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पुराने बीजो का संरक्षण



नये खाद्यान्न बीजों या शंकर बीजों के आगमन के साथ खाद्यान्नों का उत्पादन अवश्य बढ़ा है।जिसके लिए हमारे कृषि वैज्ञानिक अवश्य ही बधाई के हकदार हैं।आज हम सवा अरब से अधिक लोगों को भरपेट भोजन देनें के अलावा निर्यात भी कर रहे हैं।जिस कारण हमें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिक अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष प्राप्त हो रहा है।लेकिन भारतीय किसानों द्वारा अन्धाधुंध यूरिया और अन्य उर्वरकों तथा कीटनाशकों के प्रयोग के कारण कुछ देशों का बासमती चावल के आर्डर वापस लेना पड़ा है।जिसके कारण हमें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी उठानी पड़ी है।जो अवश्य ही चिन्ता का विषय है।कृषि वैज्ञानिकों द्वारा मृदा जांच द्वारा किसानों को प्रशिक्षित कर आवश्यक रसायनों के प्रयोगों के लिए किसानों को प्रशिक्षित किए जानें की आवश्यकता है।

     हमारे पुराने जमाने के किसानों द्वारा पुराने बीजों एवं गोबर की खाद तथा खली से उत्पादित खाद्यान्नों एवं सब्जियों में जो गजब का स्वाद एवं सुगंध मिलती थी वह अब नये बीजों एवं उर्वरकों एवं कीटनाशकों से उत्पादित खाद्यान्नों एवं सब्जियों में नहीं पाई जाती है।वह स्वाद,सोंधापन, सुगंध अब धीरे-धीरे गायब होती जा रही है।इसका कारण कृषि वैज्ञानिकों द्वारा यह बताया जा रहा है कि उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अन्धाधुंध प्रयोग के कारण मिट्टी में सुगंध देनें वाले जीन का नष्ट होना है।पुराने बीजों से उत्पादित फसलें कम जरूर होती थी परन्तु उनमें स्वाद और सुगंध गजब की होती थी।वह स्वाद और सुगंध अब गायब होती जा रही है।खाद्यान्नों, सब्जियों के अतिरिक्त देशी घी की खुश्बू और स्वाद भी अछूता नहीं रहा है।उपलों और कन्डों द्वारा पकाए गये दूध से निर्मित देशी घी में स्वाद और सुगंध दोनों ज्यादा होते थे।

अतः सरकार से निवेदन है कि पुराने बीजों को संरक्षित करने की कृपा करें।कहीं वह स्वाद और खुश्बू से परिपूर्ण बीज नष्ट व विलुप्त न हो जांय।आज सभी ओर देशी सब्जियों और खाद्यान्नों की मांग बढ़ी है।परन्तु वह पुराने देशी बीज ही उपलब्ध नहीं हैं।आज भी लोग "बादशाह पसन्द"चावल की मांग करते हैं।परन्तु वह खुश्बू दार बादशाह पसंद चावल लापता है।बादशाह पसंद चावल की खासियत यह थी कि पड़ोसी के घर भी पकनें पर आसपास इतनी खुश्बू फैल जाती थी कि अड़ोस--पड़ोस के लोगों को पता चल जाता था कि अमुक आदमी के यहां "बादशाह पसंद"चावल पक रहा है।ऐसे करामाती बीजों के संरक्षण की आवश्यकता है।

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