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बलात्कार की बढ़ती घटनाएं।



आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।

हम भारतीयों में भूलने की बहुत बुरी बीमारी है।बड़ी से बड़ी घटनाओं को भी हम कुछ दिन बाद भूल ही जाते हैं।हमारा जोश दूध के उबाल की तरह बहुत जल्दी आ भी जाता है और साबुन के झाग की तरह बहुत जल्दी बैठ भी जाता है।निर्भया बलात्कार के समय सारे देश में एक उबाल सा आ गया था।हर कोई आक्रोशित सा नजर आ रहा था।अभी कुछ साल ही बीते हैं और हम उस कांड को लगभग भूल से गये हैं।उस घटना के बाद सरकार भी चेती थी।कड़े से कड़े कानून बनाए गये परन्तू बलात्कार की घटनाओं में मामूली सी भी कमी नहीं आई है।आपरेशन शोहदा, एन्टी रोमियो दल बने कुछ दिन शोहदे भयभीत भी हुए।लेकिन फिर सब ठांय-ठांय फिस्स हो गया।हम फिर पुराने रास्ते पर चल निकले।बिहार के मुजफ्फरपुर और यू.पी.के देवरिया में बालिका संरक्षण गृह से नाबालिग लड़कियों को वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेलने के समाचार भी मिले हैं।डी.एम.को इधर से उधर और कुछ अधिकारियों के निलम्बन की कार्यवाही भी की गयी।कुछ दिन बाद इन घटनाओं को भी हम भूल जायेंगे।

पुराने जमाने में समाज ज्यादा टाइट था।हुक्का-पानी बन्द अर्थात सामाजिक बहिष्कार के डर से इक्का-दुक्का ही इस तरह की घटनाएं होती थी।आज समाज नाम की जैसे कोई चीज ही नहीं बची है।इसलिए सामाजिक बहिष्कार का डर लगभग समाप्त सा हो गया है।जिस कारण बलात्कारियों द्वारा बेकौफ होकर बलात्कार की घटनाएं अंजाम दी जा रही हैं।लड़कियों का घर से अकेले निकलना किसी जोखिम से कम नहीं है।किसके साथ कब कहाँ कौन सी घटना हो जाय कहा नहीं जा सकता है।शोहदे,गुण्डो, मवाली लोग जैसे अकेली लड़की की ताक में ही रहते हैं।मेरी निजी राय के अनुसार बलात्कारियों के माथे पर गोदना गुदवा देना चाहिए कि"मैं बलात्कारी हूँ।"जिससे इनसे लड़कियां सावधान हो सकें।और समाज में भी इनके प्रति सकारात्मक संदेश जायेगा।लोग बलात्कार जैसे कुकृत्य से बचने की कोशिश करेंगे।इसका एक बड़ा कारण संयुक्त परिवारों का टूटना भी है।एकल परिवार की परम्परा बढ़ सी रही है।संयुक्त परिवारों में बड़े बुजुर्गों द्वारा ऐसे कुकृत्यों से बचने की शिक्षा दी जाती थी।अब हर तरुण अपने को गुण्डा समझता है।कम उम्र में ही शराब, वाइन,रम का सेवन एक फैशन सा बनता जा रहा है।युवतियां भी इसमें पीछे नहीं हैं।गन्दी फिल्में,नेट आदि पर भी ऐसी चीजें परोसी जा रही हैं।जिसके कारण भी बलात्कार की घटनाओं में बाढ़ सी आ गई है।लचर सामाजिक ताने-बाने को पुनः सुदृढ किये जाने की जरुरत है वरना बलात्कार की घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।सरकार ने जब से बालिग लड़कियों को मनमानी शादी करने के अधिकार दे दिए हैं तबसे अन्तर्जातीय विवाह, लव मैरिज की घटनाओं में भी वृद्धि ही हुई है।इसके कारण ही आनर किलिंग की घटनाएं भी बढ़ी है।कुल मिलाकर हमारी पुरानी सामाजिक व्यवस्था ज्यादा सुदृढ थी तब इस तरह की घटनाएं लगभग शून्य के बराबर थी।कहने को तो हम ज्यादा शिक्षित हुए हैं।लेकिन बलात्कार जैसी हैवानियत की घटनाओं में बाढ़ सी आ गई है।आखिर यह कैसी शिक्षा?

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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