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Showing posts from September, 2018

एशिया क्रिकेट कप 2018 का भारत 7वीं बार विजेता।

एशिया कप 2018 में टीम इंडिया क्रिकेट टीम अपराजेय बनकर उभरी है।टीम इंडिया ने सभी लीग मैचों और सुपर 4 से लेकर फाइनल तक अपराजेय रही है।केवल अफगानिस्तान से टाई खेला बाकी सभी एशियाई टीमों को पराजित किया।एशिया कप में 7 वीं बार टीम इंडिया ने इस टाइटिल को जीतनें में सफलता प्राप्त की है।टीम इंडिया ने 7वीं बार इस खिताब को जीतकर एशिया में क्रिकेट महाशक्ति होने का एहसास कराया है।टीम इंडिया ने यह साबित कर के दिखाया है कि बालिंग,बैटिंग, फील्डिंग तीनों क्षेत्रों में ओवर आल प्रदर्शन कर के क्रिकेट महाशक्ति होनें का गौरव हासिल हुआ है।फाइनल मुकाबले में बंग्लादेश नें 222 रन के छोटे टोटल का बहुत ही सफलतापूर्वक बचाव करने की सराहनीय कोशिश की और मुकाबला आखिरी गेंद तक ले गये,इसकी जितनी भी तारीफ की जाय कम है।लिट्टन दास नें 117 गेंदों में 12 चौके और 2 छक्कों की मदद से 122 रन की काबिल-ए-तारीफ पारी खेलकर सभी क्रिकेट प्रेमियों का भरपूर मनोरंजन किया।और बंग्लादेश नें क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीता केवल खिताब भारत नें जीता बंग्लादेश नें दूसरी एशियाई क्रिकेट महाशक्ति होने का गौरव हासिल किया।इससे पहले भी एशिया कप में ब…

एशिया 18 कप मे अफगानिस्तान का भारत के खिलाफ उम्दा प्रदर्शन।

एशिया कप 2018 में भारत बनाम अफगानिस्तान मैंच में "न्यू कमर"अफगानिस्तान मैच में अफगानिस्तान नें टाई खेलकर सभी क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीतनें में सफलता अर्जित की है।अफगानिस्तान ओपनर बल्लेबाज शहजाद नें भारत के खिलाफ शानदार शतक लगाकर पहले अफगान प्लेयर होने का गौरव हासिल किया।सम्भवतः टेस्ट प्लेइंग नेशन के खिलाफ पहला शतक होगा।बालिंग,बैटिंग, फील्डिंग सभी विभागों में अफगानिस्तान नें भारत को उन्हें हल्के मेंं लेने का सबक सिखाया।भारत नें उन्हें हल्के में लेनें की भूल की है।भारत नें अपनी "बेंच स्ट्रेन्थ"परखने की कोशिश की जो उन्हें भारी पड़ी।महेन्द्र सिंह धोनी को अपने 200 वें एक दिवसीय मैच में कप्तानी का तोहफा टाई के रूप में मिला।अपनें सभी प्रमुख गेंदबाजों,बल्लेबाजों को विश्राम देकर भारत नें काफी बड़ी भूल की है।जिसका खामियाजा टाई के रूप में मिला।अफगानिस्तान नें काफी सराहनीय योगदान दिया है।काबिल-ए-तारीफ प्रदर्शन करके भारत के मध्यक्रम के बल्लेबाजी पर सवालिया निशान लगा दिया है।भारत के टीम प्रबंधन को सोंचने के लिए अवश्य मजबूर कर दिया है।


बीमारियों की जड़ मक्खी, मच्छर और अशुद्ध पानी.....

हमारे देश में मच्छरों,मक्खियों,और अपेय जल के कारण ही बीमारियों की संख्या में खासी वृद्धि दर्ज हो रही है।रोग और रोगियों की संख्या का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है।मच्छर, मक्खी की समस्या का निदान स्वच्छता अपना कर कम किया जा सकता है।परन्तु अपेय जल की समस्या अपराजेय है।आम आदमी बोतल, आरो का पानी नहीं पी सकता।उसके लिए हैण्डपम्प ही पेयजल का एकमात्र सहारा होता है।हैण्डपम्प के पानी की गुणवत्ता पेय है अथवा अपेय लैब द्वारा जाँच करके/कराके जाना जा सकता है।सरकार से निवेदन है कि सरकारी धन से जुटाए गए सभी इण्डिया मार्का हैण्डपम्पों के पानी की जाँच करवा कर पेय/अपेय लिखवाने की कृपा करें मच्छरों के निदान के लिए नियमित फागिंग करवाने की कृपा करें।रोग,और रोगी दोनों की संख्या अपने आप घट जाएगी।किसान, मजदूर हांड़ तोड़ मेहनत करने के बाद चैन की नींद मच्छर रहित रात में सो तो सके।स्वच्छता के द्वारा मक्खियों की स्वतःसमाप्त हो जाएगी।मक्खी गंदे स्थानों मे ही बैठती है।अशुद्ध पानी ही अपराजेय समस्या है।इसका पता लगाकार जनता को जानकारी से अवगत कराने की ज्यादा जरूरत है।जब खान-पान दुरुस्त होगा तो स्वास्थ्य ठीक होगा।आदमियों की सम…

राम तेरी गंगा मैली हो गयी..........

