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भारतीय तीज त्योहारों मे वैज्ञानिकता
          भारत हमेशा से ही ऋषि, मुनि,मनीषी,विद्वानों का देश रहा है।समय-समय पर एक से बढ़कर एक ऋषि, मुनि और विद्वानों ने समाज का मार्गदर्शन किया है।जब-जब समाज अपने कर्तव्य पथ से विमुख हुआ है साधु,संतों नें आगे बढ़कर समाज को सही मार्गदर्शन की राह दिखाई है।
तीज,त्यौहारों के रूप में हम जो भी तीज,त्यौहार मनाते हैं सभी का अपना अलग वैज्ञानिक महत्व है।राष्ट्रीय पर्व के रूप में 15 अगस्त,26 जनवरी,2अक्टूबर के रूप में सारा देश हर्षोल्लास से देशभक्ति की भावना से मनाता है।सामाजिक पर्वों में हमारे हिन्दू समाज में अनेकों पर्व मनाये जाते हैं।यथा--रक्षाबंधन, नागपञ्चमी, होली आदि।धार्मिक पर्वों में होली,दीपावली, बुराई पर अच्छाई की जीत का तथा विजयदशमी  का त्यौहार भी विजय के प्रतीक का पर्व है,जिसे दशहरा पर्व के नाम से भी जानते हैं।हर गांव,कस्बे और शहरों में बुराई का प्रतीक रावण का पुतला दहन किया जाता है। नवदुर्गा पर्व नवरात्रि से दशहरा तक हम बड़े धार्मिक उल्लास के माहौल मे मनाते हैं।सभी धर्म और जाति के लोग प्रत्येक व्यक्ति मिलजुल कर गंगा-जमुनी तहजीब से सभी त्यौहारों को सदियों से मिल जल मनाते चले आ रहे हैं।होलिका दहन से सभी प्रकार के कीटाणु, जीवाणु जल कर भस्म हो जाते हैं।गर्मी ऋतु की शुरुआत हो जाती है।रावण का पुतला दहन के बाद भी जाड़े की शुरुआत हो जाती है।सभी बुरे कीटाणु, जीवाणु आदि होलिका की आग में जल कर भस्म हो जाते हैं।शेष बचे  हानिकारक तत्व जाड़े की सर्दी में मर जाते हैं | बरसात में कई प्रकार के विषैले जीव-जन्तु वह विकसित होते हैं जिनसे छुटकारा मिल जाता है।हमारे ज्ञानी, ध्यानी पूर्वजों ने खूब सोंच-समझ कर त्यौहारों में क्या-क्या भोजन बनाना चाहिए, विस्तृत उल्लेख किया है।हर प्रकार के नियम उप नियम बनाए थे।सबके पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक कारण छिपा हुआ है।किस मौसम या ऋतु में क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए विस्तृत उल्लेख किया है।वैज्ञानिक कारणों को ध्यान में रखकर ही सभी तीज,त्यौहारों को मनाने का विधान बताया गया है।निःसंदेह हम कह सकते हैं कि हमारे पूर्वजों के पास ज्ञान और वैज्ञानिकता की विशाल पूँजी थी।
                                      प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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