | इसलिए वह शिकायतकर्ता की शिकायत को हरसम्भव लिंगरअॉन करता रहेगा | मान लीजिए अगर किसी शिकायतकर्ता ने बहुत प्रयास किया | तब ही क्षेत्रीय कार्यालय का सचिव संबंधित जिला के जिला विद्यालय निरीक्षक को जांच करने का आदेश दे देगा | लेकिन जांच या परीक्षण के परिणाम जानने के लिए उदासीन ही बना रहेगा | वह चाहेगा कि ऐसी शिकायत किसी भी स्तर पर हल न हो पाए , और स्वयं भी कोई यथोचित कार्यवाही करने से बचता रहेगा |

जिला विद्यालय निरीक्षक स्तर

इस स्तर पर निस्तारण के लिए जो कार्यवाही करना उचित होगा , वह यह कार्यालय तो बिल्कुल ही नहीं करेगा , साथ ही इतनी टालमटोल करेगा कि शिकायतकर्ता परेशान हो जाएगा | इसका कारण है कि बहुत अधिक दबाव पड़ने पर जिला विद्यालय निरीक्षक बेमन से जाँच करने / कराने की सोचेगा किन्तु स्वयं कोई जांच नहीं करेगा , बल्कि फर्जी जांच अधिकारी नियुक्त कर , फर्जी जांच अधिकारी नियुक्त कर फर्जी जाँच रिपोर्ट बनवाकर , विद्यालय को क्लीन चिट दे देगा | अगर क्षेत्रीय कार्यालय से निर्देश है कि , शिकायतकर्ता को जांच की प्रति दी जाए तो जिला विद्यालय निरीक्षक अपनी इस फर्जी जांच रिपोर्ट को शिकायतकर्ता को उचित समय पर नहीं भेजेगा , बल्कि जब उसे लगेगा कि मामला ठंडा पड़ गया है , तब ही वह अपनी रिपोर्ट शिकायतकर्ता को भेजकर अपने कर्तव्य की इति श्री कर लेगा | जांच का यह स्तर , क्षेत्रीय कार्यालय से भी गया गुजरा स्तर है |

जांच अधिकारी या नोडल अधिकारी स्तर

इस बिंदु पर नियुक्त होने वाला जांच अधिकारी / नोडल अधिकारी ऐसे व्यक्ति को बनाया जाता है , जो सब कुछ जानने के बावजूद भी न जानने का नाटक करता रहेगा | इस स्तर का अधिकारी केवल शिकायतकर्ता से अपने जाने के प्रमाण पर केवल शिकायत कर्ता के हस्ताक्षर करवाने तथा जाँच का अभिनय करने शिकायतकर्ता के पास जाएगा और उसके बाद मनमानी रिपोर्ट विद्यालय से ही तैयार करवा लेगा | जब जांच या नोडल अधिकारी , जांच अधिकारी बनकर व्यक्तिगत रूप से जांच करने आता है , उससमय उसे अपनी मर्यादा का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रहेगा | अपने कुचक्रों कुविचारों और कुतर्कों से वह विद्यालय का पक्ष लेते हुए शिकायतकर्ता से तरह-तरह के प्रमाण मांगेगा | हो सकता है कि ऐसे प्रमाण किसी शिकायतकर्ता के पास मे न हों , ऐसे मे उसे अपनी झूठी रिपोर्ट बनाने में बड़ी आसानी होती है | लेकिन अगर शिकायतकर्ता ने अपने प्रमाणों द्वारा अपनी शिकायत को सही साबित कर दिया | तब भी यह अधिकारी जानबूझकर शिकायतकर्ता के तथ्यों से बिल्कुल ही संतुष्ट नहीं होगा तथा कोई अन्य बहाना बनाकर शिकायतकर्ता को झूठा साबित करते हुए विद्यालय के पक्ष में , विद्यालय को क्लीन चिट देते हुए अपनी रिपोर्ट तैयार कर देगा |

अंत मे

इतना विवरण जानने के बाद अब आप जान लीजिए कि आपको परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है | मैंने तो आपको एक विद्यालय का उदाहरण दिया है ,लेकिन अगर आप पता करेंगे तो आप को ऐसे विद्यालय भी मिल सकते हैं , जो आपको और आपके बच्चे को मनवांछित सुविधाएं देते हुए ,उसे अच्छे नंबरों में उत्तीर्ण कराने का कार्य करते हुए मिल जाएंगे | अगर आपको ऐसा कोई विद्यालय मिल जाए तो वहां भी अपने बच्चे का एडमिशन करवा कर , मनोवांछित उद्देश्य की पूर्ति कर सकते हैं |
धन्यवाद

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