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सर्वोच्च न्यायालय



भारतीय संविधान में सुप्रीम कोर्ट को सर्वोच्च माना गया है।सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को मानने के लिए केन्द्र सरकार विवश है।सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन को हर हाल में केन्द्र को लागू करना ही होता है।उसी संविधान नें दो तिहाई बहुमत से केन्द्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को पलटने का अधिकार भी दे रखा है।फिर काहे की सुप्रीम कोर्ट सर्वोच्च?विद्वान न्यायाधीशों नें SC/ ST act में बिना जांच गिरफ्तारी पर रोंक लगा दी थी।जो एक उचित फैसला ही था।आखिर विद्वान न्यायाधीशों नें गुण-दोष के आधार पर ही तो अपना निर्णय दिया होगा।फिर कल संसद सदस्यों नें इस फैसले को पलट कर किस विद्वता का परिचय दिया है।केवल वोट बैंक के लिए संसद के विशेषाधिकार का प्रयोग कहां तक उचित है?अब उससे भी कड़े कानून बनाकर नौंवीं सूची में भी डालने की तैयारी चल रही है।जिसका मतलब होता है कि कोई भी सरकार इस कानून को बदल नहीं सकती है।आरक्षण केवल दस साल तक का मिला था।अब 70साल बाद भी वहीं व्यवस्था कायम है।इसके जरिए केवल ब्लैक मेलिंग को ही बढ़वा मिलेगा।जब देश में समान नागरिक संहिता कायम है तो जाति,धर्म के नाम पर अलग-अलग कानून क्यों हैं?इसी तरह यदि जाति,धर्म के नाम पर केवल वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति होती रही तो देश का विकास क्या खाक होगा।अयोग्य लोग सरकारी नौकरियों में जायेंगे और योग्य लोगों को बाहर बैठना पड़ेगा तो क्या विकास सम्भव है।मैं प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली  की निजी राय के अनुसार केवल योग्यता ही सरकारी नौकरियों में आधार होना चाहिए ताकि देश विकास और उन्नति के मार्ग पर जा सकता हैःअयोग्य लोग केवल जातीय आरक्षण के बल पर देश का उत्थान नहीं कर सकते हैं।80नंम्बर पानें वाला सामान्य जाति का उम्मीदवार अयोग्य और 25नंम्बर अनुसूचित जाति का योग्य, केवल15नंम्बर पाने वाला जनजाति का योग्य।यदि 80नंम्बर वाला अपराधी बनेगा तो 15 नंम्बर पाने वाला इंस्पेक्टर उसे कैसे पकड़ पायेगा?इसलिए देश हित में चयन का आधार केवल योग्यता ही होनी चाहिए तभी देश उन्नति के पथ पर जा सकेगा।देश हित में जातिगत आरक्षण के ऊपर उठकर प्रतिभा को ही चयन का आधार बनाए जाने की जरूरत है तभी देश आगे बढ़ेगा।जाति और धर्म के नाम राजनीति बिल्कुल बन्द होनी चाहिए।नहीं तो देश को विदेशों में अपमानित ही होना चाहिए।किसी भी देश में चयन का आधार जाति नहीं है।केवल प्रतिभा, योग्यता, मेधा को ही चयन का आधार माना जाता है।केवल भारत को छोड़कर।वोट बैंक के आधार पर सत्ता तो हथियाई जा सकती है पर विकास असम्भव है।


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