भगीरथ के भागीरथी प्रयास से साठ हजार सगर पुत्रों अर्थात अपनें पुरखों को तारनें के लिए "माँ गंगा" को धरा पर अवतरित करवाया था।तबसे अब तक माँ गंगा पापियों के पाप धोती चली आ रही हैं।संस्कृत भाषा में एक लाइन है----"गंगाजले कीटाणवःन जायन्ते"अर्थात गंगाजल में कीड़े नहीं पड़ते।कारण यह है कि गंगाजल में गन्धक की प्रचुरता पाई जाती है।यहीं इसी कारण से मात्र गंगा स्नान से ही दाद,खाज,खुजली दूर हो जाती है।गंगा का महात्म्य में कहा गया है---"गंगा-गंगा जो नर करहीं। भूखा-नंगा कबहूँ न रहहीं।।" "पूर्व जन्म के पुण्य जब जागत।तबहिं ध्यान गंगा मा लागत।।"गंगाजल में अनेकों औषधीय गुण पाए जाते हैं।जैसे नहाने से त्वचा रोग समाप्त हो जाते हैं।पीने से कृमि नष्ट हो जाते हैं।पापनाशिनी, मोक्षदायिनी तो हैं ही माँ गंगा।"जहां गंगा तहां झाऊ।जहां पण्डित तहांं नाऊ।"गंगा के किनारे औषधीय गुणों से भरपूर झाऊ का पेड़ बहुतायत से पाया जाता है।गंगा रेती अर्थात रेणुका और गंगाजल हर पूजा पाठ में आवश्यक होता है। अदूरदर्शिता का परिचय देते हुए पहले सरकार ने गंगा के किनारे चमड़ा उद्योगों के कारख…

पुराने बीजो का संरक्षण

नये खाद्यान्न बीजों या शंकर बीजों के आगमन के साथ खाद्यान्नों का उत्पादन अवश्य बढ़ा है।जिसके लिए हमारे कृषि वैज्ञानिक अवश्य ही बधाई के हकदार हैं।आज हम सवा अरब से अधिक लोगों को भरपेट भोजन देनें के अलावा निर्यात भी कर रहे हैं।जिस कारण हमें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिक अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष प्राप्त हो रहा है।लेकिन भारतीय किसानों द्वारा अन्धाधुंध यूरिया और अन्य उर्वरकों तथा कीटनाशकों के प्रयोग के कारण कुछ देशों का बासमती चावल के आर्डर वापस लेना पड़ा है।जिसके कारण हमें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी उठानी पड़ी है।जो अवश्य ही चिन्ता का विषय है।कृषि वैज्ञानिकों द्वारा मृदा जांच द्वारा किसानों को प्रशिक्षित कर आवश्यक रसायनों के प्रयोगों के लिए किसानों को प्रशिक्षित किए जानें की आवश्यकता है।     हमारे पुराने जमाने के किसानों द्वारा पुराने बीजों एवं गोबर की खाद तथा खली से उत्पादित खाद्यान्नों एवं सब्जियों में जो गजब का स्वाद एवं सुगंध मिलती थी वह अब नये बीजों एवं उर्वरकों एवं कीटनाशकों से उत्पादित खाद्यान्नों एवं सब्जियों में नहीं पाई जाती है।वह स्वाद,सोंधापन, सुगंध अब धीरे-धीरे गायब होती …

