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प्रधानमंत्री जी की शहरी एवं ग्रामीण आवास योजनाएं।



प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी/ग्रामीण सरकार की एक बहुत ही शानदार, जानदार योजना है।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का सपना है कि 2022 तक भारत में कोई भी बिना घर का नहीं होगा।सबके पास अपना निजी भवन होगा।कोई भी छत विहीन नहीं होगा।शहरों और गांवो दोनो जगह बहुत से निर्धन परिवार ऐसे हैं जो झुग्गी झोपड़ी में ही अपनी सारी जिन्दगी गुजार देनें पर विवश हैं।दो जून की रोटी कमाने,परिवार चलाने भर की आय ही बमुश्किल जुटा पाते हैं।ऐसे गरीब परिवारों के सामनें इस मंहगाई के दौर में अपना मकान बनवा पाना किसी सपने से कम नहीं है।केन्द्र की मोदी सरकार ऐसे गरीब परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी/ग्रामीण लाकर इन गरीब परिवारों के लिए अवश्य ही सराहनीय कदम उठाया है।इसकी जितनी भी तारीफ की जाय कम है।अफसरशाही जरूर इस योजना में कहीं-कहीं भृष्टाचार को बढ़ावा दे रही है।पात्रों के चयन करनें में शहर/ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अनियमितता बरती जा रही है।सुपात्रों को इस योजना के लाभ से वंचित कर के कुपात्रों को चयनित किया जा रहा है।जो एक गलत परम्परा है।भाई-भतीजा वाद हावी हो रहा है।वोट की राजनीति की जा रही है।जिनके पास पक्के मकान हैं उन्हें भी लाभान्वित किया जा रहा है।चयनित सूची फाइनल होनें से पहले गहन जांच पड़ताल की आवश्यकता है।यदि गहन जांच पड़ताल होने के बाद ही सूची फाइनल की जाय तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2022 तक सबके आवास के सपने को साकार किया जा सकता है।

भृष्टाचार हमारे खून में रच-बस गया है रोम-रोम में भृष्टाचार की जड़ें जम चुकी हैं।हम सरकारी लाभ के मामले में पात्रों का हक मारने में जरा सा भी नहीं गुरेज़ कर रहे हैं।प्रधान/सभासद/नगरपालिका अध्यक्ष भी अपने चहेतों को ही लाभ पहुंचाने की चेष्टा में लगे रहते हैं।ग्राम सभा/नगर पंचायत/विधानसभा/लोकसभा सभी जगह केवल वोट बैंक और चहेतों को ही लाभान्वित करने की परिपाटी सी चल निकली है।अगर पारदर्शिता और ईमानदारी से काम किया जाय तो निःसंदेह यह योजना गरीबों के लिए एक शानदार और जानदार योजना है।


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