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भारतीय क्रिकेटर : भारत मे शेर विदेशों मे ढेर



बी.सी.सी.आई.दुनिया का सबसे धनी क्रिकेट संघ है।भारत में क्रिकेट इस कदर लोकप्रिय है कि इतनी लोकप्रियता राष्ट्रीय खेल हाकी को भी नहीं हासिल है।निःसंदेह कागजों पर टीम इंडिया काफी मजबूत मानी जाती है।नं.एक टेस्ट क्रिकेट में है।वनडे का विश्व कप खिताब दो बार तथा 20-20का भी विश्व कप खिताब एक बार जीत चुकी है।आज भी विराट कोहली विश्व के नं.एक बल्लेबाज हैं।लेकिन भारतीय प्राय दीप के बाहर विदेशी क्रिकेट "नेशन्स" में अर्थात विदेशी सरजमीं पर क्रिकेट श्रंखलाएं जीतनें का रिकॉर्ड कभी अच्छा नहीं रह है।विराट कोहली की कप्तानी में लोगों को इस बार सिरीज़ जीतने का ज्यादा भरोसा था।मौजूदा भारत V/S इंग्लैंड क्रिकेट श्रंखला 2018 में कोहली के प्रदर्शन को छोंड़ दिया जाय तो किसी बल्लेबाज का प्रदर्शन अच्छा नहीं कहा जा सकता।हाँ गेंदबाजों का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है।केवल हम 20-20श्रंखला ही जीतनें में कामयाब रहे । बाकी इंग्लैंड नें जबरदस्त वापसी करते हुए बुरी तरीके से वनडे और टेस्ट श्रंखलाओं में मात दी है।बी.सी.सी.आई खिलाडियों के चयन में हुई चूक पर मंथन परअवश्य करेगी।टीम प्रबंधन पर प्रश्नचिन्ह ज्यादा लगे हैं करुण नायर तिहरा शतक धारी को आजमाया जा सकता था।4-1 की हार टेस्ट क्रिकेट में बड़ी हार मानी जाती है जो आज चौथे दिन के खेल के बाद अवश्यम्भभावी लग रही है।अंतिम पांचवे टेस्ट में परिवर्तन स्वरूप रवीन्द्र जड़ेजा और हनुमा विहारी को खेलनें का मौका मिला रवीन्द्र जड़ेजा का प्रदर्शन काबिल-ए-तारीफ रहा।पहली पारी में सर्वाधिक नाबाद 86 रन व 4विकेट।हनुमा बिहारी नें भी अपनें प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय टेस्ट मैच 56 रन और 3 विकेट लेकर अपनें आप को आलराउंडर के रूप में स्थापित किया है और अमिट छाप छोड़ी है।पृथ्वी शा,करुण नायर हनुमा विहारी तीनों को पहल2 मैच हारनें के तुरंत बाद ही किए जाने की जरुरत थी।भारतीय टीम प्रबंधन नें भारी चूक एकादश खिलाड़ी चुननें में की है।मैनेजर श्री रवि शास्त्री जी को और कप्तान विराट कोहली जी को लेनी चाहिए।विश्व के नं.रहे गेंदबाज रवीन्द्र जड़ेजा और नं. दो गेंदबाज रविचन्द्रन अश्विन के साथ इस श्रंखला में नाइंसाफी हुई है।इन दोनों खिलाड़ियों के साथ बी.सी.सी.आई.नें भी नाइंसाफ़ी की है।कहीं नं.एक और दो दोनों को एक साथ केवल चहल,कुलदीप यादव चाइनामैन बालर को आजमाने के लिए विश्राम देते देखा है।माना आपकी चहल,कुलदीप नामक मिसाइलों ने कुछ मैचों में धमाल मचा दिया हो लेकिन निरंतरता का अभाव है।विश्व क्रिकेट के नं.एक दो गेदबाजों का एक साथ विश्राम देना कहीं से भी उचित नहीं ठहराया जा सकता है।यह इन दोनों खिलाड़ियों के साथ नाइंसाफी है।अभी इनमें काफी क्रिकेट बाकी है जो यह अपने निरंतर प्रदर्शन से साबित कर रहे हैं।बी.सी.सी.आई.की गुटबाजी उभर कर आ रही है।बी.सी.सी.आई और कप्तान विराट कोहली के बीच सामंजस्य ठीक से बैठता नहीं दिख रहा है।खिलाड़ियों के चयन और एकादश में चयन दोनों में चूक हुई है।दोनों को हार की नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।हमारे यहाँ प्रतिभावान खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है।एक -एक क्रम पर खेलनें वालों की कतार मौजूद है कठिन प्रतियोगिता है।टीम इंडिया ओपनिंग जोड़ी को लेकर लगातार जूझ रही थी फिर भी पृथ्वी शा को लगातार नजरअंदाज किया गया।

टीम इंडिया को विदेशी सरजमीं पर हारने के रिकॉर्ड में सुधार करने की जरूरत है।

            "युद्ध में यदि नित्य ही मिलती रहे यदि हार।तो धिक्कार है, धिक्कार है,धिक्कार है,धिक्कार।।"


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