एशिया कप मे श्रीलंका क्रिकेट टीम का खराब प्रदर्शन

विश्व क्रिकेट की लगभग सभी क्रिकेट खेलने वाले देशों की टीमों में विश्व कप के मद्देनज़र परिवर्तन का दौर जारी है।सभी क्रिकेट खेलनें वाले देशों में परिवर्तन के तौर पर युवा शक्ति को स्थान दिया जा रहा है।युवाओं के हाथ में ही क्रिकेट का भविष्य सुरक्षित माना जा रहा है।2019 में क्रिकेट का महाकुंभ अर्थात क्रिकेट विश्व कप खेला जाना तय है।इसी के मद्देनजर सभी क्रिकेट खेलनें वाले देश अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं।एशिया कप में 50-50 ओवर का क्रिकेट खेला जा रहा है।सबसे पहले बाहर होनें वालों में 5 बार की एशिया कप जीतने वाली श्रीलंका क्रिकेट टीम है।जब से जयवर्धने, संगकारा जैसे क्रिकेटरों नें संयास लिया है।श्रीलंका क्रिकेट टीम इंडिया उबर नहीं पा रही है।बंग्लादेश के हाथों 137 रन से हार तथा नवस्थापित अफगानिस्तान के हाथों 91 रन की हार के साथ श्रीलंका क्रिकेट टीम सुपर फोर में भी स्थान बना पानें में असफल साबित होकर अपने पहले चरण से ही बाहर होने की कगार पर है।श्रीलंका क्रिकेट टीम का यह सबसे बुरा प्रदर्शन कहा जा सकता है।बालिंग,बैटिंग,फील्डिंग तीनों क्षेत्रों में लचर प्रदर्शन जारी है।श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को …

भारत मे पशुधन की दयनीय दशा।

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।भारत का नाम जनधन के हिसाब से विश्व में दूसरे नं.पर है।परन्तु पशुधन की गणना के हिसाब से भारत विश्व में पहले नं.पर है।पशुधन में विश्व में पहले नं.पर होनें के कारणवश ही भारत का चमड़ा उद्योग भी काफी उन्नति पर है।जूतों के निर्यात से बड़ी मात्रा में राजस्व की वृद्धि होती है।भारत में गाय को माता तथा बैल को शंकर जी के वाहन अर्थात नन्दी का गौरव प्राप्त है।भैंस को महिषासुर की बहिनी तथा भैंसा को यमराज के वाहन के रूप में मान्यता प्राप्त है।दुग्ध उद्योग किसानों का सहायक उद्योग कहा जाता है।हम प्रतिव्यक्ति औसत दूध में भले ही पीछे हों परन्तु पशुधन में सबसे आगे हैं।दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने के कारण ही हम प्रतिव्यक्ति दूध में हम पीछे चले जाते हैं।भारत के अन्य राज्यों की तुलना में भारत का ह्रदय कहे जाने वाले राज्य उत्तर प्रदेश में लोगों की मानसिकता कुछ जरूर बदली है।वर्तमान"योगी सरकार"द्वारा गोवंशीय पशुओं के वध पर रोंक लग जानें के कारण गोवंशीय पशुओं को सड़कों पर छुट्टा छोंड़ देनें की प्रवृति का एक ट्रेण्ड सा चल ने कला हैं।यहीं कारण है कि सड़कों और गा…

भारतीय क्रिकेटर : भारत मे शेर विदेशों मे ढेर

बी.सी.सी.आई.दुनिया का सबसे धनी क्रिकेट संघ है।भारत में क्रिकेट इस कदर लोकप्रिय है कि इतनी लोकप्रियता राष्ट्रीय खेल हाकी को भी नहीं हासिल है।निःसंदेह कागजों पर टीम इंडिया काफी मजबूत मानी जाती है।नं.एक टेस्ट क्रिकेट में है।वनडे का विश्व कप खिताब दो बार तथा 20-20का भी विश्व कप खिताब एक बार जीत चुकी है।आज भी विराट कोहली विश्व के नं.एक बल्लेबाज हैं।लेकिन भारतीय प्राय दीप के बाहर विदेशी क्रिकेट "नेशन्स" में अर्थात विदेशी सरजमीं पर क्रिकेट श्रंखलाएं जीतनें का रिकॉर्ड कभी अच्छा नहीं रह है।विराट कोहली की कप्तानी में लोगों को इस बार सिरीज़ जीतने का ज्यादा भरोसा था।मौजूदा भारत V/S इंग्लैंड क्रिकेट श्रंखला 2018 में कोहली के प्रदर्शन को छोंड़ दिया जाय तो किसी बल्लेबाज का प्रदर्शन अच्छा नहीं कहा जा सकता।हाँ गेंदबाजों का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है।केवल हम 20-20श्रंखला ही जीतनें में कामयाब रहे । बाकी इंग्लैंड नें जबरदस्त वापसी करते हुए बुरी तरीके से वनडे और टेस्ट श्रंखलाओं में मात दी है।बी.सी.सी.आई खिलाडियों के चयन में हुई चूक पर मंथन परअवश्य करेगी।टीम प्रबंधन पर प्रश्नचिन्ह ज्यादा लगे हैं करु…

