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[ 14 ] भारत वर्ष मे मेला संस्कृति

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भारत वर्ष मे मेला संस्कृति 
      नवरात्रि पर्व के साथ ही दशहरा मेला के साथ ही जाड़े के मौसम में सारे भारत वर्ष में मेला संस्कृति का उदय हो जाता है।लगभग सभी गांवों, कस्बों,नगरों में मेला लगनें शुरू हो जाते हैं।मेला का शाब्दिक अर्थ ही मेल-मिलाप अर्थात मेल जोल ही है।पुराने साथी मित्र लोग मेला के बहाने मिल-जुल जाते हैं।कभी तुलसीदास जी ने अपनी नाटक मण्डली के माध्यम से रामलीला का देश में घूम-घूम कर मंचन करके लोकप्रियता हासिल की थी।आज रामायण, धनुषयज्ञ इतनी लोकप्रियता अर्जित कर ली है कि लगभग देश के हर हिस्से में इसका मंचन भिन्न-भिन्न बोली भाषा में इसका मंचन होते देखा जा सकता है।राम की अगाध श्रद्धा, भक्ति और अनुराग के कारण ही लोगों का सहज जुड़ाव के कारण मेला और रामलीला में भारी भीड़ देखी जा सकती है।हिमांचल प्रदेश के कुल्लू-मनाली का दशहरा मेला तथा मैसूर का दशहरा मेला विश्व प्रसिद्ध है।दूर देशों से श्रद्धालु, पर्यटक धार्मिक श्रद्धा और विश्वास के साथ दशहरा मेला में शामिल होने के लिए यहां आते हैं।एक महीनें का दशहरा कुल्लू और मनाली में मनाया जाता है।भारत में मेला संस्कृति की विरासत की पूँजी बड़ी सुदृढ है।अब तो लोन मेला,कृषि मेला आदि भी मेला की तर्ज पर लगने शुरू हो गये हैं।कुल्लू दशहरा मेला की खास बात यह है कि रावण शंकर जी का खास चेला होने के कारण शंकर जी की ससुराल हिमांचल प्रदेश में रावण,कुम्भकर्ण, मेघनाद के पुतले नहीं जलाए जाते हैं।"खुद पंचानन, पुत्र षड़ानन, चेला खास दशानन।।"अर्थात खुद शंकर जी पंचानन हैं,पुत्र षड़ानन छःसिर वाले तथा चेला दशानन दस सिर वाला था।
हम कह सकते हैं कि भारत में मेला संस्कृति हमें विरासत में मिली है।जो कि काफी सुदृढ है।
                                                                                      प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
                                                             आइना    
      रवि की अभी नई नई शादी हुई थी | उसे दहेज में चारपहिया गाडी मिली है | अपनी नई नवेली दुल्हन प्रिया को , शादी के दूसरे दिन ही दहेज मे मिली नई चमाचमाती गाड़ी से , शाम को रवि लॉन्ग ड्राइव पर लेकर निकला ! वह गाड़ी बहुत तेज भगा रहा था साथ ही उसने स्टीरियो भी बहुत तेज आवाज में बजा रखा था  , प्रिया को किसी दुर्घटना का संकेत उसकी छठी इन्द्री दे रही सो उसने उसे ऐसा करने से मना किया तथा धीमे से गाडी चलाने की बात कही | इस पर वह बोला-अरे जानेमन ! कम से आज तो मुझे रोको मत , मजे लेने दो , आज तक तो मैंने केवल दोस्तों की गाड़ी चलाई है , आज अपनी गाड़ी चला रहा हूँ , आज मेरी सालों की तमन्ना पूरी हुई है | मैं तो इतनी मँहगी गाडी खरीदने की सोच भी नही सकता था |  इसीलिए मैंने तुम्हारे डैडी से शादी में इस गाड़ी मांग करी थी !
        प्रिया बोली :- अच्छा , म्यूजिक तो कम रहने दो मुझे इतना तेज आवाज पसंद नहीं है  ....आवाज तो कम कर लो परन्तु रवि ने उसकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया |इस बातचीत के दौरान रवि ने अपने आप को थोड़ा असहज किया ही था कि उसका ध्यान थोड़ा भंग हुआ | इसी बीच प्रिया कुछ और बोल पाती कि ,तभी अचानक गाड़ी के आगे एक भिखारी आ गया |  बडी मुश्किल से ब्रेक लगाते तथा पूरी गाड़ी घुमाते रवि ने बड़ी मुश्किल से उस भिखारी को बचा पाया , मगर तुरंत उसको गाली देकर बोला-अबे मरेगा क्या भिखारी साले ,सेल आँखे फूटी है क्या ? दिखाई नहीं देता है क्या ,  देश को बरबाद करके रखा है तुम लोगों ने | तब तक प्रिया गाड़ी से निकलकर उस भिखारी तक पहुंची तो देखा तो बेचारा वह एक अपाहिज था | उससे माफी मांगते हुए ,पर्स से 100रू निकाला , उसे देकरवह उससे बोली-माफ करना काका वो हम बातों मे........आपको कही चोट तो नहीं आई ? ये लीजिए हमारी नई नई शादी हुई है  इससे मिठाई खाइएगा ओर आशीर्वाद  दीजिएगा |  इतना कहकर उसे साइड में फुटपाथ पर ले जाकर बिठा दिया, भिखारी दुआएं देने लगा | जब लौटकर प्रिया गाड़ी मे वापस बैठी ,  रवि बोला :- तुम जैसों की वजह से इनकी हिम्मत बढती है इन भिखमंगो की ,तुम्हे इसतरह से  भिखारी को मुंह नही लगाना चाहिए था | 
         प्रिया मुसकुराते हुए बोली - रवि , भिखारी तो अपाहिज और मजबूर था , इसीलिए भीख मांग रहा था वरना लोग तो सबकुछ सही होते हुए भी  भीख मांगते हैं , दहेज लेकर |  जानते हो खून पसीना मिला होता है गरीब लड़की के माँ - बाप का इस दहेज मे |  ओर लोग....  तुमने भी तो पापा से गाड़ी मांगी थी , तो कौन भिखारी हुआ ?? वो मजबूर अपाहिज या ..?? .
      एक बाप अपने जिगर के टुकड़े को २० सालों तक संभालकर रखता है तथा दूसरे को दान करता है , जिसे कन्यादान या यूँ कह लो "महादान" तक कहा जाता है,  ताकि दूसरे का परिवार चल सके उसका वंश बढे और किसी की नई गृहस्थी शुरू हो , उसपर दहेज मांगना भीख नही तो क्या है ? अब बोलो ..? कौन भिखारी हुआ वह मजबूर या तुम जैसे दूल्हे ....| रवि को कोई उत्तर नहीं सूझ रहा था ,वह एकदम खामोश नीची नजरें किए शर्मिंदगी से सब सुनता रहा | क्योंकि....
प्रिया की बातों से पडे तमाचे ने उसे बता दिया था , कि कौन है सचमुच का भिखारी है .....

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                                                                                                                   आप का दोस्त
                                                                                                                       

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