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भूमि आबंटन मे रिश्वत का खेल, सरकार फेल



कहने को सरकार बदली लेकिन भूमि आबंटन में ग्राम प्रधान, लेखपालों, उपजिलाधिकारियों द्वारा रिश्वत और ऊँची पहुंच और रिश्वत रानी की कृपा से पुराना खेल जारी है।कहने को भूमिहीनों के नाम पर भू -आबंटन में किसी भी ग्राम सभा में वास्तविक भूमिहीनों को कभी भी कोई भी भूमि आबंटित नहीं की गयी है।वास्तविक भूमिहीन रिश्वत कभी दे ही नहीं पाता है और कभी भूमि भी नहीं पाता है।ग्राम प्रधान और लेखपालों की मिलीभगत से ऊँची दर पर रिश्वत लेकर फर्जी भूमिहीनों को भूमि आबंटन का ऊँचा खेल खेला जाता है।पिता के जीवित होनें की दशा में पुत्रों के नाम जमीन आ ही नहीं सकती है।ऐसे ही पुत्रों को फर्जी तरीके से भूमिहीन बनाकर रिश्वत रानी की कृपा से भूमि आबंटित की जा रही है।लोग अपनी पैत्रक जमीन एक बीघा 10-12 लाख में बेंचकर 60000-70000 हजार ग्राम प्रधान को देकर पुनः एक बीघा जमीन आबंटन प्राप्त कर लेते हैं।10-11 लाख भी सुरक्षित कर लेते हैं और पुनः उतने ही रकबे खेत के मालिक बन जाते हैं।इस खेल में ऊपर से नीचे तक सबका हिस्सा शामिल होता है।फिर किसी प्रकार की जाँच की आँच का कोई डर कैसा ?जिन-जिन ग्राम सभा में भूमि आबंटन चल रहा है लगभग सभी ग्राम पंचायतों का एक जैसा ही हाल है।किसी भी ग्राम सभा की जाँच करवा ली जाय वास्तविक भूमिहीन भूमि आबंटन में कभी भी आबंटन प्राप्त नहीं करता है।

अतः सरकार से निवेदन है कि जिस किसी ग्राम सभा में भूमि आबंटन की कार्यवाही चल रही हो आबंटन प्राप्त करने वाले लाभार्थी के पिता की कृषि जोत की इंतखाब की जाँच करवाने की कृपा करें वास्तविक स्थिति अपने आप सामने आ जाएगी।सम्बंधित ग्राम सभा के ग्राम प्रधान और लेखपालों की आय से अधिक सम्पत्ति की जाँच करवाने की कृपा करें तस्वीर अपने आप साफ हो जायेगी।सरकारी जमीन को कौड़ियों के दाम प्राप्त कर अपनी जमीन को बाजार दर पर बेंचकर भारी मुनाफा कमाया जा रहा है।इस खेल में बड़े-बड़े मठाधीश शामिल हैं।गरीबों और भूमिहीनों के नाम पर भारी कमाई की जा रही है।वास्तविक गरीब और भूमिहीन आबंटन प्राप्त करने में सर्वथा विफल है।ऊँची पहुंच और रिश्वत देने वाला ही आबंटन प्राप्त करने में सफल होता है।


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