Skip to main content

ویوک قتل عام پر عوامی رائے کی تیاری

gsirg.com                                                                                                 helpir.blogspot.com


ویوک قتل عام پر عوامی رائے کی تیاری


        آو ایک مہم چلائیں: لکھنؤ کا خود. صوابدید تیواری قتل پر روٹی سینکنے کے لئے تمام جماعتوں نے بے شرمی کی حدیں پر کر دیں. لیکن ایک پہلو ناگزیر رہے. کیا اس ملٹی نیشنل کمپنی کی کوئی ذمہ داری نہیں بنتی جو ملازمین سے آدھی رات تک کام کرواتی ہیں. اب تک ایپل کمپنی سے کوئی بیان نہیں ہے جو خود ہی. ویوک تیاری کے خاندان کو مدد / نقصانات دی جا رہی ہیں. اپنے نئے موبائیل کی لانچنگ کے لئے کمپنی نے انہیں اتنی رات تک آفس میں روکا تھا اس لئے ان کی بھی کچھ ذمہ داری بنتی ہے. سیاست سے ہٹ کر ذرا سوچئے دیر رات میں جب بھی ملک کے کسی ریاست میں ایسے واقعات گھٹتی ہے ہمیشہ وہاں کی حکومت سے كشتپرت کا مطالبہ کیا جاتا ہے. آئیے ایک مہم آن کہ ایسے معاملات میں کمپنی کو بھی كپنسےشن دے گا تاکہ بچوں کو دیر رات تک آفس میں روکنے سے پہلے بے لگام کمپنیاں کم از کم ایک بار تو سوچےگي. میں مطالبہ کرتا ہوں کہ ملٹی نیشنل کمپنی ایپل بھی مسٹر تیواری کے خاندان کو باعزت معاوضہ دے. براہ مہربانی اس پوسٹ کو اتنا شیئر کریں کہ اس گونج امریکہ میں بیٹھے اس کمپنی کے اعلی افسروں کے کانوں تک پہنچ جائے.

                                                              "فیس بک کے صفحے سے"

اتر پردیش پولیس کی طرف سے فرضی انكانٹر میں مارے گئے صوابدید تیواری کے خاندان کے ساتھ میری پوری تعزیت ہے، شمال سوال حکومت کی طرف سے ان کے خاندان کو جو بھی مدد رش اور سرکاری نوکری دی گئی ہے مجھے اس سے کوئی لینا دینا نہیں ہے. حکومت کو سب کے ساتھ یہی برتاؤ کرنا چاہیے، لیکن جس تیاری کے ساتھ ریاستی حکومت نے 40 لاکھ روپے معاوضہ اور بیوی کو افسر گریڈ کی سرکاری نوکری دی، اس معاملے سے کئی سوال اتپنن ہوگئے ہے جیسے-

1- خود صوابدید تیواری کی بیوی کو شمال سوال حکومت نے آنا فانا میں 40 لاکھ روپے کی بھاری بھرکم فنڈز اور سرکاری نوکری کیا برهام ہونے کی وجہ سے دے دی گئی ہے؟

صوابدید تیواری سرکاری نوکری نہیں کر رہے تھے تو پھر بیوی کو افسر گرےڑ کی سرکاری نوکری کیوں دی گئی؟

2- موجودہ حکومت کے ڈیڑھ سال کی مدت میں کئی فرضی انكانٹر کئے گئے اور ثابت بھی ہوئے، لیکن ان کے پرواري جنوں کو سكركاري کام اور معاوضہ کیوں نہیں دیا گیا؟ چاہے وہ دلت / او سی بی / مسلم تھے، کیوں خاندان خسارے کو نہیں دیا گیا تھا؟

3- ریاستی حکومت کے ڈیڑھ سال کی مدت کار میں بہت دلت / او بی سی طبقہ کے افسر / ملازمین کی اعلی ذات افسر / عملے کی طرف پرتاڈ़ت کئے جانے کی وجہ سے جان چلی گئی، لیکن ان کے خاندان کو کوئی معاوضہ کیوں نہیں دیا گیا؟

4- سپریم کورٹ کی طرف سے ایس سی ایس ٹی ایکٹ ختم کرنے کی مخالفت میں دلتو طرف تاریخ 02 ستمبر 2018 کو کئے گئے "بھارت بند" کے دوران نام نہاد سورو اور پولیس کی گولی سے ہلاک دلت لوگو اور نوجوانوں کے پرواري جنوں کو بی جے پی حکومتوں نے ایک بھی روپے کے لئے معاوضہ / امداد کی رقم کیوں نہیں ملی؟

اس کیس ملک کے ایس سی، ایس ٹی، او بی سی اور اقلیتی طبقے کے ساتھ زبردست امتیاز کی عکاسی کرتا ہے

مندرجہ بالا سوالات میں سے ایک بات تو طے ہو گئی ہے کہ موجودہ حکومت مکمل طور اونچی ذات (برهام ٹھاکر بنیا) مفاد میں کام کر رہی ہے. بی جے پی حکومت ایس سی، ایس ٹی، او بی سی کو مندر اور ہندو کے نام پر گمراہ کرکے صرف ووٹ لینا جانتی ہے لیکن ان کے مفاد میں کام کرنا نہیں جانتی ہے.

