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[ k14 ] हृदय रोग सरल तथा चमत्कारिक औषधि [ भाग दो ]




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[ k ]  हृदय रोग  सरल तथा चमत्कारिक औषधि [ भाग दो  ]


इलाज का दूसरा चरण

यदि आपके आसपास कहीं बाजार लगता हो तो वहां से पर्याप्त मात्रा में लौकी खरीद कर ले आयें इसके साथ ही बाजार से एक '' जूसर '' भी ले आए बाजारों मे सीजन पर पर्याप्त मात्रा में लौकी उपलब्ध होती है अगर लौकी का सीजन न हो तो बाजार से लौकी के बीज लाकर उन्हें गमलों में लगा दें जिससे आपको कभी भी लौकी की कमी न हो अब प्रतिदिन प्रातः काल नाश्ते से 50 मिनट पहले लौकी के ताजे रस की 50 मिलीलीटर मात्रा लेकर प्रतिदिन लौकी का जूस पीना शुरू कर दे | [ अगर आप चिकित्सा कर सकते हो तो लौकी के रस की जगह गाय का मूत्र भी इतनी ही मात्रा में पी सकते हैं ] हो सकता है कि आप ऐसा न कर पाएं तो न करें लेकिन लौकी का रस जरूर पिएं ऐसा हम इसलिए बता रहें हैं क्योंकि गाय का मूत्र लौकी के रस की तुलना मे गुना जल्दी लाभ करता है तथा बिना किसी झंझट के आसानी से उपलब्ध भी हो जाता है इसलिए आप अपनी मर्जी से औषधि का चयन करें उपरोक्त कोई भी इलाज आप कर सकते हैं आप इतना विश्वास जरूर करें कि इस इलाज के बाद आप हृदय रोग या पागलपन से तो मरेंगे नहीं|अन्य रोग की मै बात नहीं करता|

इलाज का तीसरा चरण

पीपल के पेड़ से तो आप परिचित ही होंगे क्योंकि यह पेंड़ लगभग हर जगह आसानी से उपलब्ध हो जाता है इस पेड़ के पर्याप्त मात्रा में पत्ते लाकर शाम को पानी में भिगो दें सुबह होने पर '' भपके '' के जरिए इन पत्तों का अर्क निकाल लीजिए इस अर्क को सुरक्षित बोतलों में भरकर रख लीजिए इसकी भी लगभग 50 ग्राम मात्रा नाश्ते के घंटे बाद सेवन किया करें इस औषधि सेवन के 50 मिनट पश्चात तक कुछ न खाएं यह अर्क दिन में तीन बार लिया करें अर्क सेवन के 50 मिनट पहले तथा एक घंटा बाद कुछ भी न खाएं और न ही पिए |

सावधानी

रोगी को चाहिए कि वह अपने पास एलोपैथिक औषधि '' सोर्बिट्रेट 5 mg '' कि गोलियाँ अपने पास अवश्य रखें कभी-कभी ऐसा होता है कि चिकित्सीय परीक्षण में भी रोग की सही तीव्रता का पता नहीं लग पाता है इसलिए हो सकता कि आपको अचानक हृदय रोग की पीड़ा होने लगे ऐसे मे यह गोलियां आपके उपचार मे काम आएंगी ह्रदय रोग का आभास होने पर इसकी एक गोली जीभ के नीचे रख लेने से हृदय रोग की पीड़ा से आप का बचाव होता रहेगा यह गोलियाँ ज्यादा महंगी भी नहीं है तथा जीवन रक्षक होने के कारण मेडिकल स्टोर्स पर आसानी से मिल जाती हैं |

इस चिकित्सा के दौरान आप यह बात जरूर ध्यान रखें कि हृदय रोग जानलेवा रोगों में है फिर भी यह आसानी से किसी की जान नहीं लेता है यदि आप धैर्यपूर्वक चिकित्सा करेंगे तथा विश्वास बनाए रखेंगे तो आपको निश्चित रूप से लाभ मिलेगा यह मेरा दावा है कि विधिविधान से नियमित चिकित्सा करेंगे तो आप हृदय रोग से तो स्वर्गवासी नही होंगे इस चिकित्सा से आप पागलपन के रोगियों का इलाज करके उनके पागलपन को भी दूर कर सकेंगे |

जय आयुर्वेद

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