भारतीय रेलवे मे जनरल डिब्बे

आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।भारत देश एक विशाल देश है।अविभाजित भारत तो इससे भी विशाल था।विभाजित होनें के बाद भी जनसंख्या के हिसाब से विश्व में चीन के बाद दूसरे नम्बर पर है।भारतीय रेलवे कर्मचारियों के हिसाब से विश्व का सबसे बड़ा विभाग है।अगर भारतीय अर्थव्यवस्था में भारतीय रेलवे के योगदान को रीढ़ की हड्डी कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।भारतीय रेलवे आमदनी और रेलवे विस्तार में नई रेलगाड़ी चलाता ही रहता है।लम्बी दूरी की रेलगाड़ियों में सामान्य डिब्बों की संख्या काफी कम रहती है।यात्रियों को भूसे की तरह भर कर सफर तय करना पड़ता है।कांग्रेस के प्रसिद्ध नेता श्री शशि थरूर जी नें कभी भारतीय रेल को "कैटिल कोच"कहा था।वैसे यह नेताजी विवादित बयानों के लिए जानें भी जाते हैं।आमदनी बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे यदि लम्बी दूरी की रेलगाड़ियों में जनरल डिब्बों की संख्या बढ़ा दे तथा टिकट काउंटरों की संख्या में वृद्धि कर दे तो आमदनी बढ़ाने में जरूर सहायक सिद्ध होगा।काफी यात्री टिकट समय पर न मिल पाने के कारण छूट जाते हैं।कुछ यात्री केवल भूसे की तरह भरी भीड़ के कारण भी बसों आदि में यात्रा करने के लिए विवश हो …

सड़क हादसो मे गढ्ढों की भूमिका यू0पी0 सबसे आगे ।

उत्तर प्रदेश को भारत का ह्रदय कहा जाता है।यह भारत का सबसे बड़ा प्रदेश कहा जाता है।यह राम,कृष्ण भगवान की जन्मभूमि भी है।दिल्ली सरकार का रास्ता उत्तर प्रदेश से ही होकर जाता है।जनसंख्या के हिसाब से यह पाकिस्तान से भी बड़ा है।दो-तीन प्रधानमंत्रियों को छोड़कर सभी प्रधानमंत्रियों का इस प्रदेश से गहरा नाता रहा है।अभी हाल ही में समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर में एक सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर कहा गया है कि भारत में सड़कों पर बने गड्ढों के जानलेवा होनें में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है।दूसरे नम्बर पर महाराष्ट्र और तीसरे नम्बर पर मध्यप्रदेश है।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ"योगी"नें पदभार ग्रहण करने के साथ पहला आदेश गड्ढा मुक्त उत्तर प्रदेश का ही आदेश दिया था।साल भर बाद ही उक्त सर्वे नें गड्ढा मुक्त उत्तर प्रदेश के दावे की हवा निकाल कर रख दी है।अब बरसात समाप्त होने के तुरंत बाद योगी सरकार को वास्तव में सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के अभियान पर लग जानें की जरूरत है।आखिर कब तक यह गड्ढे लोगों की जान लेते रहेंगे?इस प्रकार के दावे गड्ढा मुक्त यू.पी.के दावे पर जरूर प्रश्न चिन्ह लगा रहे ह…

भूमि आबंटन मे रिश्वत का खेल, सरकार फेल

कहने को सरकार बदली लेकिन भूमि आबंटन में ग्राम प्रधान, लेखपालों, उपजिलाधिकारियों द्वारा रिश्वत और ऊँची पहुंच और रिश्वत रानी की कृपा से पुराना खेल जारी है।कहने को भूमिहीनों के नाम पर भू -आबंटन में किसी भी ग्राम सभा में वास्तविक भूमिहीनों को कभी भी कोई भी भूमि आबंटित नहीं की गयी है।वास्तविक भूमिहीन रिश्वत कभी दे ही नहीं पाता है और कभी भूमि भी नहीं पाता है।ग्राम प्रधान और लेखपालों की मिलीभगत से ऊँची दर पर रिश्वत लेकर फर्जी भूमिहीनों को भूमि आबंटन का ऊँचा खेल खेला जाता है।पिता के जीवित होनें की दशा में पुत्रों के नाम जमीन आ ही नहीं सकती है।ऐसे ही पुत्रों को फर्जी तरीके से भूमिहीन बनाकर रिश्वत रानी की कृपा से भूमि आबंटित की जा रही है।लोग अपनी पैत्रक जमीन एक बीघा 10-12 लाख में बेंचकर 60000-70000 हजार ग्राम प्रधान को देकर पुनः एक बीघा जमीन आबंटन प्राप्त कर लेते हैं।10-11 लाख भी सुरक्षित कर लेते हैं और पुनः उतने ही रकबे खेत के मालिक बन जाते हैं।इस खेल में ऊपर से नीचे तक सबका हिस्सा शामिल होता है।फिर किसी प्रकार की जाँच की आँच का कोई डर कैसा ?जिन-जिन ग्राम सभा में भूमि आबंटन चल रहा है लगभग सभी…