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ग्रामसभा सेहगौ के वीरों की शौर्य गाथा



जंगे आजादी का बिगुल बज चुका था।देश पर मर मिटने,कुछ कर गुजरने के लिए देश के दीवानों, मतवालों की टोलियां अंग्रेजों को मारनें,मरने की भावना उनके दिलों में हिलोरें मार रही थी।वह मचल रहे थे,बेताब थे।

रायबरेली जिला की सबसे बड़ी ग्राम सभा"सेहगों"के क्रांतिकारी कहाँ चुप बैठने वाले थे।राजे,रजवाड़े, तालुकेदारों को अंग्रेजों का समर्थन संरक्षण प्राप्त था।सन् 1921ई०में राम औतार, शालिकराम नें सेहगों के तालुकेदार श्री द्वारिका प्रसाद के खिलाफ लड़ाई छेड़ दी।राम औतार की माँ जिन्हें "कलक्टराइन"कहा जाता था।दूध की सौगंध देकर राम औतार से कहा--जाओ और सिपाहियों को मार कर ही आना।राम औतार अपने साथी सालिकराम के साथ लाठी लेकर सिपाहियों से भिड़ गये।और सिपाही गोलियां चला रहे थे।प्राणों की परवाह न करते हुए दो गारदों को मार गिराया और दो को मरणासन्न कर दिया।15 दिनों तक तालुकदार का फाटक नहीं खुला।"कलक्टराइन"नें पुनःदूध की सौगंध देकर कहा अदालत में झूठ नहीं बोलना।दोनों शेरों नें हंसते-हंसते फांसी के फन्दे को चूमा और अमर शहीद बनकर शहीदों की माला में दो मनके और बढ़ा दिया। विगत15-20सालों से आपके अस्थि-कलश आपके अंशज-वंशज जो वर्तमान में ग्राम प्रधान भी हैं।इनकी प्रताप मार्केट सेहगों में रखे हैं।और शहीद स्मारक बननें की बाट जोह रहे हैं।

सन् 1939 ई० में सुदौली में श्री सुभाषचंद्र बोस के आगमन का कार्यक्रम था।अंग्रेजी सिपाही भीड़ पर लाठीचार्ज कर रहे थे।सेहगों के श्री चौ०लालबहादुर सिंह नें सिपाहियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए।शहीदों की माला में एक और मनका जड़कर अमर शहीद हो गए। इन सभी बहादुर रणबाँकुरों को इनके शहीदी दिवस पर सेहगौ ग्राम सभा, रायबरेली के वासी इन अमर शहीदों, रणबांकुरों की शहादत पर अश्रु पूरित श्रद्धांजलि देते हैं।सभी ग्रामवासी यहाँ की की माटी में जन्म लेने पर अपनेआप को गौरवान्वित महसूस करते हैं।आजादी के बाद आपका शहीदी चबूतरा जो सुदौली में सरकार नें बनवाया था आज भू-माफियाओं नें कब्जा कर लिया है।चबूतरे का शेष अवशेष भी मौजूद नहीं है।न सरकार खोज कर रही है।डी.एम.रायबरेली से निवेदन है कि चबूतरे की खोज करवाने की कृपा करें।

अमर क्रांतिकारी, अद्भभुत सेनानी श्री चौ० हजारीलाल जिन्होंने उतरेठिया रेलवेस्टेशन पर तोड़-फोड़ की,भवानीगढ़,शिवगढ़ रायबरेली में नमक आन्दोलन के दौरान नमक बनाकर जेल गए और कारावास की भीषण यातनाएं सही।बछरावां के गांधी के नाम से प्रसिद्ध क्रांतिकारी और समाज सेवी मुंशी चन्द्रिका प्रसाद के आप निकट सहयोगी थे।आजादी मिलते ही आपने कहा अब हमारा काम समाप्त हुआ और स्वर्गारूढ़ हो गये।

राम मनोहर नेता नें भी जेलयात्रा की।

 धन्य है री तू सेहगों की माटी जिसनें 3 अमर शहीद और एक महान सेनानी और एक जेलयात्री को देश पर मर मिटने को जन्म दिया।5 क्रांतिकारी पैदा करनें वाले सेहगों का कोई खास विकास 70साल बीत जाने पर भी नहीं हुआ है।

सरकार से निवेदन है कि शहीद स्मारक बनवाकर इन शहीदों की मूर्तियां लगवाने की कृपा करे ताकि भावी पीढ़ी इनसे प्रेरणा ले सके और यादें ताजा और अक्षुण्य रह सके।ऐसा रहा है सेहगों के रणबांकुरों का आजादी की लड़ाई में योगदान।

जय हिन्द।जयभारत। जय जवान।जय किसान।


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