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भारतीय रेलवे मे जनरल डिब्बे



आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।

भारत देश एक विशाल देश है।अविभाजित भारत तो इससे भी विशाल था।विभाजित होनें के बाद भी जनसंख्या के हिसाब से विश्व में चीन के बाद दूसरे नम्बर पर है।भारतीय रेलवे कर्मचारियों के हिसाब से विश्व का सबसे बड़ा विभाग है।अगर भारतीय अर्थव्यवस्था में भारतीय रेलवे के योगदान को रीढ़ की हड्डी कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।

भारतीय रेलवे आमदनी और रेलवे विस्तार में नई रेलगाड़ी चलाता ही रहता है।लम्बी दूरी की रेलगाड़ियों में सामान्य डिब्बों की संख्या काफी कम रहती है।यात्रियों को भूसे की तरह भर कर सफर तय करना पड़ता है।कांग्रेस के प्रसिद्ध नेता श्री शशि थरूर जी नें कभी भारतीय रेल को "कैटिल कोच"कहा था।वैसे यह नेताजी विवादित बयानों के लिए जानें भी जाते हैं।आमदनी बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे यदि लम्बी दूरी की रेलगाड़ियों में जनरल डिब्बों की संख्या बढ़ा दे तथा टिकट काउंटरों की संख्या में वृद्धि कर दे तो आमदनी बढ़ाने में जरूर सहायक सिद्ध होगा।काफी यात्री टिकट समय पर न मिल पाने के कारण छूट जाते हैं।कुछ यात्री केवल भूसे की तरह भरी भीड़ के कारण भी बसों आदि में यात्रा करने के लिए विवश हो जाते हैं।यात्रियों को भी यात्रा करने में सुगमता हो जायेगी और दमघोंटू भीड़ से भी छुटकारा मिल जायेगा।जनरल डिब्बों की कमी के कारण ही यह सब कष्ट यात्रियों को झेलनें पड़ते हैं।भारत देश में मध्यम आय वालों की संख्या ही सर्वाधिक है।मध्यम वर्ग ,निम्न आय वर्ग के लोगों को ही सर्वाधिक कष्ट रेलवे यात्रा में भोगने पड़ते हैं।नई रेल चलाने में सरकार का और रेल विभाग का खर्च भी ज्यादा हो जाता है।जनरल डिब्बे और टिकट काउंटर बढ़ाने में खर्च भी कम होगा और आय निश्चित रूप से दोगुनी हो जाएगी।यात्रियों को भी सुविधा पूर्वक यात्रा करनें को मिलेगी।

अतः केन्द्र सरकार और रेलवे विभाग से निवेदन है कि आय और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सभी रेलगाड़ियों में जनरल डिब्बों तथा टिकट काउंटरों की संख्या बढ़ानें पर विचार किए जाने की महती आवश्यकता है।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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