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नारी शिक्षा पर बल



आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।

आज की नारी सभी क्षेत्रों में पुरुषों से आगे निकलने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है।आज नारी पुरुषों से कन्धा से कन्धा मिलाकर कदमताल कर रही है।नारी हवाई जहाज, लड़ाकू विमानों, रेलगाड़ी, मिलिट्री फोर्स आदि मैदानों में सफलतापूर्वक हर सर्विस कर रही है।पुरुषों से किसी भी मामले में पीछे नहीं है।आजादी की लड़ाई में भी नारी शक्ति नें अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।रानी लक्ष्मीबाई, दुर्गा भाभीजी, झलकारी बाई, रानी दुर्गा वती आदि रूपों में अपनी नारी शक्ति का लोहा मनवाया है।अगर यह कहा जाय कि पुरुषों से आगे थी तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।डाक्टर, इन्जीनियर, सिविल सर्विसेज में भी अपनी नारी शक्ति की अमिट छाप छोड़ रही है।अब वह घूंघट, परदे से बाहर निकल कर सफलता के झंडे गाड़ रही है।"नारी निन्दा ना करो,नारी नर की खान।नारी से सुत होत हैं,ध्रुव, प्रहलाद समान।"

अब भी सरकार के लाख प्रयासों के बाद भी नारी शक्ति का एक बड़ा हिस्सा प्राथमिक शिक्षा से भी वंचित है।सरकार के"बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ"योजना लागू होनें के बावजूद नारी शक्ति को शिक्षा अथवा उच्च शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है।पुरुष प्रधान समाज होने के कारण नारी अपना यथोचित स्थान पाने में विफल है।जबकि अपनी मेधा,प्रतिभा का लोहा मनवाने में अवश्य सफल रही है।पता नहीं धार्मिक कारण या किसी अन्य कारण से लोग आज भी एक अदद पुत्र पाने की अभिलाषा में पुत्रियों का गर्भ में ही गला घोंटनें से नहीं बाज आ रहे हैं।इसी मानसिकता के चलते किसी-किसी राज्य में लिंगानुपात बिल्कुल गड़बड़ा सा गया है।लोगों की केवल यह मानसिकता कि चिता में आग लगाने,गया करने का काम केवल पुत्र ही करेगा।बंश बेल बढ़ने की आशा भी केवल पुत्र ही पूरा करेगा।दहेज दानव भी पुत्रियों के गर्भपात का एक बड़ा कारण रहा है।समाज में बलात्कार आदि की घटनाएं भी नारी शिक्षा अथवा उच्च शिक्षा में बड़ी बाधा बने हुए हैं।सरकार की इतनी सख्ती और सुविधाओं के बावजूद भी नारी आज उचित स्थान और उचित सम्मान के लिए जद्दोजहद कर रही है।नारी को आज कागजों में भले ही बराबरी का दर्जा प्राप्त है।लेकिन वास्तविकता में असमानता का ही सामना करना पड़ रहा है।शिक्षा में यदि बराबरी का दर्जा मिले तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि नारी शक्ति पुरुषों से एक कदम आगे रहेगी।जरूरत केवल सरकार और समाज दोनों से है कि नारी शक्ति को पुरुषों के समान ही शिक्षा-दीक्षा की व्यवस्था करने की है।देश की कुल आबादी में 50% हिस्सेदारी महिलाओं की है तो पुरुषों के समान ही शिक्षा का अवसर मिलना ही चाहिए।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

Comments

  1. एक नहीं दो-दो मात्राएं नर से भारी नारी

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