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स्वस्थ्य सेवाओं की स्थिति



आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।

स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है।स्वास्थ्य, शिक्षा,सड़क किसी भी देश के विकास के मुख्य आयाम होते हैं।चिकित्सा सेवाओं की लगभग सभी लोगों की कभी न कभी जरूरत जरूर पड़ती है।अच्छी चिकित्सा सेवा से ही मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है।हमारे देश में प्रति व्यक्ति के हिसाब से सुयोग्य चिकित्सकों की भारी कमी है।चिकित्सा उपकरणों की भी स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है।जिला अस्पतालों में कीमती मशीनों की आपूर्ति है भी तो टेक्नीशियनों की कमी के से कीमती मशीनें धूल फांक रही हैं।चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और सुधार की भारी आवश्यकता है।अशिक्षा और अल्प ज्ञान के कारण आज भी लोग बाबाओं, ओझाओं की शरण में ज्यादा जाते देखे जा सकते हैं।चिकित्सा सेवाओं की प्रचार, प्रसार की भारी जरूरत है।जिससे बाबाओं, ओझाओं की ठगी की दूकानें बन्द कराई जा सकें।जनता जागरूक हो सके। देहातों में सरकारी अस्पताल होते हुए भी अच्छे डाक्टर अपनी सेवाएं, नियुक्ति लेना पसंद नहीं करते हैं।जिनकी नियुक्तियां है भी वह भी रात्रि निवास तो कतई पसंद नहीं करते हैं।

सरकार से निवेदन है कि प्रति गांव आबादी के हिसाब से सचल वैन चिकित्सालय की व्यवस्था करने की कृपा करें।दिल्ली की तर्ज पर मुहल्ला क्लीनिक की व्यवस्था किए जाने की जरुरत है।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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