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दिव्यांगजनों की समस्यायें



आदरणीय सम्पादक जी सादर प्रणाम।

दैवीय भूलवश अथवा चिकित्सा वैज्ञानिकों के अनुसार आयोडीन की कमी तथा कुपोषण के कारण मानसिक और शारीरिक विकलांग बच्चों का जन्म होना बताया जाता है।भारत में जन्मजात विकलांग बच्चों की संख्या काफी ज्यादा है।कुछ विकलांग नशे अथवा यातायात नियमों के न पालन करने के कारण भी स्थाई रूप से विकलांग हो जाते हैं।यह तो सत्य है कि जन्मजात विकलांग बच्चों में कोई न कोई दिव्य गुण अवश्य होता है।माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी नेंं विकलांग जन हेतु दिव्यांग शब्द सुझाया जो अवश्य ही दिव्य गुणों की ओर इंगित करता है।दिव्यांग जनों के लिए यह शब्द अवश्य ही यथा नामे तथा गुणे की कहावत चरितार्थ करता है।यदि आदमी ठान ले तो शारीरिक विकलांगता कोई मायने नहीं रखती है।अरुणिमा सिन्हा इसका सशक्त और सजीव उदाहरण है।वैसे दिव्यांग जनो के जीवन में कठिनाई ही कठिनाई हैं।दिव्यांग जनो हेतु सरकार और समाज द्वारा काफी काम किए जाने की आवश्यकता है।ईश्वर की भूलवश या कुपोषण वश अथवा मानवीय गलतियों वश दिव्यांग जन उपेक्षा नहीं आदर के पात्र हैं।प्रति दिव्यांग जन को प्रधानमंत्री आवास, पेंशन,यथोचित जीवन यापन हेतु रोजगार अथवा अनिवार्य रूप से सरकारी नौकरी देकर ही इनको उपकृत किया जा सकता है।बहुत से चालक संविदा की नौकरी करते हुए दिव्यांग हो जाते हैं।उ.प्र.राज्य परिवहन निगम न तो इलाज ही करवाता है न ही भरण पोषण भत्ता ही देता है।उल्टे अक्षम करार देकर नोकरी से भी निकाल देता है।जो दिव्यांग जन के साथ अन्याय ही करता है।समाज भी इन्हें हेय दृष्टि से देखता है।दिव्यांग जन भी समाज का एक हिस्सा हैं इन्हें भी समाज में बराबरी का हक हासिल है।फिर इनके साथ अन्याय क्यों किया जाता है?

अतः सरकार से निवेदन है कि दिव्यांग जनों को निवास, भोजन,और बिजली,पानी मुफ्त में देकर इन्हें उपकृत करने की कृपा करें।केवल दिव्यांग शब्द सुझाने से ही इनका पेट नहीं भरने वाला।इनको दिव्य सहायता की भारी जरूरत है।जिस विभाग में संविदा कर्मचारियों की दिव्यांगता प्राप्त हुई हो उस विभाग की जिम्मेदारी होनी चाहिये कि ताजिंदगी इन्हें नौकरी पर रखकर वेतन देना चाहिए।जब इन्हें वास्तविक रूप से वेतन की आवश्यकता होती है तो आप उसे अक्षम करार देकर भीख मांगने हेतु छोड़ दिया जाता है।इनके सामने परिवार के भरण-पोषण की समस्या और जटिल हो जाती है।

प्रमोद कुमार दीक्षित, सेहगों, रायबरेली।

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