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रामलला तिरपालों मे



आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।

दुनिया के सबसे बड़े जज राजा "श्री राम चन्द्र"जी महाराज दशरथ नन्दन, अयोध्या नरेश"रघुराई"आजकल अखबारों की सुर्खियां बनें हुए हैं।जब-जब लोकसभा चुनाव अथवा यू.पी.के विधानसभा चुनाव नजदीक आने होते हैं तो रामलला के चर्चे अचानक तेज हो जाया करते हैं।सभी पार्टियों के नेताओं को रामलला की याद सताने लगती है।नेताओं को रामलला अचानक याद आने लगते हैं।दुनिया की सबसे बड़ी अदालत के जज श्री राम जी आज भारत के सर्वोच्च न्यायालय के जेरे समात हैं।जो आजकल इनके केस की सुनवाई कर रहे हैं उनको भी मरणोपरांत श्री राम की अदालत में ही अपने केस की सुनवाई हेतु जाना ही है।वहां जज भी श्री राम ही हैं वकील भी श्री राम ही हैं और वहां कोई भी अपील नहीं होती है।हिन्दुस्तान में हिन्दू बहुसंख्यक होते हुए इनके आराध्य देव श्री राम को ही अदालत की सुनवाई हेतु प्रस्तुत होना पड़ा है।---"राम झरोखे बैठि कै सबका मुजरा लेंय।जिसकी जैसी चाकरी उसको उतना देंय।।"राजा श्री राम चन्द्र जी महराज"को अपनी राज्य अयोध्या में ही पिछले 25-26 सालों से तिरपालों में रहने को विवश होना पड़ रहा है।यह अदालत में न्याय का मुद्दा नहीं वरन् लोगों की आस्था से जुड़ा मुद्दा है।इसका समाधान सर्वोच्च न्यायालय को आस्था ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।

    सभी पार्टियों के नेताओं से निवेदन है कि सबके आराध्य देव श्री राम को केन्द्र में रखकर राजनीति नहीं करनी चाहिए।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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