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डाक विभाग से आम आदमी परेशान



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डाक विभाग से आम आदमी परेशान
डाक विभाग एक जिम्मेदार, भरोसेमंद, ईमानदार विभाग माना जाता है।अंग्रेजी सरकार से अब तक इस विभाग में एक पैसे की भी गड़बड़ी ढूंढने में भले ही सरकार के लाखों रुपए बरबाद हो जाएं लेकिन उस गड़बड़ी को करने वाले कर्मचारी की नौकरी खतरे में पड़ जाती है।अनियमितता चाहे एक रुपए की हो चाहे एक लाख की गबन ही कहा जाएगा।
  यहाँ बात अनियमिता की नहीं लिपिकीय त्रुटि की है। सेहगों रायबरेली उ०प्र० के उप डाकघर में K.V.P. के परिपक्वता के समय किसान मेच्योरिटी धनराशि लेनें उप डाकघर सेहगों जाता है तो उपडाकपाल द्वारा यह कहा जाता है कि रायबरेली में फीड ही नहीं है भुगतान नहीं किया जा सकता।आखिर यह डाक विभाग की लिपिकीय त्रुटि नहीं तो और क्या है ?क्या किसान की जिम्मेदारी डाक विभाग के अभिलेखों को फीड कराने की है? किसान को बेवजह परेशान किया जाता है। या तो अभिलेखों को फीड करवाते समय का उपडाकपाल कम्प्यूटर ज्ञान का अल्प प्रशिक्षित था या फिर वर्तमान उपडाकपाल अल्प प्रशिक्षित कम्प्यूटर ज्ञानी है।हर दशा में दोष डाक विभाग का ही है।किसान को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।लेकिन भुगतान में भुगतना किसान को ही पड़ रहा है। इस तरह के प्रकरण से निश्चित रूप से डाक विभाग की साख और विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।किसान को यह कह कर समझाया जा रहा है कि ब्याज तो मिलेगा ही जाकर रायबरेली से फीड करवा लाओ।
अतः डाक विभाग के आला अधिकारियों से निवेदन है कि अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए त्रुटि की जिम्मेदारी लेकिन लेते हुए भूल सुधार करके किसानों को स्थलीय भुगतान की व्यवस्था करके किसानों को होने वाले कष्टों से बचाने की कृपा करें।
प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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