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वन्यजीव संरक्ष्ण और लोगों का पशु पक्षी प्रेम

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वन्यजीव संरक्ष्ण  और लोगों का पशु पक्षी प्रेम 
      भारत देश एक विशाल देश है।यदि वृहत्तर भारत की कल्पना की जाय तो भारत देश की तुलना किसी महाद्वीप के समतुल्य होगी।यह राम,कृष्ण की धरती है।यहाँ पृकृति ने भरपूर ढंग से भारत माता का श्रंगार किया है।यहां गोलकुंडा की खान से निकला एक कोहिनूर हीरा को खरीदने के लिए सारी दुनिया की दौलत कम पड़ गई थी।यहां ब्लैक डायमंड यानि कोयला के विपुल भंडार ,वनक्षेत्र, जंगली जीवों,पशूओं,पक्षियों के कलरव,कोयल की मधुर तान,मोरों का मनोहर नाच यहाँ पृकृति नें वन्य सम्पदा देनें में कोई कन्जूसी नहीं की है।अब जिम्मेदारी हमारी सरकारों की है कि वन,वन्य जीवों के संरक्षण की है।वन सम्पदा का दोहन बड़ी तेजी से हो रहा है।सरकारी भूमि का अतिक्रमण अब एक फैशन सा चल निकला है।यह सब हमारी सरकारों की उदासीनता के कारण ही सम्भव है।ऐसा नहीं है कि सरकार के पास आंकड़े नहीं उपलब्ध हैं।सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के बल पर ही भूमाफिया, जंगल माफिया, जंगली जानवरों के शिकारी, खाल-बाल के सौदागर सभी के धंधे फल फूल रहे हैं।अब सरकार के सामनें पर्यावरण का संकट आन खड़ा हुआ तो सरकार को वृक्षारोपण का ख्याल आया।भारत के पास अकूत वन सम्पदा थी।जमीन बढ़ती नहीं परिवार बढ़ रहे हैं 40 बीघा जमीन वाले परिवारों के बच्चे आज बंटवारा स्वरूप 2बीघा काश्त भी बहुत मानी जा रही है।बाग खेत बन चुके हैं।अब केवल और केवल वन और वन्यजीवों के संरक्षण का समय आ गया है।
लोगों का पशु और पक्षियों के प्रति प्रेम
सनातन काल से मानवों और पशु-पक्षियों का प्रेम चला आ रहा है।पालतू पशु और पालतू पक्षियों की गणना करने के लिए सरकार नें जल्द ही फरमान जारी किया है।जिससे जंगली पशु-पक्षियों और पालतू पशु-पक्षियों में भेद किया जा सके।यह सरकार का देर से लिया गया दुरुस्त फैसला है।मानव और मानव प्रेम से ओत-प्रोत प्रकृति  प्रेमी लोग पशुओं को भी यथावत प्रेम करते रहे हैं।कुत्ता मनुष्य का सनातन पुराना वफादार माना जाता रहा है।गाय,भैंस,बैल,बिल्ली,घोड़ा,हाथी,ऊंट भी पालतू पशुओं की श्रेणी में आता है।तोता,मैना,मोर आदि पालतू पक्षियों की श्रेणी में आते हैं।किसानों का सहायक उद्योग पशुपालन और दुग्ध उत्पादन रहा है।पशुधन से किसानों को अतिरिक्त आय की प्राप्ति होती है।पशु शक्ति के बल पर ही किसान धरती का सीना चीर कर कठिन परिश्रम से सवा अरब जनसंख्या का पेट भरता है।शास्त्रों में भी पालतू पशुओं का उल्लेख मिलता है।मनुष्य का पशु प्रेम बहुत पुराना है।पशुओं से मानव का बहुत पुराना नाता रहा है।बिना पशुओं के कृषि की कल्पना भी निरर्थक है।पशु मनुष्यों की उन्नति में एक सहायक कड़ी रहा है।सम्भवतःकुत्ता मनुष्य का सबसे पुराना और वफादार साथी रहा है।
अब सरकार से निवेदन है कि वन्यजीवों के संरक्षण करने की जरूरत है।वन और वन्यजीवों के संरक्षण की जरूरत है।जब वन ही नहीं रहेंगे तो वन्यजीवों की कल्पना ही बेमानी है
                                                        प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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