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सड़क दुर्घटनाओं का कारण मेनहोल और गड्ढें ।



आदरणीय  सम्पादक जी सादर प्रणाम।

बरसात के महीने चल रहे हैं।इस बार बरसात कुछ ज्यादा ही मेहरबान है।सड़कों के किनारे या किसी भी सड़क के हिस्से की मिट्टी बह जाने के कारण सड़कों पर गड्ढे बन ही जाते हैं।कुछ गड्डे जानलेवा भी बन जाते हैं।वाहनों का पलट जाना।गहरी खड्ढ में गिरने से जानें चली जाती हैं।चोटिल होने वालों में या जान जाने वाली दुर्घटनाओं में अधिसंख्य दोपहिया वाहनों की ही होती है।बरसात के मौसम में ओवर स्पीड बहुत ही घातक होती है।केवल स्लिप होना ही जानलेवा हो सकता है।सड़कों पर भरे पानी की गहराई या बहाव अधिक होने पर वाहन डूबने,इंजन में पानी चले जाने आदि के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ जाता है।जान जोखिम में डालने से बचना चाहिए।यदि शहरों के खुले मेनहोल भी कभी-2 भारी दुर्घटना का कारण बन जाते हैं।इस बार तो सावन में ही बाढ़ नें प्रलय मचा रखी है।केरल तो लगभग तबाही के कगार पर पहुंच गया है।इन्द्र देवता कुपित होकर किसी भी राज्य में जलप्लावन की स्थिति ला सकने में पूर्ण रूप से सक्षम हैं।वैसे सालन मनभावन, सुहावन आदि संज्ञाओं से सुशोभित है।"तेरी दो टकियों की नौकरी मेरा लाखों का सावन जाय रे"।"दिल में आग लगाए सावन का महीना"।भादौं मास के बारे में अवश्य दो लोकोक्तियाँ प्रचलित हैं-----"भादौं चिरैय्या न वन छ्वाड़ै न बनजारा बनिज का जाय"।भादौं म सुआ उपासु करत है।भादौं बाढ़ के लिए भी माना जाता है।श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन बरसात का उल्लेख शास्त्रों में भी है।बरसात में दुर्घटनाओं में वृद्धि हो जाती है।सड़कों पर गड्ढे ही कारण बनते हैं दुर्घटनाओं के।

अतः योगी सरकार से निवेदन है कि गड्ढा मुक्त प्रदेश का प्रथम आदेश देने वाले योगीजी से निवेदन है कि बरसात रुकने के बाद पुनः प्रदेश की सड़कों के गड्ढा मुक्त का आदेश जारी करने की कृपा करें।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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