                                                    "فیس بک سے؛ رمیش کمار ورما"

Comments

Popular posts from this blog

[ q/9 ] Tratamentul; O alternativă unică la sterilizare

web - gsirg.com

 Tratamentul; O alternativă unică la sterilizare

 Fiecare creatură din lume care a venit în această lume, el a câștigat definitiv copilarie, adolescenta, maturitate si batranete | Dintre acestea, dacă părăsim copilăria, atunci în fiecare etapă a vieții, fiecare creatură suferă de dorința sexuală. Cu excepția unui om determinat generație apel la alte creaturi, dar omul este o ființă care, în 12 luni ale anului, 365 de zile, 24 de ore, poate cicălitoare sex în orice moment | Cea mai dificilă sarcină a ființelor umane în această lume este să câștige "Cupid". Fiecare bărbat și femeie din această lume este absorbit de toți muncitorii și începe să facă nenorociri teribile în această lume. Se estimează că doar 70% din criminalitatea mondială este legată de acest lucru.


 Libido o tulburare puternică


  Cauza nașterii diferitelor tipuri de infracțiuni este dorința. Femeile și bărbații care suferă de această dorință sexuală nu ezită să facă diferite tipuri de crime în ac…

कबिरा शिक्षा जगत् मा भाँति भाँति के लोग।।भाग दो।।

प्रिय पाठक गणों आपने " कबीरा शिक्षा जगत मां भाँति भाँति के लोग ( भाग-एक ) में पढ़ा कि श्रीमती रामदुलारी तालुकेदारिया इण्टर कालेज सेंहगौ रायबरेली की प्रधानाचार्या, प्रबंधक, लिपिकों आदि के द्वारा किस प्रकार शिक्षा सत्र 2015--16 तथा शिक्षा सत्र2014--15 मे किस प्रकार लगभग उन्यासी छात्रों को फर्जी ढ़ंग से प्रवेश दिलाया गया । बाद मे इन्हीं छात्रों को अगले वर्ष इण्टर कक्षा की परीक्षा दिला दी गई। इसके लिए फर्जी कक्षा 12ब3 बनाई गई। बाकायदा फर्जी छात्रों का उपस्थिति रजिस्टर भी बनाया गया। परन्तु सभी छात्रों से प्रथम तथा द्वितीय वर्ष की कक्षाओं मे निर्धारित विद्यालय फीस लेने के बावजूद भी इसका विद्यालय के रजिस्टर पर इन्दराज नही किया गया। यह अनुमानित फीस लगभग साढ़े चार लाख रुपये के आसपास थी जिसे उपरोक्त अधिकारियों / विद्यालय के शिक्षा माफियाओं द्वारा अपहृत / गवन कर लिया hi गया। यथोचित कार्रवाई हेतु इस सम्पूर्ण विवरण को प्रार्थना पत्र मे लिखकर अपर सचिव के क्षेत्रीय कार्यालय इलाहाबाद को दिनाँक 25 /05 2016 को भेजा गया।
अब हम आपको इसके शर्मनाक पात्रों का परिचय करवा देते हैं।
       😢शर्मनाक…

पुराने बीजो का संरक्षण

नये खाद्यान्न बीजों या शंकर बीजों के आगमन के साथ खाद्यान्नों का उत्पादन अवश्य बढ़ा है।जिसके लिए हमारे कृषि वैज्ञानिक अवश्य ही बधाई के हकदार हैं।आज हम सवा अरब से अधिक लोगों को भरपेट भोजन देनें के अलावा निर्यात भी कर रहे हैं।जिस कारण हमें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिक अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष प्राप्त हो रहा है।लेकिन भारतीय किसानों द्वारा अन्धाधुंध यूरिया और अन्य उर्वरकों तथा कीटनाशकों के प्रयोग के कारण कुछ देशों का बासमती चावल के आर्डर वापस लेना पड़ा है।जिसके कारण हमें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी उठानी पड़ी है।जो अवश्य ही चिन्ता का विषय है।कृषि वैज्ञानिकों द्वारा मृदा जांच द्वारा किसानों को प्रशिक्षित कर आवश्यक रसायनों के प्रयोगों के लिए किसानों को प्रशिक्षित किए जानें की आवश्यकता है।     हमारे पुराने जमाने के किसानों द्वारा पुराने बीजों एवं गोबर की खाद तथा खली से उत्पादित खाद्यान्नों एवं सब्जियों में जो गजब का स्वाद एवं सुगंध मिलती थी वह अब नये बीजों एवं उर्वरकों एवं कीटनाशकों से उत्पादित खाद्यान्नों एवं सब्जियों में नहीं पाई जाती है।वह स्वाद,सोंधापन, सुगंध अब धीरे-धीरे गायब होती …