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मृदा स्वास्थ्य कार्ड़



मृदा स्वास्थ्य कार्ड सरकार की किसानों के हित के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है।मृदा परीक्षण के द्वारा किसानों के अंधाधुंध यूरिया के उपयोग पर अंकुश लगाकर जमीन के लिए उपयोगी अन्य आवश्यक उर्वरकों के उपयोग से किसानों की उपज और आय दोनों को दोगुनी किया जा सकता है।पंजाब और अन्य राज्यों के जागरूक किसान इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।और अपनी कृषि उपज में वृद्धि कर रहे हैं।यूरिया के अंधाधुंध उपयोग पर प्रभावी अंकुश भी लगा है।जमीन में कमी वाले पोषक तत्वों के उपयोग से कृषि उपज भी बढ़ा रहे हैं।जिससे जमीन के स्वास्थ्य में सुधार करने में सफल भी हो रहे हैं।

हमारे प्रदेश उत्तर प्रदेश में अभी इस योजना नें जन्म ही नहीं लिया है।यदि किसी जिले में जन्म भी हुआ है तो यह योजना अपने शैशवावस्था में ही है।गंगा-जमुना के उपजाऊ क्षेत्र में यदि ईमानदारी से मृदा स्वास्थ्य परीक्षण करके कृषि वैज्ञानिकों द्वारा आवश्यक और जरूरी पोषक तत्वों की जानकारी किसानों को दें तो निःसंदेह दूसरी हरित क्रांति लाकर किसानों की उपज और आमदनी दोगुना की जा सकती है।और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के सपनों को साकार किया जा सकता है।पश्चिमी उत्तर प्रदेश का किसान तो ज्यादा जागरूक है परन्तु इसकी तुलना में पूर्वी उत्तर प्रदेश का किसान कम जागरूक है।वह मृदा स्वास्थ्य परीक्षण करवाने विकास खण्ड में जाता ही नहीं है।और यूरिया, डी.ए.पी.उर्वरक के अलावा किसी अन्य पोषक तत्वों का ज्ञान और भान भी नहीं है।कृषि सुरक्षा इकाई अथवा कृषि वैज्ञानिक भी किसानों को जागरूक करने का कोई अभियान भी नहीं चलाते हैं।उदासीनता का आलम यह है कि अपने कार्यालय में बैठे-बैठे ही बिना मृदा परीक्षण के ही मृदा स्वास्थ्य कार्ड बना रहे हैं।अव्वल नं.तो अभी किसी किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित ही नहीं किए गए हैं और अगर किसी किसान को मिला भी होगा तो बिना मृदा परीक्षण के ही मिला होगा।ऐसे में कैसे कृषि उपज और किसानों की आय दोगुना किया जा सकता है।

अतः सरकार से निवेदन है कि सभी जिलों के जिला कृषि अधिकारियों को निर्देशित करनें की कृपा करें कि हर खेत पर जाकर या किसानों से खेतों की मिट्टी मंगवाकर ईमानदारी से मृदा परीक्षण कर किसानों को आवश्यक और उपयोगी उर्वरकों के प्रयोग हेतु जागरूक और प्रेरित करने की कृपा करें ताकि किसानों की उपज और आय दोनों दोगुना किया जा सके।और यूरिया और डी.ए.पी.के अंधाधुंध उपयोग पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।जमीन के स्वास्थ्य में आवश्यक पोषक तत्वों के द्वारा जमीन की उर्वरा शक्ति तथा स्वास्थ्य में सुधार लाकर किसानों की दशा और दिशा में सुधार लाया जा सके।

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