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देशभक्ति की भावना



वैसे तो हर भारतवासी में देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी है।लाखों क्रान्तिकारियों नें अपने प्राणों की आहुति देकर आजादी हासिल की है।हर भारतवासियों में देशप्रेम होना ही चाहिए।और है भी।15 अगस्त आने वाला है।देश पर प्राण न्यौछावर करने वाले हर जाने-अनजाने बलिदानियों को शत-शत नमन।आजादी यूँ ही नहीं मिल जाया करती है।इसके लिए देश पर मर मिटने की जरूरत होती है।हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमने वाले लाखों लोगों नें अपने प्राणों की बाजी लगा दी थी तब कहीं आजादी नसीब हुई थी।आजकल प्यार, मोहब्बत, गुण्डागर्दी की फिल्में तो ज्यादा बन रही हैं लेकिन देशभक्ति की फिल्मों,साहित्य का अकाल सा पड़ गया है।देशभक्ति के ऊपर जितनी भी फिल्में आज तक बनी हैं सुपर-डुपर हिट हुई हैं।फिर भी निर्माता निर्देशक पता नहीं क्यों ऐसी पटकथाएं नहीं लिख रहें हैं न ही ऐसी फिल्मों का निर्माण ही कर रहे हैं।देश के सच्चे सपूत जैसी किताबें भी पाठ्यक्रम से हटा दी गई हैं।जबकि ऐसी किताबों से छात्र-छात्राओं में देशभक्ति की भावना का जबरदस्त विकास होता है।लोगों में देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरे जानें की जरूरत है।क्रांतिकारियों, देश पर मर मिटने वाले नायकों की जीवनियां पाठ्यक्रमों में ज्यादा से ज्यादा होनी चाहिए ताकि छात्र-छात्राओं में उनकी यादें,कुर्बानियां अक्षुण्य हो सकें और उनसे छात्र-छात्राएं प्रेरणा ले सकें।केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ही ऐसा कार्य कर रहा है।कम से कम जिस गांव, नगर,क्षेत्र के क्रांतिकारियों नें प्राणों की आहुतियां दी हैं उनके गांवों,नगरों,क्षेत्रों में उनकी मूर्तियां, स्मारक अवश्य बनाए जानें की जरूरत है।ताकि,गांव,नगर,क्षेत्रवासियों के दिमागों में उनकी यादें ताजा और अक्षुण्य रह सकें और गर्व का अनुभव कर सकें।यहीं उनके प्रति आजाद भारत की सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

कहा गया था---शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले। मैं सरकार से पूछना चाहता हूँ कि----शहीदों की चिताओं पर लगेंगे किस बरस मेले।---------जय हिन्द, जय भारत, जय जवान,जय किसान।


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