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मानवता की मिशाल

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  मानवता की मिशाल 

                          सी 0 ओ 0 ने सैलरी से खर्च उठाकर दो बच्चियों का कराया इलाज, बच गईं दोनों जिंदगियां
चंदौली. सकलडीहा सीओ त्रिपुरारी पाण्डेय ने इंसानियत की मिसाल कायम की है। 3 सितंबर को जन्माष्टमी के दिन नरैना गांव में देर शाम दो बच्चियां 5 वर्षीय अंजना और 6 वर्षीय अंतिमा सामान लेने दुकान पर जा रही थी। तभी एक अनियंत्रित बाइक सवार ने दोनों को जोरदार टक्कर मार दी। मौके पर पहुंचे सीओ त्रिपुरारी पांडेय ने दोनों को जिला अस्पताल में एडमिट कराया। जहां से दोनों बीएचयू ट्रामा रेफर कर दी गयी। सीओ त्रिपुरारी पाण्डेय ने अपनी सैलरी से बच्चियों के इलाज में 1 लाख 12 हजार रुपए खर्च किए। 
सीओ ने सिपाही के जरिए परिजनों के भेजा अपना एटीएम: अब दोनों बच्चियां वाराणसी बीएचयू ट्रामा सेंटर से डिस्चार्ज होकर अपने घर लौटी आई हैं। अंतिमा के पिता सियाराम ने बताया उसका अमाशय पेट से बाहर निकल गया था और ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने बच्ची को बचाया। मैं मजदूरी करके परिवार का खर्च उठाता हूं। मेरे पास इतने रुपए नहीं थे कि इलाज करा सकता। सीओ ने मदद की और उन्होंने अपना एटीएम दे दिया था। बोले थे दोनों के इलाज के लिए जीतने पैसे की जरूरत हो निकाल लेना।
त्रिपुरारी पांडे ने कपड़े से अंतिमा के अमाशय को बांधा था: सीओ त्रिपुरारी पांडेय ने बताया जिंदगी बचाना हम सभी का दायित्व है। पुलिस की छवि लोगो में ठीक नहीं, इसलिए प्रयास भले को लेकर होना चाहिए। घटना जन्माष्टमी को हुई थी तो मन में था किसी का आंगन सुना न हो। 

                                                                    गिरीश कोपरगोयनर
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                   बाबाओं के रूप अनेक 

      बाबा असली, नकली,फसली,कतली चार प्रकार के होते हैं।असली सिद्ध,बाबा,संत महात्मा तो हिमाचल की कन्दराओं में ही पाये जाते हैं।इनका दीन,दुनिया, दौलत से कोई खास मतलब नहीं होता है।यह केवल मानवता के कल्याण से ही मतलब रखते हैं।नकली बाबा यत्र-तत्र- सर्वत्र पाये जाते हैं।झाड़-फूंक के नाम पर भोली-भाली ग्रामीण जनता को फंसाकर धन दोहन इनका मुख्य लक्ष्य होता है।लड़कियों को झूठी बीमारी बताकर बलात्कार भी करते हैं।आशाराम बापू,रामरहीम आदि इसी श्रेणी के बाबा हैं।फसली बाबा किसानों की फसल कटनें पर झोला डंडा लेकर निकल पड़ते है।यह केवल अनाज उगाही का काम करते हैं।शाम को अन्न बेंचकर शराब पीकर शेष अन्न लेकरभोले भाले किसानों को बेवकूफ बनाकर  घर चले जाते हैं।कतली बाबा दिनभर गांव घूमकर घरों की निशान देही करते हैं।रात में डकैती डालकर लूट मार करके चलते बनते हैं।यह घुमंतू प्रजाति के होते हैं।यह संगठित गिरोह वाले होते हैं।बलात्कार,कत्ल,इनके मुख्य धंधे होते हैं।
अतः लोगों से निवेदन हैकि ऐसे बाबाओं के चक्कर में न पड़ें।
                                                                                                      धन्यवाद। 

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