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विवेक हत्याकांड पर जनमानस का आक्रोश

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विवेक हत्याकांड पर जनमानस का आक्रोश

आइये एक मुहिम चलायें : लखनऊ के स्व. विवेक तिवारी हत्याकांड पर रोटी सेंकने के लिये सभी दलों ने बेशर्मी की हदें पर कर दीं । किन्तु एक पहलू अनछुआ रह गया। क्या उस मल्टीनेशनल कम्पनी की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती जो कर्मचारियों से आधी रात तक काम करवाती हैं। अभी तक ऐप्पल कम्पनी की और से कोई बयान नहीं आया कि वो स्व. विवेक तिवारी के परिवार को क्या सहायता/ क्षतिपुर्ति दे रहे हैं। अपने नये मोबाईल की लॉन्चिंग के लिए कम्पनी ने उन्हें इतनी रात तक ऑफिस में रोका था इसलिए उनकी भी कुछ जिम्मेदारी बनती है। राजनीति से हटकर जरा सोचिए देर रात मे जब भी देश के किसी राज्य मे ऐसी घटनाएं घटती है हमेशा वहां की सरकार से क्षतिपुर्ति की मांग की जाती है। आइये एक मुहिम चलायें कि ऐसे मामलों में कम्पनी को भी कंपनसेशन देना होगा ताकि बच्चों को देर रात तक ऑफिस में रोकने से पहले बेलगाम कंपनियां कम से कम एक बार तो सोचेंगी। मैं मांग करता हूं कि मल्टीनेशनल कम्पनी ऐप्पल भी श्री तिवारी के परिवार को सम्मानजनक मुआवजा दे। कृपया इस पोस्ट को इतना शेयर करें कि उसकी गूंज अमेरिका में बैठे इस कंपनी के आला अफसरों के कानों तक पहुंच जाये।
                                                              " फेसबुक के पेज से "
उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा फर्जी इनकाउन्टर में मारे गये विवेक तिवारी के परिवार के साथ मेरी पूरी संवेदना है,उ प्र सरकार द्वारा उनके परिवार को जो भी सहायता रशि तथा सरकारी नौकरी दी गई है मुझे उससे कोई लेना देना नही है। सरकार को सभी के साथ यही व्यवहार करना ही चाहिए,किन्तु जिस तत्परता के साथ प्रदेश सरकार ने 40 लाख रु मुआवजा तथा पत्नी को अफसर ग्रेड की  सरकारी नौकरी दे दी है , इस प्रकरण से कई सवाल उतपन्न हो गये है जैसे-
1- स्व विवेक तिवारी की पत्नी को उ प्र सरकार ने आनन फानन मे 40 लाख रु की भारी भरकम धनराशि तथा सरकारी नौकरी क्या ब्रहामण होने के कारण दे दी गई है?
विवेक तिवारी सरकारी नौकरी नही कर रहे थे तो फिर पत्नी को अफसर ग्रेड़ की सरकारी नौकरी क्यो दी गई?
2- वर्तमान सरकार के डेढ़ साल के कार्यकाल में कई फर्जी इनकाउन्टर किए गये और सिद्ध भी हुए, लेकिन उन लोगों के परिवारी जनों को सकरकारी नौकरी तथा मुआवजा क्यों नही दिया गया? क्या वो लोग दलित/ओबीसी/मुसलिम थे क्या इसलिए पारिवारिक क्षतिपूर्ति नही दी गई?
3- प्रदेश सरकार के डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में कई दलित/ओबीसी वर्ग के अधिकारी/कर्मचारियों की सवर्ण अधिकारी/कर्मचारियों के द्वारा प्रताडि़त किए जाने के कारण जान चली गई ,किन्तु उनके परिवार को कोई भी मुआवजा क्यों नही दिया गया?
4- सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी एसटी एक्ट खत्म करने के विरोध में दलितो द्वारा दिनांक 02 सितमबर 2018 को किए गये "भारत बंद" के दौरान तथाकथित सवर्णो तथा पुलिस की गोली से मारे गये दलित लोगो व युवाओं के परिवारी जनों को भाजपा सरकारों ने एक भी रुपये का मुआवजा/सहायता राशि क्यों नही दी?
यह प्रकरण देश के एससी, एसटी, ओबीसी तथा अल्पसंख्यक वर्ग के साथ जबर्दस्त भेदभाव को दर्शाता है
उपर्युक्त सवालों से एक बात तो तय हो गई है कि वर्तमान सरकार पूरी तरह सवर्ण ( ब्रहामण ठाकुर बनिया ) हित में काम कर रही है। भाजपा सरकार  एससी, एसटी, ओबीसी को मंदिर व हिन्दू के नाम पर गुमराह करके सिर्फ वोट लेना जानती है किन्तु उनके हित में काम करना नही जानती है।
                                                    " फेसबुक से ; -रमेशकुमार वर्मा "

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